यरुशलम,  यूरोपीय संघ (ईयू) और 14 देशों ने कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में संयुक्त राष्ट्र की फिलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी यूएनआरडब्ल्यूए की एक सुविधा पर इजराइली सेना के कब्जे की कड़ी निंदा की है। इन देशों ने यूएनआरडब्ल्यूए के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए इज़राइल से एजेंसी के कामकाज में किसी भी तरह की रुकावट तत्काल रोकने की मांग की है।

तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू

के मुताबिक, यरुशलम स्थित बेल्जियम के महावाणिज्य दूतावास की ओर से जारी संयुक्त बयान में बेल्जियम, ब्राज़ील, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, जापान, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्पेन, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इज़राइली सेना द्वारा कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर में कथित "गैर-कानूनी प्रवेश" और पूर्वी यरुशलम में यूएनआरडब्ल्यूए की सुविधाओं पर कब्जे की आलोचना की।

यूएनआरडब्ल्यूए सलाहकार आयोग के सदस्य इन देशों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के परिसरों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुरक्षा प्राप्त है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विशेषाधिकार और प्रतिरक्षा से संबंधित कन्वेंशन का हवाला देते हुए कहा कि इन परिसरों की स्थिति का सम्मान किया जाना चाहिए।

संयुक्त बयान में इज़राइल से संयुक्त राष्ट्र के निर्देशों का "तुरंत और पूरी तरह से पालन" करने की मांग की गई। देशों ने कहा कि यूएनआरडब्ल्यूए को बिना किसी बाधा के अपना निर्धारित मानवीय और अन्य कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

बयान में इज़राइल से अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का सम्मान करने और यूएनआरडब्ल्यूए की गतिविधियों एवं कामकाज में सभी तरह की रुकावटों को बिना देरी रोकने का भी आह्वान किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को इज़राइली सेना ने यूएनआरडब्ल्यूए के कर्मचारियों को कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर से बाहर निकाल दिया और परिसर पर नियंत्रण कर लिया। इसके बाद सेंटर के आंगन में इज़राइली झंडा भी फहराया गया।

इज़राइली सेना के जवान कलंदिया शरणार्थी शिविर और पास के काफ़्र अक़ाब इलाके में भी तैनात रहे। इस दौरान तलाशी अभियान चलाए जाने और फिलिस्तीनियों से पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई।

इन घटनाक्रमों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई है। कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर में शिक्षा, व्यावसायिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा ट्रेनिंग वर्कशॉप, क्लासरूम, डॉरमेट्री और प्रशासनिक इमारतें मौजूद हैं।

यह सुविधा वर्ष 1952 में फिलिस्तीन में यूएनआरडब्ल्यूए के शुरुआती केंद्रों में से एक के तौर पर स्थापित की गई थी। यहां करीब 270 छात्र 16 व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेते हैं। हर साल लगभग 250 से 300 छात्र इस केंद्र से अपना प्रशिक्षण पूरा करते हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यूएनआरडब्ल्यूए को लेकर इज़राइल और संयुक्त राष्ट्र के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। इज़राइली संसद ने 2024 में ऐसे कानून को मंजूरी दी थी, जिसके तहत इज़राइल के अंदर यूएनआरडब्ल्यूए की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने और एजेंसी के कामकाज को सीमित करने का प्रावधान किया गया था। यह कानून पिछले साल लागू हुआ।

अक्टूबर, 2025 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने भी दोहराया था कि इज़राइल को संयुक्त राष्ट्र की सुविधाओं, जिसमें यूएनआरडब्ल्यूए द्वारा संचालित परिसरों का भी शामिल हैं, की सुरक्षा और पवित्रता का सम्मान करना चाहिए और एजेंसी के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इज़राइल के विरोध के बावजूद यूएनआरडब्ल्यूए के मैंडेट को तीन साल के लिए बढ़ा दिया। इसके तहत एजेंसी को जून 2029 तक अपना काम जारी रखने की अनुमति मिली है।