रांची (RANCHI): बच्चों की आंतों की सेहत पर खान-पान की बदलती आदतों, स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताने और बाहर खेलने-कूदने में कमी का असर पड़ सकता है। अक्सर बच्चों को पाचन से जुड़ी समस्याएं बार-बार होती हैं, जिन पर माता-पिता का ध्यान ही नहीं जाता। उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित गिरीश नर्सिंग होम एंड एंडोस्कोपी सेंटर के कंसल्टेंट पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट और एंडोस्कोपिस्ट, डॉ. एकांश अग्रवाल ने बचपन में आंतों की सेहत के महत्व और उन रोजमर्रा की आदतों के बारे में बताया है, जो इस पर असर डाल सकती हैं।
आधुनिक जीवनशैली बच्चों की आंतों के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर सकती है ?
बच्चों की दिनचर्या में होने वाले बदलाव उनकी आंतों के स्वास्थ्य पर दबाव डाल सकते हैं। डॉ. अग्रवाल के अनुसार, पैकेटबंद खाने और मीठे स्नैक्स का बार-बार सेवन, स्क्रीन के सामने बहुत अधिक समय बिताना, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बाहर खेलने के कम मौके - ये सभी ऐसे कारक हैं जो आंतों के सूक्ष्मजीवों (gut microbes) के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। दवाओं (एंटीबायोटिक्स सहित) का बार-बार या अनावश्यक इस्तेमाल भी इस संतुलन पर असर डाल सकता है। जब हमारी रोज़मर्रा की आदतें विविध आहार और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा नहीं देतीं, तो आंतों का वातावरण कमज़ोर हो सकता है।
पेट से जुड़ी ऐसी समस्याएं जिन्हें माता-पिता नहीं करें नजरअंदाज
पेट से जुड़ी समस्याएं हमेशा तेज पेट दर्द के रूप में ही सामने नहीं आतीं। डॉ. अग्रवाल के अनुसार, बच्चों को बार-बार पेट में बेचैनी महसूस हो सकती है, जल्दी पेट भर जाने का अहसास हो सकता है, मल त्यागने की आदतों में बदलाव आ सकता है या भूख कम लग सकती है। इसके अलावा, अगर पाचन संबंधी समस्याओं के साथ-साथ लगातार थकान, बार-बार बीमार पड़ना, ध्यान लगाने में कठिनाई या मूड में अचानक बदलाव जैसे लक्षण भी दिखें, तो इन पर ध्यान देना जरूरी है। इन लक्षणों के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, इसलिए इन्हें हमेशा सिर्फ पेट की सेहत से ही जोड़कर नहीं देखना चाहिए। हालांकि, अगर ये लक्षण बार-बार दिखें या लगातार बने रहें, तो इन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में माता-पिता को किसी डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
स्वस्थ आंत के लिए सहायक खाद्य पदार्थ
फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों से भरपूर विविध आहार लेना आंत के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किए जाने वाले दैनिक उपायों में से एक है। डॉ. अग्रवाल जई, सेब और ब्रोकली जैसे खाद्य पदार्थों को फाइबर के स्रोत के रूप में सुझाते हैं, जो आंत में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया को पोषण देने में मदद कर सकते हैं।दही और खमीरयुक्त खाद्य पदार्थ जैसे कि सावरक्रॉट भी लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रदान कर सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें कैसे तैयार किया गया है। माता-पिता संतुलित और विविध प्रकार के खाद्य पदार्थ देने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, साथ ही चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले पैकेटबंद स्नैक्स को सीमित कर सकते हैं। एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल चिकित्सकीय रूप से आवश्यक होने पर और स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर ये महत्वपूर्ण दवाएं हैं, लेकिन अनावश्यक उपयोग आंत के माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकता है।















