झारखंड में स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के नए दिशा-निर्देश लागू, विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर तय होगा समिति का आकार
रांची: झारखंड सरकार ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से स्कूल प्रबंधन समिति (School Management Committee - SMC) के गठन से संबंधित नए दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब प्रत्येक विद्यालय की स्कूल प्रबंधन समिति का आकार वहां नामांकित विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से विद्यालयों के संचालन में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब सभी सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में नई व्यवस्था के तहत एसएमसी का गठन किया जाएगा। जिन विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या कम होगी, वहां समिति का आकार भी सीमित रहेगा, जबकि अधिक नामांकन वाले विद्यालयों में समिति में अधिक सदस्यों को शामिल किया जाएगा। इससे विद्यालय की आवश्यकताओं के अनुरूप समिति का गठन संभव हो सकेगा। स्कूल प्रबंधन समिति विद्यालय के संचालन, रखरखाव और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समिति विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं, विद्यार्थियों की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील), स्वच्छता, शिक्षण व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करती है। साथ ही विद्यालय विकास योजना तैयार करने और उसके प्रभावी कार्यान्वयन में भी समिति की अहम जिम्मेदारी होती है। नए दिशा-निर्देशों में समिति में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है। अधिकांश सदस्य विद्यार्थियों के अभिभावक होंगे, ताकि विद्यालय से जुड़े निर्णयों में समुदाय की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा महिला प्रतिनिधित्व और सामाजिक समावेशिता का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा, जिससे समाज के सभी वर्गों की सहभागिता बढ़े। शिक्षा विभाग का मानना है कि विद्यालय स्तर पर मजबूत और सक्रिय स्कूल प्रबंधन समिति बनने से बच्चों की नियमित उपस्थिति, ड्रॉपआउट दर में कमी, आधारभूत सुविधाओं का बेहतर रखरखाव और शिक्षण कार्यों की प्रभावी निगरानी संभव होगी। इससे सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार ने सभी जिला शिक्षा अधीक्षकों (DSE), प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों (BEEO) तथा विद्यालय प्रधानाध्यापकों को नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से स्कूल प्रबंधन समितियों का गठन या पुनर्गठन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नवगठित समितियों के सदस्यों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से अवगत कराने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना बनाई गई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यालय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाना, समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करना और सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक मजबूत एवं जवाबदेह प्रणाली विकसित करना है।विद्यालय विकास में होगी अहम भूमिका
अभिभावकों की भागीदारी पर विशेष जोर
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की पहल
अधिकारियों को दिए गए आवश्यक निर्देश














