प्रशासनिक उपेक्षा की शिकार सबौर-राजपुर-शिवायडीह सड़क, गड्ढों में तब्दील हुआ ग्रामीणों का मुख्य मार्ग
भागलपुर, जिले के सबौर प्रखंड के दक्षिणी क्षेत्र को जिला
मुख्यालय और सन्हौला सहित पड़ोसी राज्य झारखंड से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण
सबौर - राजपुर - शिवायडीह - मुरहन मुख्य मार्ग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा
है। वर्तमान में यह सड़क पूरी तरह से जर्जर और ध्वस्त हो चुकी है। सड़क पर
बने बड़े-बड़े गड्ढे किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं।
स्थानीय
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की लंबी मांग के बाद ग्रामीण कार्य विभाग
सबौर ने सड़क के नए सिरे से निर्माण के लिए विस्तृत प्राक्कलन तैयार कर
मुख्यालय को भेजा है, जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है।
विगत वर्षों में गंगा के बढ़े जलस्तर और बाढ़ के पानी के सड़क पर चढ़ जाने
के कारण इस मार्ग की स्थिति बद से बदतर हो गई। करीब 7 किलोमीटर लंबा यह
मुख्य मार्ग कई जगहों पर पूरी तरह कट गया है। इससे पहले लाखों की लागत से
बनी पीसीसी सड़क में भी घटिया निर्माण के कारण बड़ी-बड़ी दरारें आ गई थीं,
जो अब पूरी तरह उखड़ चुकी हैं।
कतरिया नदी पर सालों से लंबित पड़े
पुल के काम और सड़क की इस जर्जर हालत ने ग्रामीणों की कमर तोड़ दी है। इस
सड़क मार्ग के ठप होने या जर्जर होने से सबौर प्रखंड की कई महत्वपूर्ण
पंचायतें जैसे लैलख, बैजलपुर, और परघड़ी सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इसके
अलावा लगभग दो दर्जन गांवों के लोगों के लिए भागलपुर शहर आने-जाने का यह
एकमात्र मुख्य रास्ता है। सड़क खराब होने से आपातकालीन स्थिति में
एम्बुलेंस का गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। स्कूली बच्चों, कॉलेज
के छात्रों और स्थानीय किसानों को रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर सफर
करना पड़ता है। सड़क जर्जर होने के कारण वाहनों का मेंटेनेंस खर्च बढ़ गया
है और ऑटो चालकों ने इस रूट पर परिचालन कम कर दिया है।
ग्रामीण
कार्य विभाग, सबौर के कार्यपालक अभियंता के अनुसार, सड़क की दुर्दशा को
देखते हुए वरीय अधिकारियों के निर्देश पर सड़क नवीनीकरण और पुनर्निर्माण का
एक ठोस प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया है। अधिकारियों का दावा है कि जैसे
ही पटना मुख्यालय से इस बजट और प्रस्ताव को वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति
मिल जाएगी, वैसे ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर सड़क का निर्माण कार्य
युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर दिया जाएगा।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर बार चुनाव और बाढ़ के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों
ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस महत्वपूर्ण लाइफलाइन सड़क का टेंडर
जारी कर निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो वे उग्र आंदोलन और सड़क जाम
करने को विवश होंगे।





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