असम बाढ़ः अभी भी 05 जिलों की 192799 आबादी प्रभावित, 2 और शव मिले
गुवाहाटी, असम में आई बाढ़ की विनाशलीला अब चारों ओर दिखाई दे रहा
है। सबसे अधिक विनाश का दृश्य शिवसागर एवं चराईदेव जिलों में देखने को मिल
रहा है। सबसे दुखद स्थिति शिवसागर जिला के नेपाली खूंटी गांव का है। बताया
जाता है कि 100 से अधिक परिवारों वाले इस गांव में कुछ भी नहीं बचा है।
बचे हुए लोग आश्रय स्थल, ऊंचाई वाले इलाकों में प्लास्टिक के तंबूओं में
फिर से जीवन को जीने का सपना बुन रहे हैं। नेपाली खूंटी गांव मुख्य रूप से
दूध उत्पादन के रूप में विख्यात था, आज गांव में एक भी पशु देखने को नहीं
मिल रहा है। चारों ओर विनाश की चिह्न दिखाई दे रहे हैं। यह गांव बेहद
दुर्गम इलाके में है, यही कारण है कि यहां पर राहत एवं बचाव कार्य अभी तक
पूरी तरह से नहीं पहुंच पाया है। गांव के कितने लोग बचे हैं, कितने काल के
गाल में समा गये, इसका सही आंकड़ा आधिकारिक तौर पर अभी तक सामने नहीं आया
है।
बावजूद नदियों का पानी अब काफी हद तक उतर गया है जिसके चलते अब
लोग नये सिरे से जीवन जीने के जद्दो-जहद में जुट गये हैं। बाढ़ से सबसे
अधिक प्रभावित उपरी असम के चार जिलों शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट
हैं, जहां पर सरकारी एवं निजी स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चल रहा है।
बावजूद लोग अपने घरों में जा नहीं पा रहे हैं। बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया
है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की ओर से जारी
बीते 31 जुलाई के आंकड़ों के अनुसार धनसिरि नदी (नुमलीगढ़) इलाके में खतरे
के निशान से अभी भी उपर बह रही है, जिसके चलते लोगों में दहशत का माहौल
कायम है। इस बीच शिवसागर एवं चराईदेव जिलों में 1-1 यानी 2 लोगों के शव
बरामद हुए हैं। इस तरह राज्य में मृतकों की कुल संख्या 82 हो गयी है।
बाढ़
से वर्तमान समय में अभी भी कुल 05 जिले बुरी तरह से प्रभावित हैं। जिसमें
शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और चराईदेव जिले शामिल हैं। बाढ़ से 05
जिलों के 17 राजस्व मंडलों के कुल 379 गांव प्रभावित हैं। राज्य की कुल
192799 आबादी अभी भी प्रभावित हैं एवं 15430 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में
डूबी हुई है।
राज्य सरकार ने बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए वर्तमान
में कुल 54 राहत शिविर एवं 26 राहत वितरण केंद्र समेत कुल 80 शिविर
क्रियान्वित रखे हैं। राहत शिविरों में 12994 लोग आश्रय लिए हुए हैं। जबकि
राहत वितरण केंद्रों पर 5384 गैर-शिविर निवासी राहत प्राप्त कर रहे हैं।
राज्य
में शुक्रवार को 2 और लोगों के शव बरामद हुए हैं। जिसमें शिवसागर जिले में
1 एवं चराईदेव जिले में 1 कुल 2 लोगों के शव बरामद हुए हैं। इस तरह राज्य
में बाढ़ के चलते मरने वालों की कुल संख्या 82 हो गयी है। बाढ़ से अभी भी
प्रभावित जानवरों की कुल संख्या 10855 दर्ज हुई है। जिसमें बड़े 4755, छोटे
4629 एवं मुर्गी-पालन 1471 दर्ज हुए हैं। इस बीच बाढ़ के पानी में शिवसागर
जिले में कुल 1461 जानवर बहने की जानकारी सामने आई है।
31 जुलाई को
मिले आंकड़ों के अनुसार बाढ़ के पानी में शिवसागर जिले में पूरी तरह से
क्षतिग्रस्त कच्चे मकानों की कुल संख्या 879 बतायी गयी है। जिसमें शिवसागर
में 482 एवं चराईदेव में 397 है। वहीं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त पक्के
मकानों की संख्या 134 दर्ज हुई है। जिसमें शिवसागर 67 तथा चराईदेव जिले 67
मकान शामिल हैं। जबकि, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकानों की संख्या
2022 है। जिसमें शिवसागर में 1007 तथा चराईदेव जिले में 1015 मकान शामिल
हैं। वहीं आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकानों की संख्या 547 है। जिसमें
शिवसागर में 151 तथा चराईदेव जिले में 396 मकान शामिल हैं। क्षतिग्रस्त
अन्य झोपड़ियों की कुल संख्या 180 है, जिसमें शिवसागर जिले में 145 तथा
चराईदेव जिले में 127 शामिल हैं। वहीं क्षतिग्रस्त अन्य मवेशी शेड की कुल
संख्या 3885 है। जिसमें शिवसागर जिले में 3758 तथा चराईदेव जिले में 127
शामिल हैं।
बाढ़ में राहत एवं बचाय अभियान में एसडीआरएफ,
सेना/अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, एयर फोर्स, पुलिस, अग्निशमन और
आपातकालीन सेवाएं (एफ एंड ईएस), सर्कल कार्यालय/स्थानीय प्रशासन, नागरिक
सुरक्षा/प्रशिक्षित स्वयंसेवक और अग्निशमन विभाग जुटा हुआ है। इस बीच बाढ़
प्रभावित इलाकों में राज्य सरकार ने कुल 64 मेडिकल टीमों को तैनात किया।
इस दौरान 03 नावें भी राहत कार्य में जुटी रहीं।
बाढ़ प्रभावितों के
बीच राज्य सरकार की ओर से चावल (क्विंटल में): 10.872, दाल (क्विंटल में):
1.968, नमक (क्विंटल में): 0.5948, मस्टर्ड ऑयल/सरसों का तेल (लीटर में):
59.61 के साथ ही पशुओं का चारा - गेंहूं का चोकर (क्विंटल में): 1094.893
एवं पशुओं का चारा - चावल का चोकर (क्विंटल में): 202.29 राहत सामग्री
बांटी गई।
बाढ़ से बड़े पैमाने पर सड़क, पुल एवं अन्य आधारभूत
ढांचे को नुकसान पहुंचा है। इसकी मरम्मत के लिए सरकार लगातार समीक्षा बैठक
कर हालात का जायजा ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा लगातार
अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रभावितों की मदद के लिए हर संभव कदम उठा रहे
हैं। प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए खाने-पीने की वस्तुओं के साथ ही
नगद धन प्रदान करने के लिए भी आवश्यक तैयारियों को अमलीजामा पहनाने के लिए
अधिकारियों को निर्देश दिया है।















