फतेहपुर: सिद्धपीठ ताम्बेश्वर बाबा मंदिर का महात्म्य, ब्रिटिश हुकूमत में दर्शन मात्र से छूट जाते थे कैदी
भगवान की अनुकम्पा की जानकारी पर ब्रिटिश हुकूमत ने यह कैदियों के बाहर निकास द्वार की बदल दी गई थी दिशा
फतेहपुर, सावन मास के शुरू होते ही फतेहपुर जनपद के शिव मंदिरों
में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। शहर मुख्यालय स्थित अति प्राचीन
सिद्धपीठ ताम्बेश्वर बाबा के मंदिर के महात्म्य को भक्ति व आस्था से भाव
याद कर लोगों को बताते हैं कि भोले बाबा के दर्शन मात्र से जिला कारागार
में बंद कैदी छूट जाते थे।
मान्यता तो यहां तक है कि ब्रिटिश काल
में न्यायालय जाते समय यदि कैदी ने मंदिर की तरफ देख कर भोलेबाबा से
मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की तो वह कैदी छूट जाता था।
आपको
बता दें कि बड़ी संख्या में सावन माह में भक्तों के साथ कांवड़िए बोल बम का
जयकारा लगाते हुए जलाभिषेक करने के लिए इस मंदिर पहुंचते हैं। यहां भगवान
शिव के दर्शन के लिए भक्तों की अपार भीड़ देखने को मिलती है। कुछ श्रद्धालु
दंडवत होकर जमीन पर लेटकर भगवान शिव का दर्शन करने पहुंचते हैं।
भक्त
उदय लोधी व पुष्प राज पटेल ने बताया कि जो भी व्यक्ति सच्ची श्रद्धा व
भक्ति से तांबेश्वर बाबा के दरबार के लिए आता है और कोई कामना करता है,
भगवान ताम्बेश्वर बाबा उसकी सारी मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं।
ताम्बेश्वर बाबा की कृपा सब पर रहती है। मैं हर वर्ष पूरे सावन मास
प्रत्येक दिन भगवान शिव के दर्शन करने आता हूं। मेरे परिवार में उनकी कृपा
से किसी प्रकार की कोई परेशानी है।
मंदिर के मुख्य पुजारी व महंत
राघवेंद्र पाण्डेय ने मंदिर के महात्म्य के बारे में बताया कि मंदिर अति
प्रचीन है, जिसकी प्राचीनता का कोई स्पष्ट उल्लेख तो नहीं मिलता, लेकिन
किदवंतियों से भक्त मंदिर की प्राचीनता की कहानी सुनाते रहते हैं। मंदिर
में मुख्य पुजारी के रूप में मेरी नियुक्ति सन् 2010 में हुई थी, तब से मैं
भोले बाबा की सेवा कर रहा हूं।
अयाह शाह विधानसभा के भारतीय जनता
पार्टी (भाजपा) विधायक विकास गुप्ता ने बताया कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग
के इतिहास के विषय में सटीक जानकारी नहीं मिलती है। हालांकि बड़े बुजुर्ग
बताते हैं कि ब्रिटिश शासनकाल के समय जो भी निर्दोष कैदी जेल में बन्द होते
थे, वह इस मंदिर के दर्शन मात्र से स्वत: ही छूट जाते थे। दरअसल मंदिर के
नजदीक ही लगभग तीन सौ मीटर दूर पश्चिम दिशा में जिला कारागार स्थित है औऱ
अंग्रेजों के समय में उसका एक दरवाजा ताम्बेश्वर मंदिर की तरफ़ पूर्व दिशा
में था। उस दरवाजे से मंदिर का दर्शन हो जाता था औऱ जो भी कैदी कोर्ट में
पेशी जाते समय भोले बाबा का स्मरण कर वहीं से मंदिर के दर्शन कर लेता था वह
न्यायालय से बरी हो जाता था या उसे जमानत मिल जाती थी। धीरे धीरे यह बात
जब जेल प्रशासन को पता चली तो जेल अधीक्षक ने जेल के उस द्वार को बन्द करा
दिया और दक्षिण दिशा की तरफ नया द्वार बनावाया दिया। जिससे कैदियों को
मंदिर के दर्शन न हो और कैदी न छूट पायें।
मंदिर के सर्वराकार
पूर्व मंत्री व वयोवृद्ध भाजपा के पूर्व विधायक राधेश्याम गुप्ता ने बताया
कि सावन माह में भोले बाबा के दर्शन के लिए जिले सहित आसपास के जनपदों से
भक्त आते हैं। भक्तों की सुविधाओं के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। जिससे
व्यवस्था न होने पाये और भक्तों को कोई असुविधा न हो। सावन माह में पुलिस
प्रशासन भी भक्तों की सुरक्षा की देखभाल के लिए मुस्तैद रहता है।















