रांची / झारखंड : झारखंड की राजधानी रांची में जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण प्रभावित हो रही है। जमीन मालिकों को ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी कराने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सॉफ्टवेयर में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण कई मामलों का निष्पादन समय पर नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए राज्य के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरूआ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

मंत्री ने इस पूरे मामले में अधिकारियों को पांच दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने जानना चाहा है कि आखिर सॉफ्टवेयर में किस तरह की तकनीकी समस्याएं आ रही हैं और इनकी वजह से म्यूटेशन के मामलों का निष्पादन क्यों प्रभावित हो रहा है।

सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों से आम लोगों की बढ़ी परेशानी

राज्य में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का उद्देश्य आम लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर से राहत दिलाना है। इसके लिए राजस्व विभाग की ओर से ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण यही व्यवस्था कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।

म्यूटेशन की प्रक्रिया जमीन की खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार और अन्य कानूनी कारणों से जमीन के स्वामित्व संबंधी राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए जरूरी होती है। जब यह प्रक्रिया लंबित रहती है, तो संबंधित जमीन मालिकों को कई तरह की प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताओं में दिक्कत हो सकती है।

बताया जा रहा है कि सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी पेचीदगियों के कारण म्यूटेशन के आवेदनों के निष्पादन में बाधा आ रही है। ऐसे में आवेदकों को अपने मामलों के निपटारे के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

पांच दिनों में मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

मंत्री दीपक बिरूआ ने मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों से पांच दिनों के भीतर जवाब मांगा है। रिपोर्ट में सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं, म्यूटेशन प्रक्रिया में आ रही बाधाओं और उनके समाधान के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा गया है।

विभागीय स्तर पर यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि तकनीकी समस्या किसी विशेष मॉड्यूल, सर्वर, डेटा अपडेट या ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया से संबंधित है या फिर पूरी व्यवस्था में ही सुधार की आवश्यकता है।

मंत्री की ओर से जवाब तलब किए जाने के बाद अब संबंधित अधिकारियों को तकनीकी समस्याओं की वास्तविक स्थिति और उनके समाधान की जानकारी देनी होगी।

जमीन मालिकों को हो रही है परेशानी

म्यूटेशन का मामला सीधे आम लोगों की जमीन और संपत्ति से जुड़ा हुआ है। जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज नहीं होने पर खरीदारों को राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने के लिए इंतजार करना पड़ता है।

इसके अलावा जमीन के उत्तराधिकार, पारिवारिक बंटवारे और अन्य मामलों में भी म्यूटेशन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी होने से लोगों को अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जमीन से जुड़े मामलों के निष्पादन के लिए ऑनलाइन व्यवस्था पर लोगों की निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में तकनीकी खामियों को दूर करना विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।

तकनीकी व्यवस्था दुरुस्त करने पर रहेगा जोर

इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सॉफ्टवेयर की तकनीकी समस्याओं को दूर करने में कितना समय लगेगा और लंबित म्यूटेशन आवेदनों का निपटारा कब तक हो पाएगा।

विभाग के सामने चुनौती सिर्फ सॉफ्टवेयर की खामियों को ठीक करने की नहीं, बल्कि लंबित आवेदनों की समीक्षा कर उनका समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने की भी है।

मंत्री दीपक बिरूआ की ओर से पांच दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगे जाने के बाद मामले में विभागीय कार्रवाई और तकनीकी सुधार की दिशा में आगे की पहल पर नजर रहेगी।

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