शारदीय नवरात्रि 2026: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना का विशेष अवसर माना जाता है। नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय, नकारात्मक शक्तियों और संकटों से रक्षा प्रदान करती हैं।
नवरात्र का छठा दिन आज: मां कात्यायनी की आराधना से दूर होंगे संकट, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और शुभ रंग
Ranchi: शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन नवदुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से की जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण देवी के इस रूप को ‘स्कंदमाता’ कहा गया है. मां स्कंदमाता की उपासना से भक्तों को सुख
शिलांग, मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिला प्रशासन ने इस वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सड़कों के कुछ हिस्सों पर बने पंडालों को रहने की अनुमति दी है। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की व्यवस्था जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
महा अष्टमी और महानवमी सोमवार, 19 अक्टूबर, 2026 को मनाई जाएगी।
इसके पीछे परिवार के एक युवा सदस्य की असमय मृत्यु से जुड़ी मार्मिक कहानी है।
वर्ष 1568 में शुरू हुई इस पूजा का 459वां वर्ष है। यहां पशुबलि के बजाय चावल के आटे से बने पुतले की प्रतीकात्मक बलि दी जाती है।
बद्रीनाथ, चारधाम यात्रा एवं पितृ पक्ष के चलते श्री बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। पितृ पक्ष के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री बद्रीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल पहुंचकर अपने पितरों की आत्मशांति एवं मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस विशेष आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहीं। इस दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा।
मध्य प्रदेश के उज्जैनस्थितविश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के बाद गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी
इस वर्ष नवरात्र में तिथि की वृद्धि होने के कारण यह पर्व दस दिनों तक चलेगा और ग्यारहवें दिन विजया दशमी के साथ ये महापर्व का समापन होगा।
पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने में चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर को सुबह 1:07 बजे शुरू होगी और 29 अक्टूबर को रात 10:11 बजे समाप्त होगी।
दृक पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह 7:59 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर को सुबह 5:51 बजे समाप्त होगी।
माना जाता है कि इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में शांति, सुख और समृद्धि आती है।
अगर मृत्यु की तिथि पता न हो, तो अमावस्या के दिन श्राद्ध किया जा सकता है।
दुर्गापूजा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, बंगालियों में उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। बंगाल के सबसे बड़े उत्सव दुर्गापूजा का पूरा आनंद लेने के लिए लोग तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने गुरूवार को कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस बार पूजा के बाद कोई कार्निवल नहीं होगा, बल्कि दुर्गापूजा के उद्घाटन के मौके पर ही मेगा आयोजन किया जाएगा।
सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में पूजा-अर्चना शुरू हुई। पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर पंचामृत से अभिषेक किया गया।
स्थानीय बुजुर्गों ने बताया, स्वतंत्रता से पहले से ही यहां यह पूजा होती आ रही है। गांव के कर्मकार समुदाय के लोगों ने इस पूजा की शुरुआत की थी। कांसा के बर्तन बनाने के काम से जुड़े कर्मकार समुदाय के लिए सृष्टि और शिल्प के देवता भगवान विश्वकर्मा आराध्य हैं। आज भी कर्मकार समुदाय के लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस पूजा को करते आ रहे हैं।
भोपाल, मध्य प्रदेश के उज्जैन में गुरुवार की रात सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत रामघाट पर आयोजित कार्यक्रम में शहर की सांस्कृतिक पहचान एवं धार्मिक परंपराओं पर आधारित मनमोहक महाकाल सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। सांस्कृतिक कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं एवं उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर दिया।
रांची: देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा को लेकर गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को रांची समेत पूरे झारखंड में उत्साह का माहौल है। कारखानों, गैरेज, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप, सर्विस सेंटर, रेलवे परिसर और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा-अर्चना की जा रही है।
विशेष पूजन के उपरांत महाकालेश्वर मंदिर में दीपोत्सव का भव्य शुभारंभ किया गया। संपूर्ण महाकाल मंदिर परिसर को आकर्षक आतिशबाजी और रोशनी से सजाया गया है। अकेले महाकाल मंदिर प्रांगण में ही 6 से 7 लाख दीपक प्रज्ज्वलित किए जा रहे हैं, जिससे पूरा परिसर स्वर्णमयी आभा से चमक उठा है।
मदुरै, विश्व प्रसिद्ध मीनाक्षी अम्मन मंदिर में गुरुवार को महा कुंभाभिषेक समारोह भव्य तरीके से संपन्न हुआ। इस धार्मिक आयोजन के मद्देनजर मंदिर में करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार कार्य कराए गए। अग्निकांड में क्षतिग्रस्त हुए वीर वसंतरायर मंडप का भी पुनर्निर्माण किया गया।
