CJI सूर्यकांत ने किया झारखंड हाईकोर्ट की छह नई डिजिटल सेवाओं और अत्याधुनिक डेटा सेंटर का शुभारंभ, अब घर बैठे मिलेंगी कई सुविधाएं
रांची: झारखंड की न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट परिसर में छह नई डिजिटल सेवाओं का शुभारंभ किया। इसके साथ ही करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से तैयार अत्याधुनिक डेटा सेंटर का भी उद्घाटन किया गया। इस पहल से झारखंड हाईकोर्ट के साथ-साथ राज्य की अधीनस्थ अदालतों के कामकाज को भी डिजिटल रूप से मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। अब अधिवक्ताओं और आम लोगों को अदालतों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां और सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगी। खास बात यह है कि प्रमाणित प्रतियों के लिए ऑनलाइन आवेदन, आईफोन यूजर्स के लिए मोबाइल ऐप और वकीलों के लिए व्यक्तिगत कॉज लिस्ट जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एस. चंद्रशेखर और झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह सहित अन्य न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। इस डेटा सेंटर में कई अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं: हाई-परफॉर्मेंस GPU सर्वर: डिजिटल सेवाओं और उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग कार्यों को संचालित करने के लिए। सेंट्रलाइज्ड स्टोरेज सिस्टम: न्यायिक दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए। बैकअप सिस्टम: महत्वपूर्ण डेटा का बैकअप रखने और तकनीकी खराबी की स्थिति में डेटा सुरक्षित रखने के लिए। उन्नत नेटवर्क सिक्योरिटी: न्यायालय के डिजिटल नेटवर्क और महत्वपूर्ण जानकारियों की सुरक्षा के लिए। फायर सेफ्टी सिस्टम: सर्वर और तकनीकी उपकरणों को आग से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए। अनइंटरप्टेड पावर सप्लाई: बिजली बाधित होने की स्थिति में भी डिजिटल सेवाओं को चालू रखने के लिए। इस डेटा सेंटर के माध्यम से केस इंफॉर्मेशन सिस्टम (CIS), डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (DMS), इलेक्ट्रॉनिक न्यायिक रिकॉर्ड और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी। इन डिजिटल सुविधाओं का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अदालतों से संबंधित कई प्रक्रियाओं के लिए लोगों की भौतिक उपस्थिति पर निर्भरता कम हो सकती है। आम नागरिकों के लिए: ऑनलाइन केस की स्थिति जानने में आसानी होगी। न्यायालय के आदेश और फैसलों तक डिजिटल पहुंच मिलेगी। प्रमाणित प्रति के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। मोबाइल के माध्यम से न्यायालय से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना आसान होगा। अधिवक्ताओं के लिए: व्यक्तिगत कॉज लिस्ट तैयार करने की सुविधा मिलेगी। सुनवाई की तारीख और मामलों को व्यवस्थित करना आसान होगा। प्रमाणित प्रतियों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। कानूनी शोध में AI आधारित सॉफ्टवेयर की सहायता मिलेगी। न्यायिक अधिकारियों के लिए: बोलकर न्यायिक दस्तावेज तैयार करने की सुविधा मिलेगी। कानूनी फैसलों और पुराने मामलों की खोज में सहायता मिलेगी। डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों के प्रबंधन में सुधार होगा। इस परियोजना को पूरा करने में झारखंड सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग, विधि विभाग और भवन निर्माण विभाग ने वित्तीय एवं प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया है। वहीं, झारखंड एजेंसी फॉर प्रमोशन ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (JAP-IT) ने तकनीकी सहयोग दिया है। हाईकोर्ट की कंप्यूटर एवं डिजिटाइजेशन कमेटी ने भी इस पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रांची में आयोजित कार्यक्रम से पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने देवघर में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) की ओर से आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तीकरण शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने जरूरतमंद और पीड़ित लोगों को सहायता राशि के चेक तथा विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया। इसके अलावा पलामू और रांची में लीगल एड क्लिनिक का ऑनलाइन उद्घाटन भी किया गया। झारखंड हाईकोर्ट में छह नई डिजिटल सेवाओं और अत्याधुनिक डेटा सेंटर की शुरुआत राज्य की न्यायिक व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न्यायालयों के प्रशासनिक कामकाज, दस्तावेजों के प्रबंधन, कानूनी शोध और आम लोगों की न्यायिक सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने की उम्मीद है। हालांकि, इन सुविधाओं की वास्तविक सफलता इनके नियमित संचालन, डेटा सुरक्षा, तकनीकी विश्वसनीयता और आम लोगों तथा अधिवक्ताओं द्वारा इनके उपयोग पर निर्भर करेगी।
आम लोगों और वकीलों को कैसे मिलेगा फायदा?
सरकार और तकनीकी संस्थाओं का भी मिला सहयोग
देवघर में भी CJI ने की महत्वपूर्ण पहल
न्याय व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम














