क्या चीनी कार निर्माता जासूसी का खतरा पैदा कर रहे हैं? स्मार्ट कारों के कैमरे, माइक्रोफोन और GPS से डेटा सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
नई दिल्ली: दुनिया भर में इलेक्ट्रिक और स्मार्ट कारों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। चीन की BYD समेत कई ऑटोमोबाइल कंपनियां आधुनिक तकनीक से लैस कारों के जरिए वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। लेकिन इन कारों की बढ़ती लोकप्रियता के साथ एक गंभीर सवाल भी खड़ा हो रहा है—क्या चीनी कार निर्माता लोगों की जासूसी करने या दूसरे देशों की संवेदनशील जानकारियां जुटाने का जरिया बन सकते हैं? दरअसल, आज की आधुनिक कारें केवल एक वाहन नहीं रह गई हैं, बल्कि इंटरनेट से जुड़ा चलता-फिरता कंप्यूटर बन चुकी हैं। इनमें लगे कैमरे, माइक्रोफोन, GPS, रडार, सेंसर और कनेक्टेड सॉफ्टवेयर लगातार आसपास के वातावरण और वाहन से जुड़ी जानकारियां एकत्र कर सकते हैं। इसी वजह से अमेरिका और यूरोप के कई देशों में चीनी कनेक्टेड कारों की डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। नवंबर 2026 में यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। यूरोपीय संसद के 14 सदस्यों ने यूरोपीय आयोग से BYD की कारों से जुड़े संभावित साइबर सुरक्षा और जासूसी जोखिमों की जांच करने की मांग की है। आधुनिक स्मार्ट कारों में कई ऐसे उपकरण लगे होते हैं, जो वाहन के अंदर और बाहर की गतिविधियों की जानकारी एकत्र कर सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं: कैमरे: सड़क, आसपास की इमारतों, लोगों और अन्य वाहनों की तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं। माइक्रोफोन: वाहन के अंदर होने वाली बातचीत और वॉयस कमांड से जुड़ी जानकारी एकत्र कर सकते हैं। GPS और नेविगेशन: वाहन की लोकेशन, यात्रा का रास्ता और नियमित आवाजाही का रिकॉर्ड तैयार कर सकते हैं। रडार और सेंसर: आसपास मौजूद वस्तुओं, सड़क की स्थिति और अन्य गतिविधियों का पता लगा सकते हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी: वाहन से एकत्र डेटा को कंपनी के सर्वर या क्लाउड सिस्टम तक पहुंचा सकती है। सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता है कि यदि इस डेटा का गलत इस्तेमाल किया जाए या किसी तीसरे पक्ष को अनधिकृत पहुंच मिल जाए, तो इससे व्यक्तिगत गोपनीयता के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी नुकसान पहुंच सकता है। 4 नवंबर 2026 को रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संसद के 14 सदस्यों ने यूरोपीय आयोग से चीनी वाहन निर्माता BYD की कारों से जुड़े संभावित सुरक्षा जोखिमों का आकलन करने की मांग की। फ्रांसीसी सांसद फ्रांस्वा काल्फों के नेतृत्व में उठाई गई इस पहल में यह सवाल भी शामिल है कि क्या BYD को संवेदनशील सरकारी ठेकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों से बाहर रखने की जरूरत है। सांसदों ने चीन के 2017 के राष्ट्रीय खुफिया कानून का हवाला देते हुए आशंका जताई है कि कनेक्टेड कारों से प्राप्त संवेदनशील जानकारियों का इस्तेमाल खुफिया गतिविधियों में किया जा सकता है। रिपोर्ट में नॉर्वे में एक सैन्य अभ्यास के दौरान चीनी किराये की गाड़ियों द्वारा सैनिकों और सैन्य ठिकानों के प्रवेश संबंधी कोड की रिकॉर्डिंग को लेकर सामने आई चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है। BYD ने अपनी कारों के जरिए चीन से डेटा तक रिमोट पहुंच होने के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसके वाहनों और क्लाउड सिस्टम में स्टोर डेटा को चीन से मनमाने ढंग से एक्सेस नहीं किया जा सकता। कंपनी के मुताबिक, ग्राहकों का डेटा उनके नियंत्रण में रहता है और BYD Europe इस जानकारी को चीनी संस्थाओं या अन्य तीसरे पक्षों के साथ साझा नहीं करता। इसलिए फिलहाल BYD के खिलाफ उठाई गई चिंताओं को संभावित सुरक्षा जोखिम और जांच की मांग के रूप में देखना चाहिए। इन्हें जासूसी साबित होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। यूरोप में यह चिंता केवल BYD तक सीमित नहीं है। जर्मनी में भी सुरक्षा एजेंसियों ने चीनी वाहन निर्माताओं की कारों का तकनीकी परीक्षण किया है। जर्मन मीडिया WDR और NDR की फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी (BfV) और सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा एजेंसी (ZITiS) ने कई चीनी वाहन निर्माताओं की कारों का परीक्षण किया था। इस जांच में यह समझने की कोशिश की गई कि कारें