भस्म आरती की शुरुआत में प्रथम घंटाल बजाकर भगवान महाकाल को हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच पूजन के बाद कपूर आरती हुई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई।
सुबह करीब चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का हरिओम जल से अभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से पूजन-अभिषेक किया गया।
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर के पट सुबह चार बजे खुले। पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया।
नई दिल्ली: आज 14 सितंबर 2026 को देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी के साथ घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना का सिलसिला शुरू हो गया है। श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर विघ्नहर्ता गणपति का आशीर्वाद ले रहे हैं।
नई दिल्ली: देशभर में आज से गणेश उत्सव 2026 की शुरुआत हो गई है। भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही महाराष्ट्र समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में उत्सव का माहौल बन गया है। सुबह से ही गणपति मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है। “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया है।
भस्म आरती से पहले भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल-मिष्ठान का भोग लगाया गया। कपूर आरती और नैवेद्य के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी बाबा को भस्म अर्पित की गई।
रामगढ़, श्री मारवाड़ी सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री रानी सती दादी मंदिर परिसर में आयोजित 20 वें भादो अमावस्या महोत्सव का शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति के बीच भव्य समापन हुआ। महोत्सव के संयोजक अशोक अग्रवाल थेे। अंतिम दिन तडके सुबह से पाटा पूजा और सवामणि प्रसाद का भोग दादी भक्तों की ओर से अर्पित किया गया।
अगर आप इस साल हरतालिका तीज मनाने की योजना बना रहे हैं, तो यहां कुछ पारंपरिक रीति-रिवाज दिए गए हैं जिनका ध्यान रखना ज़रूरी है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार तड़के भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर भगवान महाकाल की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया।
ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच एक प्राचीन हनुमान मूर्ति को सुरक्षित स्थानांतरित करने की प्रशासनिक अथक परिश्रम और कवायद लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को हटाना नगर निगम और जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
उत्तर प्रदेश का नैमिषारण्य केवल एक प्राचीन तीर्थस्थल ही नहीं, बल्कि सनातन परंपरा में आस्था, ज्ञान और तपस्या की महत्वपूर्ण भूमि के रूप में प्रतिष्ठित है। सीतापुर जिले में गोमती नदी के तट पर स्थित इस पौराणिक तीर्थ को अब अयोध्या की तर्ज पर विकसित कर भव्य वैदिक नगरी का स्वरूप देने की दिशा में काम तेज किया गया है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान और विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। मंदिर के पट सुबह करीब चार बजे खुले। इसके बाद गर्भगृह में स्थापित भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया गया।
मथुरा, श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर अजन्मे के जन्मोत्सव का पावन पर्व अत्यंत हर्षाेल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही मथुरा पहुंच गए थे। भक्तों में कान्हा के दर्शन को लेकर गजब का उत्साह और उमंग देखने को मिली।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर अजन्मे के जन्मोत्सव का पावन पर्व अत्यंत हर्षाेल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही मथुरा पहुंच गए थे। भक्तों में कान्हा के दर्शन को लेकर गजब का उत्साह और उमंग देखने को मिली।
मुट्ठीगंज चौराहे पर स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य सजावट की गई। इस दौरान बाबा बर्फानी का सजीव श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहा। मध्य रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
रायपुर, छत्तीसगढ़ के मठ और मंदिरों में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है । रायपुर सहित प्रदेश के मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया है। शहर के अलग-अलग मंदिरों में विशेष पूजा, अभिषेक, भजन-कीर्तन और भोग की तैयारियां की गई हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर प्रयागराज में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। पर्व के अवसर पर पुलिस लाइन परिसर स्थित मंदिर सहित जिले के सभी प्रमुख मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी और विशेष सजावट से मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आ रहे हैं।
पूरे देश समेत दुनिया के कई हिस्सों में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में भी जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। कन्हर नदी के तट पर स्थित प्राचीन श्रीराम मंदिर को सजाया गया है। मंदिर परिसर की साफ-सफाई के साथ लाइटिंग की व्यवस्था भी की गई है।
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