छपरा में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग सम्पन्न, प्रांत प्रचारक रवि शंकर ने पंच परिवर्तन का दिया संदेश
सारण, जयप्रकाश विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में शिक्षा
संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित दो दिवसीय अभ्यास वर्ग का रविवार को
समापन हो गया। समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (उत्तर बिहार) के
प्रांत प्रचारक रवि शंकर ने पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज और शिक्षा
व्यवस्था में भारतीय मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
अपने
संबोधन में रवि शंकर ने कहा कि सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब
प्रबोधन, स्वदेशी का आचरण और नागरिक कर्तव्यों का पालन ऐसे पांच महत्वपूर्ण
विषय हैं, जिन्हें प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा
बनाया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर
राष्ट्रहित में समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम
की अध्यक्षता करते हुए जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमेन्द्र
बाजपेई ने कहा कि शिक्षा और संस्कृति को कभी अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब वह भारतीय संस्कृति और सामाजिक सहभागिता से
जुड़ी होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को पूर्णतः समाज आधारित बनाने
की आवश्यकता है। समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना शिक्षा में भारतीयता का
समावेश संभव नहीं है।
कुलपति ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के
निर्माण से लेकर उसके प्रभावी क्रियान्वयन तक शिक्षा संस्कृति उत्थान
न्यास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे इस क्षेत्र में देश के
अग्रणी संस्थानों में शामिल बताया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन
प्रोफेसर सूर्य देव ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते
हुए अतिथियों का परिचय कराया और पूरे आयोजन का संचालन किया।
अभ्यास
वर्ग के उद्घाटन एवं समापन सत्र में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक,
शोधार्थी, छात्र-छात्राएं तथा विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक संगठनों के
कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ दो
दिवसीय अभ्यास वर्ग का समापन हुआ।