किस तरह का डेटा एकत्र करती हैं, कितनी जानकारी रिकॉर्ड होती है और क्या यह डेटा विदेशों में भेजा जाता है। जर्मन रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वाहनों में लगे कैमरे, रडार, माइक्रोफोन और डेटा ट्रांसमिशन सिस्टम सैन्य सुरक्षा के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ संवेदनशील सरकारी और सैन्य परिसरों में चीनी कारों की पार्किंग पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिका ने भी चीनी कनेक्टेड कारों को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिये से गंभीरता से लिया है। जनवरी 2025 में अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने ऐसे नियमों को अंतिम रूप दिया, जिनके तहत चीन और रूस से जुड़े कुछ हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर वाले कनेक्टेड वाहनों के आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगाए गए। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य वाहन के कनेक्टिविटी सिस्टम और ऑटोमेटेड ड्राइविंग सिस्टम के जरिए व्यक्तिगत डेटा चोरी, साइबर हमले और वाहनों को दूर से नियंत्रित किए जाने की आशंकाओं को कम करना है। यह प्रतिबंध सभी चीनी कारों पर एक समान सामान्य प्रतिबंध नहीं है, बल्कि निर्धारित तकनीकी घटकों और उनसे जुड़े कारोबारी संबंधों पर आधारित है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों और कनेक्टेड कारों का बाजार तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे में डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल यहां भी महत्वपूर्ण हैं। भारत में किसी भी देश की कंपनी द्वारा निर्मित इंटरनेट से जुड़ी कारों के लिए कुछ अहम सवालों पर ध्यान देना जरूरी है: वाहन का लोकेशन और ड्राइविंग डेटा कहां स्टोर किया जाता है? क्या कैमरे और माइक्रोफोन से एकत्र जानकारी कंपनी के सर्वर तक भेजी जाती है? क्या वाहन निर्माता को कार के सॉफ्टवेयर तक दूर से पहुंच प्राप्त है? क्या ग्राहक अपने डेटा को एकत्र करने और साझा करने पर नियंत्रण रख सकते हैं? क्या वाहन के सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी सिस्टम का स्वतंत्र साइबर सुरक्षा ऑडिट होता है? इन सवालों का जवाब केवल चीनी कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के सभी कनेक्टेड कार निर्माताओं के लिए जरूरी है। इस मामले का एक दूसरा पहलू भी है। आज Tesla, BMW, Mercedes-Benz और दूसरी वैश्विक कंपनियों की आधुनिक कारें भी कैमरे, GPS, माइक्रोफोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। इसलिए डेटा सुरक्षा का खतरा किसी एक देश तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि वाहन निर्माता किस प्रकार डेटा एकत्र करते हैं, उसे कहां स्टोर करते हैं, किसके साथ साझा करते हैं और उसकी सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं। पोलैंड के Centre for Eastern Studies (OSW) की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट में भी कनेक्टेड कारों से जुड़े साइबर हमलों, लोकेशन ट्रैकिंग और संवेदनशील भौगोलिक जानकारियों के दुरुपयोग की आशंकाओं का विश्लेषण किया गया है। चीनी कार निर्माता वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उनकी आधुनिक तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच डेटा सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। फिलहाल ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है जो यह साबित करे कि BYD या अन्य सभी चीनी कार निर्माता व्यवस्थित रूप से जासूसी कर रहे हैं। लेकिन आधुनिक वाहनों की डेटा संग्रह क्षमता और संभावित साइबर सुरक्षा कमजोरियों को देखते हुए सरकारों की चिंता को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए केवल बेहतर माइलेज, बैटरी और आधुनिक फीचर्स देना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें यह भी साबित करना होगा कि उनकी कारों में बैठे लोगों की निजी जानकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील डेटा सुरक्षित है।कारों के जरिए कैसे जुटाई जा सकती है संवेदनशील जानकारी?
यूरोप में BYD को लेकर क्यों उठे सवाल?
BYD ने आरोपों पर क्या जवाब दिया?
जर्मनी में भी चीनी कारों की जांच
अमेरिका ने भी लागू किए कड़े नियम
क्या भारत में भी बढ़ सकती है चिंता?
क्या केवल चीनी कारें ही डेटा सुरक्षा के लिए खतरा हैं?
निष्कर्ष: स्मार्ट कारों के दौर में डेटा सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती















