रांची: झारखंड में अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर सरकार ने सख्त रुख अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के सभी जिलों में अवैध खनन पर निगरानी और कार्रवाई के लिए टास्क फोर्स गठित करने की तैयारी है। इसके साथ ही खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए प्रमुख मार्गों पर चेकनाके स्थापित किए जाएंगे।

सरकार का उद्देश्य खनिज संपदा के अवैध दोहन पर अंकुश लगाने के साथ-साथ राजस्व की होने वाली संभावित क्षति को रोकना है। जिला प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय के जरिए अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई को तेज करने की योजना है।

सभी जिलों में बनेगी टास्क फोर्स

अवैध खनन की शिकायतों और गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जिलास्तर पर टास्क फोर्स को सक्रिय किया जाएगा। इस टीम में प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किए जाने की संभावना है।

टास्क फोर्स का काम अपने-अपने जिले में अवैध खनन वाले क्षेत्रों की पहचान करना, खनिजों के अवैध परिवहन पर निगरानी रखना और सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करना होगा।

चेकनाके पर होगी वाहनों की जांच

अवैध खनन से निकाले गए खनिजों के परिवहन को रोकने के लिए संवेदनशील मार्गों और खनन क्षेत्रों से निकलने वाले प्रमुख रास्तों पर चेकनाके स्थापित किए जाएंगे। यहां खनिज लदे वाहनों के दस्तावेज और परिवहन से संबंधित वैध कागजात की जांच की जा सकती है।

बिना वैध दस्तावेज के खनिज ले जाने वाले वाहनों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इससे अवैध तरीके से खनिजों को एक जिले से दूसरे जिले या राज्य से बाहर ले जाने पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर

सरकार की कार्रवाई में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है जहां लंबे समय से अवैध खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं। नदी घाटों, पत्थर खदानों, बालू घाटों और अन्य खनिज क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा सकती है।

प्रशासन द्वारा ऐसे स्थानों की पहचान कर नियमित जांच और औचक निरीक्षण किए जाने की भी संभावना है।

अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और खनन विभाग के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा। कई मामलों में अवैध खनन के साथ-साथ खनिजों के परिवहन और भंडारण की भी शिकायतें सामने आती हैं।

ऐसे में केवल खनन स्थल पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क की निगरानी करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। टास्क फोर्स के जरिए खनन स्थल से लेकर परिवहन और भंडारण तक की गतिविधियों पर नजर रखने का प्रयास होगा।

राजस्व नुकसान रोकना भी बड़ी चुनौती

अवैध खनन से सरकार को राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों पर भी असर पड़ता है। खासकर नदियों से अवैध बालू उठाव और बिना अनुमति खनन के कारण प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

सरकार की नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य अवैध खनन से होने वाले राजस्व नुकसान को रोकना और वैध खनन व्यवस्था को मजबूत करना भी माना जा रहा है।

शिकायतों पर होगी त्वरित कार्रवाई

टास्क फोर्स के गठन के बाद अवैध खनन से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेने और मौके पर जांच कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। अधिकारियों को नियमित रिपोर्ट तैयार करने और कार्रवाई की जानकारी उच्च स्तर पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने की संभावना है।

यदि किसी क्षेत्र में लगातार अवैध खनन की शिकायत मिलती है, तो वहां विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जा सकती है।

अब कार्रवाई के साथ निगरानी भी होगी जरूरी

सरकार के इस कदम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि टास्क फोर्स और चेकनाके कितने प्रभावी ढंग से काम करते हैं। केवल चेकनाके स्थापित करने के बजाय उनकी नियमित निगरानी, पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई जरूरी होगी।

कुल मिलाकर, झारखंड सरकार अवैध खनन के खिलाफ जिलास्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने की तैयारी में है। सभी जिलों में टास्क फोर्स और प्रमुख मार्गों पर चेकनाके बनने से अवैध खनन तथा खनिजों के अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने की उम्मीद है।