सब्यसाची दत्ता गिरफ्तार, विरोध के बीच गाड़ी पर फेंके गए टमाटर-अंडे और गोबर
कोलकाता, बिधाननगर नगर निगम के प्रथम मेयर और वर्तमान चेयरमैन रहे तृणमूल कांग्रेस नेता सब्यसाची दत्ता को एक कारोबारी से कथित तौर पर एक करोड़ से अधिक रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके ऊपर टमाटर, अंडे और गोबर फेंके गए। हालांकि दत्ता ने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रतिशोध का परिणाम बताया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, साल्ट लेक निवासी कारोबारी मधुसूदन चक्रवर्ती ने बिधाननगर कमिश्नरेट में लिखित शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि सब्यसाची दत्ता लंबे समय से उन पर पैसे देने का दबाव बना रहे थे। शिकायत में रंगदारी मांगने, जान से मारने की धमकी देने और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उनसे कुल एक करोड़ आठ लाख रुपये की मांग की गई थी। वहीं शिकायत में फरवरी 2018 में एक करोड़ रुपये की कथित वसूली का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने सोमवार देर रात राजारहाट के रायगाछी इलाके में छापेमारी कर सब्यसाची दत्ता को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को उन्हें स्वास्थ्य परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल से बाहर निकलने और बाद में बिधाननगर उत्तर थाने से रवाना होने के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी की ओर टमाटर, अंडे और गोबर फेंके। विरोध से बचने के लिए दत्ता को वाहन के भीतर कागज से अपना चेहरा ढंकते हुए देखा गया।
गिरफ्तारी के बाद मीडिया से बातचीत में सब्यसाची दत्ता ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि एक करोड़ क्यों, 100 करोड़ रुपये लेने का आरोप भी लगाया जा सकता है। अगर किसी ने मुझे कभी एक रुपया भी दिया हो तो मुझे फांसी पर चढ़ा दिया जाए।
उन्होंने दावा किया कि यदि कोई उनके द्वारा अवैध रूप से धन लेने का प्रमाण दे दे तो वह किसी भी सजा का सामना करने को तैयार हैं। शिकायतकर्ता पर पलटवार करते हुए दत्ता ने कहा कि उन्हें 2018 में बिधाननगर उत्तर थाने की पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके अलावा कई बार गिरफ्तार किया गया। उस समय उनके परिवार के लोग और एक कारोबारी मेरे पास जमानत दिलाने की गुहार लेकर आए थे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, तो उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से। यह पूरी तरह राजनीतिक प्रतिहिंसा का परिणाम है।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता मधुसूदन चक्रवर्ती का कहना है कि उन्होंने पहली बार 2018 में ही इस मामले की शिकायत की थी, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए उन्होंने एक बार फिर पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। उनका आरोप है कि उनसे एक करोड़ पांच लाख रुपये की वसूली की मांग की गई थी।















