मुंबई,  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने बुधवार को विधानसभा में कहा कि महाराष्ट्र वर्ष 2029 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला पहला राज्य बनेगा।

फडणवीस ने कहा कि अगर महाराष्ट्र अलग राष्ट्र होता तो वह दुनिया की 30वीं सबसे बड़ी अर्थव्यस्था होता। उन्होंने कहा कि राज्य ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मामले में ऑस्ट्रिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।

मुख्यमंत्री फडणवीस बुधवार को विधानसभा में बजट पर चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि 2013-14 में महाराष्ट्र की जीडीपी 16 लाख करोड़ रुपये थी और पिछले दस साल में यह बढ़कर 51 लाख करोड़ रुपये हो गई है। राज्य ने 10.4 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय 3.47 लाख रुपये है, जिससे महाराष्ट्र देश में पांचवें स्थान पर है, जबकि आबादी के मामले में यह दूसरे स्थान पर है।

फडणवीस ने बताया कि महाराष्ट्र निर्यात, स्टार्टअप और पेड़ लगाने की पहल सहित कई सेक्टर में देश में सबसे आगे है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2013-14 में जब जीडीपी 16 लाख करोड़ रुपये थी, तब राज्य का कर्ज 3 लाख करोड़ रुपये था। अभी, महाराष्ट्र का कर्ज से जीडीपी रेश्यो 18.8 प्रतिशत है, जो कई दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों का कर्ज 25 प्रतिशत से कम है, उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत माना जाता है और महाराष्ट्र अभी भी मजबूत स्थिति में है।

फडणवीस ने आगे कहा कि केंद्र सरकार से राज्य का हिस्सा काफी बढ़ गया है। 2014 में महाराष्ट्र को केंद्र से लगभग 14,000 करोड़ रुपये मिले थे, जो अब बढ़कर 87,000 करोड़ रुपये हो गए हैं, जो पांच गुना से भी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने राजकोषीय घाटा को 3 प्रतिशत के अंदर और राजस्व घाटा को एक प्रतिशत से नीचे रखने में कामयाबी हासिल की है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान और उधार लिया गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल विकास के कामों के लिए किया गया। राज्य में कैपिटल खर्च 25,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने बताया कि कर्ज बढ़ा है, लेकिन पूंजी निवेश ज्यादा तेजी से बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का रेवेन्यू-टू-डेट रेश्यो लगभग 18 प्रतिशत है, जो एक स्थिर आर्थिक स्थिति दिखाता है।