काठमांडू,  नेपाल के विदेशमंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि एशिया के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव के बीच नेपाल को अपनी भौगोलिक स्थिति को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर में बदलना चाहिए। उन्होंने नेपाल को एशिया के आर्थिक, डिजिटल और रणनीतिक ‘ब्रिज’ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी द्वारा आयोजित ‘स्टियरिंग नेपाल्स फ्यूचर इन एशियाज राइजिंग सेंचुरी’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खनाल ने कहा कि नेपाल को अपनी भौगोलिक स्थिति को राष्ट्रीय आकांक्षाओं की सीमा नहीं मानना चाहिए।

विदेश मंत्री खनाल ने नेपाल को पारंपरिक रूप से ‘छोटा देश’ मानने वाली सोच बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “नेपाल छोटा नहीं है। नेपाल रणनीतिक रूप से सही स्थान पर है। हमारे पड़ोसियों का आकार भूगोल की वास्तविकता है, लेकिन यह हमारी महत्वाकांक्षा की सीमा कभी नहीं बनना चाहिए।” उन्होंने नेपाल के भूगोल और आबादी की अन्य देशों से तुलना करते हुए कहा कि नेपाल को केवल उसके आकार के आधार पर नहीं समझा जाना चाहिए।

हाल में आई विनाशकारी बाढ़ का जिक्र करते हुए खनाल ने इसे ‘हिमालयन सुनामी’ बताया। उन्होंने कहा कि नेपाल लंबे समय से प्राकृतिक आपदाओं, कठिन भूगोल और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करता रहा है। खनाल ने कहा कि हाल की आपदा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जलवायु परिवर्तन को नेपाल की विदेश नीति की रणनीतिक प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली, जल संबंधी आंकड़ों के आदान-प्रदान, पूर्वानुमान योग्य अनुदान आधारित जलवायु वित्त तथा पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ व्यावहारिक सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही।

एशिया के उदय को नेपाल के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए खनाल ने कहा कि दुनिया की करीब 60 प्रतिशत आबादी एशिया में रहती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एशिया का योगदान भी बड़ा है। उन्होंने काठमांडू को एशिया के आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना बताई। उन्होंने कहा, “हमारा सवाल अब यह नहीं है कि दो बड़े पड़ोसियों के बीच नेपाल कैसे बचेगा। हमारा सवाल है—नेपाल उनके बीच और उनसे आगे कैसे मूल्य पैदा करेगा?”

खनाल ने गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी तथा अरनिको और भृकुटी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विरासतों ने नेपाल को एशियाई सभ्यता और संस्कृति के महत्वपूर्ण संपर्क स्थल के रूप में स्थापित किया है।उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों ने एक स्पष्ट सत्य समझा था—संपर्क समृद्धि पैदा करता है, जबकि अलगाव गरीबी बढ़ाता है।”

विदेश मंत्री ने नेपाल की जलविद्युत क्षमता को क्षेत्रीय आर्थिक परिवर्तन से जोड़ने की बात कही। उन्होंने बताया कि नेपाल से उत्पादित स्वच्छ बिजली भारत के रास्ते बांग्लादेश तक निर्यात की जा रही है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती विशेष आर्थिक क्षेत्रों में उत्पादन का विस्तार कर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को नेपाल से जोड़ा जा सकता है। चीन के साथ सहयोग को व्यावहारिक, व्यावसायिक और दीर्घकालीन आधार पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताते हुए खनाल ने सड़क, सुरंग, ड्राई पोर्ट, हवाई सेवाओं, डिजिटल कनेक्टिविटी और सीमा-पार रेल सहित बहुआयामी ट्रांस-हिमालयी कनेक्टिविटी विकसित करने पर जोर दिया।

खनाल ने कहा कि नेपाल का भविष्य नेपाली जनता को स्वयं तय करना है, लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अमेरिका, यूरोप, आसियान, लैटिन अमेरिका और अन्य साझेदारों को नेपाल में निवेश, सहयोग और साझेदारी के लिए आमंत्रित किया।