जयगांव में बाढ़ का खतरा बढ़ा, तोर्षा नदी के बढ़ते जलस्तर और हाशिमारा झोरा के किनारे अवैध निर्माण से चिंता
अलीपुरद्वार, मानसून के दौरान भूटान की पहाड़ियों से आने वाली तेज
धार और अचानक बाढ़ ने एक बार फिर सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा को लेकर
चिंता बढ़ा दी है। भूटान के फुंटशोलिंग समेत कई पहाड़ी इलाकों में हालिया
भारी बारिश और बाढ़ से तबाही के बाद अब भारत के जयगांव और हाशिमारा की
सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे है।
आरोप है कि प्रशासन की कथित
लापरवाही के कारण तोर्षा नदी और हाशिमारा झोरा के किनारे अवैध रूप से मकान,
बहुमंजिला इमारतें और रिसॉर्ट बनाए जा रहे है। जयगांव के गुआबाड़ी
तलाबस्ती, न्यू सुभाषपल्ली और छोटा मेचियाबस्ती जैसे इलाकों में नदी के
किनारे कथित अतिक्रमण कर स्थायी निर्माण किए गए हैं।
वहीं, बड़ा
मेचियाबस्ती और पार मालंगी बस्ती के पास तोर्षा की बाढ़ प्रभावित भूमि के
समीप भी कई रिसॉर्ट बनाए जाने का आरोप है।दूसरी ओर, झरनाबस्ती से
बर्मनपाड़ा और त्रिवेणी टोल तक हाशिमारा झोरा के दोनों किनारों पर भी कथित
अतिक्रमण की शिकायत है। स्थानीय लोगों के अनुसार, झोरा के प्राकृतिक बहाव
को बाधित कर कई बहुमंजिला इमारतें और आवास बनाए गए हैं।
स्थानीय
सूत्रों के मुताबिक, करीब एक महीने पहले अचानक हाशिमारा झोरा में जलस्तर
बढ़ने से झरनाबस्ती के पास सड़क में गहरी दरार पड़ गई थी। पिछले साल
अक्टूबर में भी तोर्षा नदी के बांध में भीषण कटाव के बाद पार मालंगी बस्ती
में पानी घुस गया था। इसके बावजूद कथित अवैध निर्माण और नदी-झोरा के
अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जयगांव
निवासी और आरएसपी जिला कमेटी सदस्य पाशांग शेरपा ने आरोप लगाया कि तोर्षा
नदी से अवैध रूप से बालू, पत्थर और बोल्डर निकालने से नदी का किनारा और
अधिक कमजोर हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पहाड़ों से अचानक भीषण
बाढ़ आई तो जयगांव में भी बड़ी त्रासदी हो सकती है।
वहीं, कालचीनी
के विधायक और राज्य के मंत्री विशाल लामा ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा
कि तोर्षा नदी और हाशिमारा झोरा के किनारे सरकारी जमीन पर हुए कथित अवैध
निर्माण की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि नदी के प्राकृतिक संतुलन को
नुकसान पहुंचाने वाले निर्माण पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी
कार्रवाई के लिए सिंचाई विभाग और प्रशासन से आग्रह किया जाएगा।















