इस्पात मंत्रालय ने चिंतन शिविर में हरित इस्पात पर किया विचार-विमर्श
नई दिल्ली, इस्पात मंत्रालय की ओर से मंडी गोविंदगढ़ में आयोजित चिंतन शिविर में द्वितीयक इस्पात क्षेत्र पर विशेष ध्यान देते हुए हरित इस्पात पर विचार-विमर्श किया गया। शिविर में सरकार, औद्योगिक उद्यम और उद्योगपतियों द्वितीयक इस्पात के लिए हरित इस्पात उत्पादन के महत्व, चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए एक साथ आए।
इस्पात मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि मंडी गोबिंदगढ़ स्थित राष्ट्रीय द्वितीयक इस्पात प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएसएसटी) में एक दिवसीय चिंतन शिविर का उद्घाटन इस्पात मंत्रालय के सचिव संदीप पौंड्रिक ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में द्वितीयक इस्पात क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला, जो देश में कुल इस्पात उत्पादन का लगभग 47 फीसदी योगदान देता है।
मंत्रालय के मुताबिक एनआईएसटी को हरित इस्पात प्रमाणन के लिए नोडल एजेंसी नामित किया है और इसने अब तक 76 उद्योगों (10.98 मीट्रिक टन) को हरित इस्पात प्रमाणपत्र जारी किए हैं। संयुक्त सचिव और एनआईएसटी के अध्यक्ष दया निधान पांडे ने भी द्वितीयक इस्पात क्षेत्र की क्षमता निर्माण में एनआईएसटी की भूमिका पर प्रकाश डाला।
इस्पात मंत्रालय के मुताबिक चर्चाओं में हरित इस्पात की आगामी प्रौद्योगिकियों, नई उपलब्धियों और हरित इस्पात उत्पादन की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। विचार-विमर्श में नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों और तकनीकी विशेषज्ञों के दृष्टिकोणों को एक साथ लाया गया जिसका उद्देश्य हरित इस्पात उत्पादन और सतत विकास के पथ पर आगे बढ़ना था। इस कार्यक्रम में अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार, संयुक्त सचिव और इस्पात मंत्रालय के अन्य अधिकारियों के साथ-साथ औद्योगिक उद्यमों, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग संघों और द्वितीयक इस्पात क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।















