नई फूड पिरामिड में हेल्दी कार्बोहाइड्रेट और प्लांट-बेस्ड फूड को मिली पहली प्राथमिकता, जानें क्या बदलेंगी खाने की आदतें
नई दिल्ली: स्वस्थ खानपान को लेकर दुनिया भर में एक नई पहल सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय पोषण विशेषज्ञों की एक टीम ने नई इंटरनेशनल फूड गाइड पिरामिड (International Food Guide Pyramid) विकसित की है, जिसमें सब्जियों, फलों, साबुत अनाज और पौधों से मिलने वाले प्रोटीन को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। इस मॉडल का मुख्य संदेश है कि स्वस्थ रहने के लिए केवल प्रोटीन या कम कैलोरी वाला भोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन की गुणवत्ता और उसके स्रोत पर भी ध्यान देना जरूरी है। इस नई फूड पिरामिड में साबुत अनाज और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) वाले कार्बोहाइड्रेट को प्राथमिकता दी गई है। वहीं, रिफाइंड अनाज, मीठे पेय पदार्थ, प्रोसेस्ड मीट और अधिक संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखने की सलाह दी गई है। यह मॉडल 22 पोषण वैज्ञानिकों के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से तैयार किया गया है। इसके विकास का नेतृत्व अमेरिका की ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी की पोषण वैज्ञानिक करेन डेला कोर्ट ने किया। शोधकर्ताओं ने कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, चीन और नॉर्डिक देशों सहित विभिन्न क्षेत्रों के खानपान संबंधी दिशा-निर्देशों और 250 से अधिक वैज्ञानिक शोधों का अध्ययन किया। यह शोध पत्रिका Advances in Nutrition में प्रकाशित हुआ है। नई फूड पिरामिड का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि इसमें पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों को स्वस्थ खानपान की बुनियाद माना गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि मांस, मछली, दूध या अंडे पूरी तरह छोड़ने होंगे। बल्कि विशेषज्ञों का सुझाव है कि रोजमर्रा के भोजन में दाल, फलियां, सब्जियां, फल, नट्स और साबुत अनाज की हिस्सेदारी अधिक होनी चाहिए। इस पिरामिड में भोजन को उसकी पोषण गुणवत्ता के आधार पर प्राथमिकता दी गई है। जिन खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए, उन्हें पिरामिड के बड़े हिस्से में रखा गया है, जबकि सीमित मात्रा में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों को सबसे छोटे हिस्से में जगह दी गई है। नई गाइडलाइन में हरी सब्जियों, मौसमी फलों और अन्य प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्रमुख स्थान दिया गया है। सब्जियों और फलों से शरीर को फाइबर, विटामिन, खनिज और कई जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना अलग-अलग रंगों और किस्मों की सब्जियां तथा फल खाना बेहतर है। इससे भोजन में पोषक तत्वों की विविधता बनी रहती है। पालक, मेथी, ब्रोकोली, गाजर, टमाटर, अमरूद, संतरा, पपीता और सेब जैसे खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। नई फूड पिरामिड का एक बड़ा संदेश है कि सभी कार्बोहाइड्रेट खराब नहीं होते। शरीर को ऊर्जा देने में कार्बोहाइड्रेट की महत्वपूर्ण भूमिका है। समस्या तब होती है, जब भोजन में मैदा, अत्यधिक रिफाइंड अनाज, मीठे पेय और कम फाइबर वाले प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की मात्रा ज्यादा हो जाती है। इसलिए विशेषज्ञों ने साबुत गेहूं, ओट्स, जौ, ब्राउन राइस, मक्का, बाजरा, ज्वार और अन्य फाइबर युक्त अनाज को प्राथमिकता दी है। कम या मध्यम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों को भी बेहतर विकल्प माना गया है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) यह बताता है कि किसी कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ के सेवन के बाद रक्त में शुगर का स्तर कितनी तेजी से बढ़ सकता है। भारत में रोटी, दाल, चना, राजमा, जौ, बाजरा और ज्वार जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ इस सोच के अनुरूप भोजन का हिस्सा बन सकते हैं। नई पिरामिड में पौधों से मिलने वाले प्रोटीन को खास महत्व दिया गया है। इसमें दालें, चना, राजमा, मटर, सोयाबीन, टोफू, नट्स और बीज शामिल हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रोटीन के लिए केवल मांस पर निर्भर रहने के बजाय नियमित रूप से पौधों से मिलने वाले प्रोटीन को भी भोजन में शामिल किया जाए। भारत जैसे देश में दाल, चना, मूंग, मसूर, अरहर, लोबिया और सोयाबीन इसके सुलभ विकल्प हैं। हालांकि, नई गाइडलाइन मांसाहारी भोजन को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं करती। इसमें मछली और चिकन को सीमित मात्रा में शामिल करने की गुंजाइश भी रखी गई है। नई फूड पिरामिड में वसा के स्रोत पर भी ध्यान दिया गया है। इसमें जैतून, कैनोला, सूरजमुखी, सोयाबीन