रांची (RANCHI): कैंसर का दोबारा होना (relapse) समझना मुश्किल हो सकता है, खासकर तब जब किसी ने अपना इलाज पूरा कर लिया हो और ऐसा लग रहा हो कि वह ठीक हो रहा है। नई दिल्ली के PSRI अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट हेमेटोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. अमित उपाध्याय बताते हैं कि 'रीलैप्स' का क्या मतलब है, इलाज के बाद कैंसर वापस क्यों आ सकता है, डॉक्टर स्थिति का आकलन कैसे करते हैं और मरीजों को किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कैंसर के दोबारा होने (relapse) का क्या मतलब है?

कैंसर के दोबारा होने का मतलब है कि बीमारी के कोई लक्षण न दिखने या मरीज के 'रेमिशन' (बीमारी के प्रभाव से मुक्त होने) की स्थिति के बाद, कैंसर फिर से वापस आ गया है। डॉ. उपाध्याय ने बताया कि इलाज के जरिए कैंसर को इतना नियंत्रित किया जा सकता है कि वह जांच में न आए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कैंसर की हर एक कोशिका (cell) पूरी तरह खत्म हो गई है। उन्होंने कहा, "कुछ मामलों में, कैंसर की कुछ कोशिकाएं इलाज के बाद भी बची रह सकती हैं। ये कोशिकाएं महीनों या सालों तक शांत रह सकती हैं और बाद में फिर से अपनी संख्या बढ़ाना शुरू कर सकती हैं।" ऑन्कोलॉजिस्ट ने आगे कहा कि यही वजह है कि मरीज के पूरी तरह ठीक महसूस करने पर भी, सुझाए गए इलाज को पूरा करना और नियमित मेडिकल फॉलो-अप जारी रखना बहुत जरूरी है।

कैंसर का दोबारा होना (relapse) कितना गंभीर है?

कैंसर के दोबारा होने को गंभीरता से लेना चाहिए, लेकिन डॉ. उपाध्याय ने जोर देकर कहा कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इलाज के सारे विकल्प खत्म हो गए हैं। कैंसर के दोबारा होने के बाद आगे क्या होगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है—जैसे कि कैंसर शरीर के किस हिस्से में वापस आया है, और क्या यह किसी एक जगह तक सीमित है या शरीर के अन्य हिस्सों में फैल गया है। उन्होंने बताया कि "पहले हुए कैंसर का प्रकार और स्टेज क्या था, मरीज कितने समय तक कैंसर-मुक्त (remission) रहा, और आगे के इलाज पर कैंसर कैसी प्रतिक्रिया देता है"—इन बातों से तय होता है कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, मरीज की सामान्य सेहत और उसे पहले दिए जा चुके इलाज पर भी विचार किया जाता है। इसलिए, हर मरीज के लिए इलाज का तरीका अलग-अलग हो सकता है। कुछ मामलों में, डॉक्टर कैंसर को खत्म करने के लिए आक्रामक (aggressive) इलाज अपना सकते हैं। वहीं कुछ अन्य मामलों में, इलाज का मुख्य फोकस बीमारी को नियंत्रित करने और मरीज के जीवन की गुणवत्ता (quality of life) को बेहतर बनाए रखने पर हो सकता है। डॉ. उपाध्याय ने कहा, "बीमारी के आगे के नतीजों (prognosis) पर हर मरीज की स्थिति के हिसाब से अलग-अलग चर्चा की जानी चाहिए।"

कैंसर के दोबारा होने (relapse) का संकेत देने वाले लक्षण क्या हो सकते हैं?

कैंसर का इलाज पूरा होने के बाद, मरीजों को ऐसे लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए जो नए हों, लगातार बने रहें या उनके लिए असामान्य हों। डॉ. उपाध्याय के अनुसार, कुछ ऐसे संकेत हैं जिन पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है:
  • बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना
  • लगातार थकान महसूस होना
  • शरीर में कोई नई गांठ या सूजन आना
  • लगातार दर्द बने रहना
  • खांसी का ठीक न होना
  • बिना किसी स्पष्ट कारण के सांस फूलना
  • मल या मूत्र त्यागने की आदतों में बदलाव आना
  • असामान्य ब्लीडिंग (खून आना)
  • लगातार भूख न लगना
हालांकि, इनमें से कोई एक लक्षण दिखने का मतलब यह नहीं है कि कैंसर वापस आ गया है। डॉ. उपाध्याय ने जोर देकर कहा कि इनमें से कई लक्षणों के कारण कैंसर के अलावा कुछ और भी हो सकते हैं।