नई दिल्ली: देश में युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार में मंत्री जितेंद्र सिंह ने कॉकroach जनता पार्टी (Cockroach Janta Party-CJP) के कुछ कार्यकर्ताओं पर विदेशी फंडिंग लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि संगठन से जुड़े लोगों को अमेरिका के दानदाताओं और पाकिस्तानी नेताओं से आर्थिक मदद मिल रही है।

मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जहां केंद्र सरकार की ओर से विदेशी फंडिंग और कथित भारत विरोधी संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं CJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार से सबूत सार्वजनिक करने की चुनौती दी है।

यह विवाद अब केवल एक संगठन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कांग्रेस और भाजपा के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।

जितेंद्र सिंह ने क्या आरोप लगाए?

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 3 नवंबर 2026 को कर्नाटक के बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान CJP से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं की फंडिंग पर सवाल उठाए।

उन्होंने दावा किया कि पर्याप्त सबूत हैं, जिनसे पता चलता है कि संगठन से जुड़े लोगों को अनधिकृत स्रोतों से आर्थिक मदद मिल रही है। मंत्री ने आरोप लगाया कि विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले NGO, कथित भारत विरोधी संगठन और विदेशों में सक्रिय नेटवर्क देश में सरकार के खिलाफ एक विशेष नैरेटिव तैयार करने में लगे हैं।

जितेंद्र सिंह ने विशेष रूप से दो नामों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, CJP के संस्थापक अभिजीत दीखित (Abhijeet Dipke) को अमेरिका स्थित दानदाताओं से आर्थिक सहायता मिली है, जबकि संगठन से जुड़े अशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) को पाकिस्तानी नेताओं से पैसे मिलने का आरोप है।

हालांकि, मंत्री के इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से बैंक रिकॉर्ड या वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज सामने नहीं रखे गए हैं।

CJP ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

केंद्र सरकार के आरोपों पर कॉकroach जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि एक केंद्रीय मंत्री बिना जवाबदेही के कुछ भी आरोप लगा सकते हैं।

CJP ने कहा कि यह सार्वजनिक विमर्श की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है, जहां बड़े पदों पर बैठे लोगों के बयानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सरकार से सीधे पूछा है कि यदि उसके पास विदेशी फंडिंग के पर्याप्त सबूत हैं, तो उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?

CJP के कार्यकर्ता सौरव दास ने भी आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि आंदोलन शुरू होने से पहले से ही संगठन विदेशी फंडिंग के आरोपों का आधार पूछ रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर ही लगा दिया फंडिंग का आरोप

इस विवाद में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा भी कूद पड़ी हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के आरोपों पर पलटवार करते हुए दावा किया कि CJP के कार्यकर्ता पहले ही कह चुके हैं कि उन्हें भाजपा की ओर से चुनावी बॉन्ड के माध्यम से पैसा मिला है।

महुआ मोइत्रा ने कहा कि CJP के सदस्यों अशुतोष रांका और सौरव सहित अन्य लोगों ने विदेशी फंडिंग मिलने की बात से इनकार किया है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि फंडिंग की बात हो रही है, तो भाजपा से भी सवाल पूछे जाने चाहिए।

हालांकि, महुआ मोइत्रा का यह बयान भी एक राजनीतिक आरोप है। इसके समर्थन में कोई सत्यापित वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है।

कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने केंद्र से मांगा जवाब

कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने भी विदेशी फंडिंग के आरोपों पर केंद्र सरकार को घेरा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि केंद्र सरकार और भाजपा के पास विदेशी एजेंसियों द्वारा कांग्रेस या अन्य संगठनों को फंडिंग दिए जाने के सबूत हैं, तो उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?

प्रियंक खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती भी दी। उन्होंने सुझाव दिया कि इस चर्चा में भाजपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की फंडिंग के स्रोतों पर भी बात होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत को मॉडरेटर बनाने का सुझाव दिया।

खड़गे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और खुफिया एजेंसियों से भी सवाल किया कि आखिर इन आरोपों का आधार क्या है।

दिल्ली पुलिस ने CJP कार्यकर्ताओं को पूछताछ के लिए बुलाया

विदेशी फंडिंग को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच CJP के कुछ कार्यकर्ता दिल्ली पुलिस की जांच के दायरे में भी हैं।

5 नवंबर 2026 को संगठन के प्रवक्ता सौरव दास और अशुतोष रांका दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए। उन्हें 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

जांच एजेंसियां कथित तौर पर निषेधाज्ञा के उल्लंघन, बिना अनुमति प्रदर्शन स्थल में प्रवेश और बैरिकेडिंग पार करने से जुड़े आरोपों की जांच कर रही हैं।

CJP के नेताओं ने कहा है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

क्या है Cockroach Janta Party और क्यों चर्चा में है?

Cockroach Janta Party (CJP) एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक समूह के रूप में सामने आया है, जो सोशल मीडिया अभियानों और विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार की नीतियों तथा राजनीतिक संस्थाओं की आलोचना करता रहा है।

2026 में दिल्ली और अन्य राज्यों में युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान यह संगठन चर्चा में आया। विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में इसकी गतिविधियां सामने आईं।

संगठन के समर्थकों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं की आवाज उठाने के लिए काम कर रहे हैं। वहीं, सरकार से जुड़े नेताओं ने इसके पीछे विदेशी फंडिंग और कथित बाहरी प्रभाव की आशंका जताई है।

FCRA कानून के तहत विदेशी फंडिंग पर क्या हैं नियम?

भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले धन को नियंत्रित करने के लिए Foreign Contribution (Regulation) Act यानी FCRA लागू है।

इस कानून का उद्देश्य विदेशी योगदान के उपयोग को नियंत्रित करना और यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का इस्तेमाल देश के हितों, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ न हो।

विदेशी योगदान प्राप्त करने के लिए संबंधित संस्थाओं को कानून के तहत निर्धारित पंजीकरण या पूर्व अनुमति की आवश्यकताओं का पालन करना होता है। नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी विदेशी फंडिंग के संदर्भ में FCRA का बचाव करते हुए कहा कि ऐसे वित्तीय लेनदेन की निगरानी आवश्यक है।

फिलहाल आरोपों की पुष्टि होना बाकी

CJP को अमेरिका और पाकिस्तान से फंडिंग मिलने का दावा फिलहाल केंद्रीय मंत्री के आरोपों पर आधारित है। संगठन ने इन आरोपों को खारिज किया है और सरकार से सार्वजनिक सबूत पेश करने की मांग की है।

इस विवाद में कांग्रेस और भाजपा के बीच भी राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित जांच एजेंसियां विदेशी फंडिंग के आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड या जांच निष्कर्ष सामने लाती हैं या नहीं।

फिलहाल किसी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जांच निष्कर्ष या वित्तीय दस्तावेज से यह साबित नहीं हुआ है कि CJP के संबंधित कार्यकर्ताओं को पाकिस्तानी नेताओं या अमेरिकी दानदाताओं से अवैध धन मिला है।