षटतिला एकादशी पर आस्था का सैलाब, दोमुहानी और स्वर्णरेखा तट पर उमड़े श्रद्धालु
जमशेदपुर, । शहर में बुधवार को षटतिला एकादशी के पावन अवसर पर
श्रद्धा और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु
सोनारी दोमुहानी और मानगो स्थित स्वर्णरेखा नदी के तट पर पहुंचे और
विधि-विधान के साथ पवित्र स्नान किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने
तिल,अन्न,वस्त्र और धन का दान कर पुण्य अर्जित किया। नदी घाटों पर सुबह से
ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही,जिससे पूरा इलाका धार्मिक उल्लास से
सराबोर नजर आया।
हिंदू पंचांग के अनुसार षटतिला एकादशी व्रत
बुधवार,14 जनवरी 2026 को रखा गया है। इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।
मान्यता है कि षटतिला एकादशी का व्रत रखने से पुराने पापों का नाश होता है
और जीवन में सुख, समृद्धि तथा धन-धान्य की प्राप्ति होती है। इस दिन तिल
का विशेष महत्व होता है। तिल का दान, तिल से हवन, तिल युक्त भोजन और तिल का
उपयोग करने से दरिद्रता दूर होती है और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त
होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत मन, वाणी और कर्म की
शुद्धि करता है तथा व्यक्ति को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है। विशेष
रूप से माघ मास में किए गए दान और पुण्य कर्म का फल दोगुना माना गया है,
इसी कारण श्रद्धालुओं में इस व्रत को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।
पं.
संजय तिवारी की मानें तो इस वर्ष षटतिला एकादशी का महत्व और भी बढ़ गया
है, क्योंकि यह वर्ष की पहली एकादशी है और मकर संक्रांति के साथ इसका
दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर 3
बजे के बाद सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस कारण एकादशी के पुण्य
फल में कई गुना वृद्धि होगी। साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत
सिद्धि योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जो धार्मिक कार्यों, व्रत
और दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस
शुभ संयोग में किया गया स्नान, दान और व्रत जीवन की अनेक बाधाओं को दूर
करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसी आस्था के चलते जमशेदपुर
के नदी तटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण
भक्तिमय बना रहा।














