नई दिल्ली: देशभर में आज से गणेश उत्सव 2026 की शुरुआत हो गई है। भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही महाराष्ट्र समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में उत्सव का माहौल बन गया है। सुबह से ही गणपति मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है। “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया है।

घरों और पंडालों में हुई गणपति की स्थापना

गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्रद्धालु अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं। विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और गणपति आरती का आयोजन किया जा रहा है।

कई शहरों में आकर्षक पंडाल तैयार किए गए हैं, जहां गणपति की भव्य प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। बाजारों में भी गणेश प्रतिमाओं, फूल-मालाओं, पूजा सामग्री और सजावटी सामान की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ नजर आ रही है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा उत्साह

गणेश उत्सव का सबसे भव्य स्वरूप महाराष्ट्र में देखने को मिलता है। मुंबई, पुणे और आसपास के इलाकों में सार्वजनिक गणेश मंडलों ने विशेष तैयारियां की हैं। कई स्थानों पर विशाल प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं और अगले कई दिनों तक विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणपति पंडालों में पहुंचकर दर्शन करते हैं। प्रशासन की ओर से भी भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की जाती हैं।

भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि गणपति की आराधना करने से बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा के साथ मोदक और अन्य प्रसाद अर्पित करते हैं। घरों और पंडालों में भजन, आरती तथा धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।

विसर्जन के साथ होगा उत्सव का समापन

गणेश उत्सव के अंतिम चरण में श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं का श्रद्धा और उल्लास के साथ विसर्जन करते हैं। इस दौरान “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारे गूंजते हैं।

गणेश उत्सव 2026 की शुरुआत के साथ देशभर में भक्ति और उत्साह का माहौल है। आने वाले दिनों में विभिन्न शहरों में गणपति पंडालों और धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।