मथुरा : टीईटी के विरोध में हजारों शिक्षकों ने थामी मशाल
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के नेतृत्व में बीएन पोद्दार इंटर कॉलेज से होलीगेट तक निकाला मशाल जुलूस
बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाओं ने किया प्रतिभाग
मथुरा, नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की मांग को
लेकर हजारों शिक्षकों ने मंगलवार शाम मशाल जुलूस निकाल कर विरोध बताया।
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले निकाले गए जुलूस में जूनियर
हाईस्कूल शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर
एसोसिएशन, महिला शिक्षक मोर्चा, एससी/एसटी बेसिक शिक्षक महासभा, उर्दू
बीटीसी शिक्षक संघ, यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) समेत प्रधानाचार्य
परिषद व भाकियू (चढ़ूनी) के पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया। शिक्षिकाओं ने
भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में भाग लिया। महासंघ के प्रांतीय आह्वान पर
मशाल जुलूस सेठ बीएन पोद्दार इंटर कॉलेज से होलीगेट तक निकाला गया।
टीईटी
अनिवार्यता के विरोध में किए प्रदर्शन में पैदल मार्च करते हुए हाथों में
मशाल और मोमबत्ती थामे शिक्षिकाओं का जोश देखते ही बन रहा था। प्राथमिक
शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष लोकेश गोस्वामी एवं संरक्षक अशोक लवानियां जी ने
प्रदर्शन में शामिल सभी घटकों के शिक्षकों का आभार जताते हुए शिक्षक विरोधी
मुद्दों पर एकता बनाए रखने की अपील की।
इस दौरान डॉ सीमा शर्मा
,रेनू राना, शिखा मिश्रा, श्रद्धा गौतम, सुशीला सिंह, शालिनी सक्सैना, मंजू
रानी, रेखा,शीतल,ब्रजबाला,पवन शर्मा, वीरेन्द्र सिंह, ऐश्वर्या ,नेहा
लवानियां, हेमा यादव,ऊषा, देवकांता,सुषमा, नंदकिशोर गुधैनियां, राजकुमार,
मुरारी लाल, नरेन्द्र तिवारी,विनोद पराशर,डोरीलाल,विनोद ,बिजेन्द्र
सिंह,गौरव गोस्वामी, प्रेमसिंह,महेश, श्याम बिहारी, शैलेन्द्र
वार्ष्णेय,सुनील,दीपक,सुषेन्द्र मित्तल, भगवान दास, राजेश, सुलेन्द्र ,शिवम
कुमार समेत हजारों शिक्षक व शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
क्या है मामला
दरअसल
एक सितम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रकरण में फैसला सुनाते हुए सभी
शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय इन
शिक्षकों पर भी लागू है जो आरटीई अधिनियम लागू होने से काफी पहले सेवा में आ
चुके थे। यह निर्णय एनसीटीई के वर्ष 2017 में आए एक संशोधन को आधार पर
दिया गया था। शिक्षकों का कहना है कि कोई भी नियम या कानून हमेशा बनाने की
तिथि के बाद से लागू होता है न कि पिछली तिथि से उसे लागू किया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षक भी हुए शामिल
जनपद
के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों ने भी मशाल जुलूस में शामिल हो कर
आवाज बुलंद की। बल्देव, फरह, राया, नौहझील व नंदगांव तक से शिक्षक बड़ी
संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे।















