डायबिटीज को रिवर्स कर सकता है ये 1 चमत्कारी योगासन
रांची: आज हम आपको एक ऐसा आसान और असरदार योग रूटीन बता रहे हैं, जिसे रोज सुबह
करने से आपके ब्लड शुगर लेवल, इंसुलिन सेंसिटिविटी और स्वास्थ्य पर काफी
अच्छा असर पड़ता है।
सूर्य नमस्कार क्या है?
सूर्य नमस्कार 12 योग
मुद्राओं का क्रम है, जिसे सांसों के साथ तालमेल में किया जाता है। यह
सिर्फ एक्सरसाइज नहीं है, Moving Meditation है, जो शरीर, मन और
ऊर्जा को उगते सूरज के साथ जोड़ता है। आयुर्वेद में यह दिनचर्या का सबसे
आदर्श तरीका माना गया है।
सूर्य नमस्कार कैसे शुरू करें?
सही समय चुनें- सूर्योदय के समय, खाली पेट, पूर्व दिशा की ओर मुंह करके अभ्यास करें। हार्मोन संतुलित करती है और प्रकृति से जोड़ती है।संकल्प लें- शुरू करने से पहले आंखें बंद करें, गहरी सांस लें और अभ्यास के लिए सकारात्मक इरादा सेट करें।हल्का वार्म-अप करें- 2–3 मिनट स्ट्रेचिंग या जॉइंट रोटेशन करें।धीरे-धीरे शुरुआत करें- पहले दिन सिर्फ 3–5 राउंड। स्पीड नहीं, सांसों की लय और शरीर की जागरूकता पर ध्यान दें।हर राउंड -12 मुद्राएं- यदि संभव हो तो दाएं और बाएं दोनों पैरों से करें।धीरे-धीरे राउंड बढ़ाएं- इसे 2–3 हफ्तों के बाद सुविधानुसार 9 या 12 राउंड तक लेकर जाएं।शरीर की सुनें- थकान नहीं, जागरूकता लक्ष्य होना चाहिए।
डायबिटीज में सूर्य नमस्कार कैसे मदद करता है?
इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है- योगासन के दौरान मांसपेशियां सक्रिय होकर ग्लूकोज का अच्छी तरह से इस्तेमाल करती हैं।पैंक्रियाज को करता है एक्टिव - इसमें मौजूद हल्के ट्विस्ट और स्ट्रेच पैंक्रियाज की हल्की मसाज करते हैं, जिससे उनका काम अच्छी तरह से होता है।तनाव कम करता है-तनाव अच्छी तरह से कंट्रोल होता है।