रांची: झारखंड में नियुक्ति घोटाले को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मामले की चल रही CID जांच पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जांच के दौरान बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली नेताओं को बचाने की कोशिश की जा रही है।

मरांडी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए, जिस पर किसी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव न हो।

CID जांच पर उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और घोटाले की जांच जिस तरीके से आगे बढ़ रही है, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका दावा है कि जांच की दिशा ऐसी है, जिसमें छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई हो सकती है, जबकि बड़े अधिकारियों और राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोगों की भूमिका की पर्याप्त जांच नहीं की जा रही।

हालांकि, बड़े अधिकारियों या नेताओं को बचाने की कोशिश के संबंध में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह भाजपा नेता की ओर से लगाया गया राजनीतिक आरोप है।

CBI जांच की मांग

भाजपा नेता ने मामले की जांच CBI से कराने की मांग करते हुए कहा कि नियुक्ति घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

उन्होंने सरकार से भी मामले में पारदर्शिता बरतने और जांच की प्रगति से जनता को अवगत कराने की मांग की।

नियुक्ति मामलों को लेकर पहले से सियासी घमासान

झारखंड में सरकारी नियुक्तियों से जुड़े मामलों को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्ष लगातार सरकार पर नियुक्ति प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाता रहा है। वहीं, सरकार और संबंधित जांच एजेंसियां मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कहती रही हैं।

नियुक्ति घोटाले की जांच में CID की भूमिका को लेकर बाबूलाल मरांडी के ताजा बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

जांच के निष्कर्ष पर टिकी नजर

फिलहाल मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और सामने आने वाले साक्ष्यों पर सभी की नजर है। यदि CBI जांच की मांग पर सरकार या अदालत की ओर से कोई निर्णय लिया जाता है, तो इससे मामले की जांच की दिशा में बड़ा बदलाव आ सकता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CID की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और कथित नियुक्ति अनियमितताओं में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी आगे क्या खुलासा करती है।