और मूंगफली जैसे वनस्पति तेलों को प्राथमिकता दी गई है, क्योंकि इनमें असंतृप्त वसा होती है। इसके विपरीत मक्खन, पशु वसा, टैलो और अधिक संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखने की सलाह दी गई है। नट्स और बीज भी स्वस्थ वसा के स्रोत हैं। हालांकि, इनका सेवन भी संतुलित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि इनमें कैलोरी की मात्रा अधिक हो सकती है। नई पिरामिड के सबसे सीमित हिस्से में रिफाइंड अनाज, रेड मीट, प्रोसेस्ड मीट, चिप्स, मीठे पेय, मिठाइयां और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शुगर वाले पेय पदार्थों का नियमित सेवन विशेष रूप से चिंता का विषय है। सोडा, मीठे पैकेज्ड ड्रिंक्स और अन्य शुगर युक्त पेय की जगह पानी या बिना चीनी वाले पेय चुनना बेहतर हो सकता है। इसी तरह सॉसेज, बेकन और अन्य प्रोसेस्ड मीट का सेवन कम रखने की सलाह दी गई है। रेड मीट को भी रोजमर्रा के भोजन का मुख्य हिस्सा बनाने के बजाय सीमित मात्रा में लेने पर जोर दिया गया है। हां। इस फूड पिरामिड की एक खास बात यह है कि इसे अलग-अलग खानपान की परंपराओं के अनुसार अपनाया जा सकता है। इसमें शाकाहारी और वीगन भोजन के लिए भी जगह है। शाकाहारी लोग दाल, चना, राजमा, दूध, दही, पनीर, नट्स और बीजों से पोषण प्राप्त कर सकते हैं। वहीं वीगन भोजन में सोया, टोफू, दालें, फलियां और अन्य पौधों पर आधारित विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं। हालांकि, किसी भी विशेष आहार को अपनाते समय प्रोटीन, विटामिन B12, आयरन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों की पर्याप्त उपलब्धता का ध्यान रखना जरूरी है। भारत में पहले से ही कई ऐसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं, जो इस मॉडल की सोच से मेल खाते हैं। उदाहरण के लिए: नाश्ता: ओट्स, दलिया, बेसन का चीला, फल या अंकुरित अनाज। दोपहर का भोजन: गेहूं या बाजरे की रोटी, दाल, हरी सब्जी और सलाद। शाम का नाश्ता: भुना चना, फल, थोड़े नट्स या अंकुरित मूंग। रात का भोजन: दाल, सब्जी, रोटी या सीमित मात्रा में चावल। यह केवल उदाहरण हैं। भोजन की मात्रा और पोषण संबंधी जरूरतें व्यक्ति की उम्र, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य और जीवनशैली के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। नई फूड पिरामिड का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य सुधारना नहीं है, बल्कि भोजन के पर्यावरणीय प्रभाव को भी ध्यान में रखना है। शोधकर्ताओं ने मानव स्वास्थ्य और पृथ्वी के स्वास्थ्य के बीच संबंध पर जोर दिया है। पौधों पर आधारित भोजन को प्राथमिकता देने से कुछ परिस्थितियों में खाद्य उत्पादन से जुड़े पर्यावरणीय दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव खाद्य पदार्थ के उत्पादन, परिवहन और स्थानीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह एक व्यापक मार्गदर्शक मॉडल है, न कि हर व्यक्ति के लिए एक जैसा डाइट चार्ट। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तथा किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों की पोषण संबंधी जरूरतें अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या या चिकित्सकीय स्थिति में डॉक्टर अथवा पंजीकृत डाइटिशियन की सलाह के अनुसार भोजन में बदलाव करना चाहिए। नई इंटरनेशनल फूड गाइड पिरामिड स्वस्थ खानपान को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—भोजन में केवल कैलोरी या प्रोटीन की मात्रा नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनके स्रोत भी मायने रखते हैं। सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और पौधों से मिलने वाले प्रोटीन को प्राथमिकता देना तथा मीठे पेय, रिफाइंड अनाज और प्रोसेस्ड मीट का सेवन सीमित करना इसके मुख्य सुझाव हैं। भारत में दाल, बाजरा, ज्वार, चना, मौसमी सब्जियां और स्थानीय फल जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ इस दिशा में उपयोगी विकल्प बन सकते हैं। सही मात्रा, विविधता और संतुलन के साथ अपनाई गई खानपान की आदतें लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।क्या है नई फूड पिरामिड की खासियत?
1. सब्जियां और फल होंगे भोजन का आधार
2. कार्बोहाइड्रेट से दूरी नहीं, सही कार्बोहाइड्रेट चुनने पर जोर
3. दाल, चना और सोयाबीन से मिलेगा प्लांट-बेस्ड प्रोटीन
4. घी-मक्खन की जगह असंतृप्त वसा वाले तेलों को प्राथमिकता
5. रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय पदार्थों पर नियंत्रण
6. क्या शाकाहारी और वीगन लोग भी अपना सकते हैं यह मॉडल?
भारतीय खानपान में कैसे लागू हो सकती है नई फूड पिरामिड?
स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण पर भी ध्यान
क्या यह नई पिरामिड सभी के लिए अंतिम डाइट चार्ट है?
निष्कर्ष














