रांची (RANCHI): सूचना और प्रसारण मंत्रालय (जिसे MIB के नाम से जाना जाता है) ने एक नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें सभी प्राइवेट सैटेलाइट TV चैनलों को निर्देश दिया गया है कि वे 'केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995' और 'केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994' के तहत दिए गए 'प्रोग्राम कोड' का सख्ती से पालन करें।
एडवाइजरी में इन चिंताओं को किया गया उजागर
नई एडवाइजरी में उन चिंताओं को उजागर किया गया है जो ब्रॉडकास्टर्स (मुख्य रूप से टीवी समाचार चैनल) द्वारा नियमों का पालन न करने को लेकर जताई गई हैं। इसमें उनसे कहा गया है कि वे संवेदनशील घटनाओं—जैसे आतंकवाद-विरोधी अभियान, देश में अपराध से जुड़े मामले, प्राकृतिक आपदाएं, हिंसा और सांप्रदायिक मुद्दों—की रिपोर्टिंग करते समय जिम्मेदारी बरतें। MIB ने आगे कहा कि 'केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2021' के तहत गठित अंतर-विभागीय समिति (IDC) ने ऐसे मामलों पर ध्यान दिया है, जहाँ कई चैनलों पर एक जैसे विषयों से जुड़ी खबरें और दृश्य प्रसारित किए जा रहे हैं।
सरकार चाहती है कि न्यूज़ चैनल तुरंत प्रभाव से इन मुख्य बातों का पालन करें-
1. आतंकवाद-विरोधी अभियानों का सीधा प्रसारण (लाइव टेलीकास्ट) न करें:
केवल आधिकारिक प्रवक्ता ही जानकारी दें, कोई भी चैनल अपनी तरफ से कुछ भी न जोड़े। अगर कोई चैनल टाइमस्टैम्प के साथ रिकॉर्ड किया गया फुटेज दिखाता है, तो दर्शकों को यह अंदाज़ा लग जाएगा कि असल में कार्रवाई किस समय हुई थी।
2. हिंसक दृश्यों के प्रसारण के समय सावधानी
चैनलों के संपादकों को परेशान करने वाली सामग्री प्रसारित करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना चाहिए। उदाहरण के लिए, भयानक दृश्यों को बार-बार (लूप में) दिखाने से बचें। साथ ही, जहां ज़रूरी हो, वहां दृश्यों को ब्लर (धुंधला) करें या मास्क करें—खासकर अपराध या दुर्घटनाओं की कवरेज के दौरान।
3. अपराध और हिंसा की ज़िम्मेदार रिपोर्टिंग
अवैध गतिविधियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने से बचें और केवल सत्यापित तथ्यों पर ही टिके रहें; किसी भी घटना को सनसनीखेज न बनाएं। महिलाओं या बच्चों के खिलाफ अपराधों की रिपोर्टिंग करते समय, पत्रकारों को इससे जुड़े कानूनी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
4. आपदाओं और बड़ी घटनाओं के दृश्यों पर समय (टाइम-स्टैम्प) अंकित करें
अगर बिना किसी संदर्भ के पुराने या भ्रामक दृश्य सामने आ जाएं, तो समाचार देखने वाले अक्सर परेशान हो जाते हैं। इसलिए, प्रसारण करते समय चैनलों को जानकारी स्पष्ट और सटीक रखनी चाहिए।
5. भारत के केवल प्रामाणिक मानचित्रों का ही उपयोग करें
टीवी ग्राफिक्स से लेकर डिजिटल प्रस्तुतियों तक, प्रसारण में दिखाए जाने वाले सभी मानचित्र 'सर्वे ऑफ इंडिया' (Survey of India) से लिए जाने चाहिए। यह कदम देश की सीमाओं और अखंडता की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।
6. डिबेट कार्यक्रमों में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखें
लाइव डिबेट दिखाने वाले पैनलों को नफरत या देश-विरोधी भावनाओं को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। संपादकीय टीमों को अपने मेहमानों की पहले से जांच कर लेनी चाहिए और उन्हें अच्छी तरह बता देना चाहिए कि डिबेट के दौरान किन बातों से बचना है। अगर कोई व्यक्ति संदर्भ से हटकर बात करता है, सीमा पार करता है या नए नियमों का उल्लंघन करता है, तो चैनलों को तुरंत उसका ऑडियो म्यूट कर देना चाहिए, उसे रोकना चाहिए, या फिर तुरंत प्रसारण (फीड) ही बंद कर देना चाहिए।
7. यौन अपराध के पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखें
किसी भी स्थिति या परिस्थिति में, पीड़ितों की असली तस्वीरें, उनके परिवार या उनके पड़ोस जैसी जानकारी कभी उजागर न करें (जिससे उनकी पहचान सामने आ सके)। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के नियमों और कानून का पालन करना अनिवार्य है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह
इस एडवाइजरी में टेलीविजन प्रोग्रामिंग और समाचार प्रस्तुतियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जिसमें जेनरेटिव AI भी शामिल है) के इस्तेमाल के बारे में बताया गया है। ब्रॉडकास्टर्स को सलाह दी जाएगी कि वे AI टूल्स का इस्तेमाल करते समय समाचार सामग्री की सटीकता, प्रमाणिकता या संवेदनशीलता से कोई समझौता न करें। मंत्रालय ने विशेष रूप से AI से बने ग्राफिक्स, वर्चुअल समाचार प्रस्तुतियों और अन्य एप्लिकेशनों पर ध्यान दिया है, ताकि वे 'प्रोग्राम कोड' के अनुरूप बने रहें। इसके अलावा, एडवाइजरी में ब्रॉडकास्टर्स से कहा गया है कि वे अपनी संपादकीय और सामग्री से जुड़ी प्रक्रियाओं को मजबूत करें, ताकि मंत्रालय द्वारा सभी मौजूदा चैनलों के लिए तय किए गए नियमों का बेहतर तरीके से पालन हो सके।















