मराठा आरक्षण: सरकार का प्रतिनिधिमंडल से मनोज जारांगे की चर्चा विफल, आंदोलन जारी
मुंबई, जालना जिले में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर पिछले छह
दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल से गुरुवार को सरकार के
मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल की चर्चा विफल साबित हुई है। मनोज जारांगे ने
सरकार कीओर से कई मांगें मान लिए जाने और 10 सितंबर तक शासनादेश जारी करने
के आश्वासन के बावजूद आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को
मराठा आरक्षण समिति के अध्यक्ष एवं मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, मकरंद
पाटिल और प्रसाद लाड ने जरांगे से मुलाकात कर भूख हड़ताल समाप्त करने की
अपील की थी।
राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बताया कि जरांगे की कई मांगों
पर निर्णय लिया जा चुका है और 10 सितंबर तक संबंधित शासनादेश जारी कर दिया
जाएगा। सरकार ईमानदारी से काम कर रही है और अब जरांगे को अपनी भूख हड़ताल
समाप्त कर देनी चाहिए। सरकार ने मराठा समाज के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले
लिए हैं। उन्होंने कहा कि शिंदे समिति ने बड़ी संख्या में पुराने रिकॉर्ड
खोजे हैं और लाखों युवाओं को जाति प्रमाणपत्र का लाभ मिला है। उन्होंने कहा
कि जाति प्रमाणपत्र के लिए जिलास्तर पर समितियां और नोडल अधिकारी नियुक्त
किए जाएंगे। इसके अलावा अलग मराठा सेल बनाने, छत्रपति शिवाजी महाराज मंडल
के माध्यम से कैंप आयोजित करने तथा अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक विकास महामंडल
के बकाया भुगतान जैसे निर्णय भी लिए जा रहे हैं।
इसके बाद मनोज
जरांगे ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार को 11 सितंबर
तक सभी मांगें पूरी करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "10 सितंबर तक शासनादेश जारी
कर दिया गया और फैसले लागू हुए तो हम 12 सितंबर को गुलाल लेकर मुंबई
जाएंगे।"
जरांगे ने कहा कि वह अपना "आखिरी आंदोलन" करना चाहते हैं
और फिलहाल भूख हड़ताल वापस लेने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 12
सितंबर को मुंबई जाने के लिए बड़ी संख्या में मराठा युवा पहुंच सकते हैं।
जरांगे ने कहा कि यदि 10 सितंबर तक सरकार ने फैसले लागू किए तो 12 सितंबर
को गुलाल लेकर मुंबई जाने का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि
फिलहाल आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा और सरकार को अपने आश्वासनों को जमीन पर
लागू करना होगा।















