रांची,   झारखंड में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सोमवार को प्रोजेक्ट भवन स्थित सभागार में राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की 94वीं त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और विशिष्ट अतिथि के तौर पर राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की उपस्थित रहीं।

बैठक को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य में ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) में सुधार की गति धीमी है। यह अनुपात पिछले त्रिमाही में 52.28 प्रतिशत से बढ़कर 53.53 प्रतिशत हुआ है, लेकिन झारखंड के 24 जिलों में से छह जिलों में यह औसत 40 प्रतिशत से भी कम है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने इस दिशा में ठोस कार्य योजना बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

वहीं कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कृषि क्षेत्र में बैंकों की भूमिका को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए 35,822 करोड़ रुपये के कृषि ऋण लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 11,856 करोड़ रुपये ही वितरित किए गए हैं, जो लक्ष्य का मात्र 33.18 प्रतिशत है।

उन्होंने बताया कि झारखंड एक कृषि प्रधान राज्य है और बैंकों की सक्रिय भागीदारी से ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक राज्य के बैंकों में कुल 3,87,390 करोड़ रुपये जमा थे, जबकि ऋण अग्रिम 1,89,972 करोड़ रुपये रहा और सीडी रेशियो 53.63 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत 78 प्रतिशत से काफी कम है।

बैठक के दौरान मंत्रियों ने सुझाव दिए कि राज्य के विश्वविद्यालयों में बैंकर्स द्वारा कैंप लगाकर छात्रों को व्यवसाय ऋण उपलब्ध कराया जाए। साथ ही वित्त, शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास विभागों के बीच समन्वय के लिए एक समिति गठित करने का भी प्रस्ताव रखा गया।

मंत्रियों ने पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, तालाब और चेक डैम निर्माण जैसे क्षेत्रों में बैंकों द्वारा ठोस योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।

बैठक में नाबार्ड, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि, वित्त विभाग के अधिकारी तथा राज्य के सभी 24 जिलों के जिला प्रबंधक उपस्थित रहे।