नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित अत्याधुनिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ (Pralay) का सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह परीक्षण गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सुबह करीब 11:10 बजे किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान निर्धारित सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

इस सफलता के साथ ही भारतीय सशस्त्र बलों में प्रलय मिसाइल प्रणाली को शामिल करने का रास्ता और मजबूत हो गया है। रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि सफल यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के बाद इस प्रणाली को सेना में शामिल करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण के करीब पहुंच गई है।

सभी परीक्षण मानकों पर खरी उतरी प्रलय मिसाइल

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, प्रलय मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। परीक्षण के दौरान चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में तैनात विभिन्न रेंज इंस्ट्रूमेंट्स ने मिसाइल की उड़ान से जुड़े आंकड़े रिकॉर्ड किए।

इन आंकड़ों के विश्लेषण से पुष्टि हुई कि परीक्षण के सभी निर्धारित लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे हुए हैं। यह परीक्षण यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के तहत किया गया, जिसमें DRDO के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रक्षा बलों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

क्या है प्रलय क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल?

प्रलय भारत में विकसित एक स्वदेशी सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग अपनी उड़ान के दौरान दिशा और प्रक्षेपवक्र में बदलाव करने की क्षमता रखती है।

सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च होने के बाद मुख्य रूप से निर्धारित प्रक्षेपवक्र का अनुसरण करती हैं। इसके विपरीत, क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल कम ऊंचाई वाले प्रक्षेपवक्र पर उड़ान भरने के साथ जरूरत के अनुसार अपनी दिशा में बदलाव और विभिन्न प्रकार के मैन्यूवर कर सकती है।

इस विशेषता के कारण दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए इसके संभावित लक्ष्य और उड़ान मार्ग का सटीक अनुमान लगाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

150 से 500 किलोमीटर तक मारक क्षमता

प्रलय मिसाइल को अलग-अलग सामरिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया गया है। इसकी मारक क्षमता लगभग 150 से 500 किलोमीटर तक बताई जाती है। यह विभिन्न प्रकार के पारंपरिक वॉरहेड ले जाने में सक्षम है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • स्वदेशी तकनीक: भारत में DRDO द्वारा विकसित।

  • मिसाइल का प्रकार: सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल।

  • मारक क्षमता: लगभग 150 से 500 किलोमीटर।

  • ईंधन प्रणाली: ठोस प्रणोदक (Solid Propellant)।

  • गाइडेंस सिस्टम: आधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन तकनीक।

  • वॉरहेड: विभिन्न प्रकार के पारंपरिक हथियार ले जाने की क्षमता।

  • उपयोग: सामरिक सैन्य अभियानों और विभिन्न प्रकार के जमीनी लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए।

DRDO और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने मिलकर किया विकास

प्रलय मिसाइल का स्वदेशी विकास हैदराबाद स्थित DRDO की रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने अन्य DRDO प्रयोगशालाओं के सहयोग से किया है।

इस परियोजना में कई रक्षा अनुसंधान संस्थानों ने योगदान दिया है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने विकास-सह-उत्पादन भागीदार के रूप में इस मिसाइल प्रणाली का निर्माण किया है।

इससे भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा और अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों के विकास में विदेशी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण पर DRDO, भारतीय रक्षा बलों और उद्योग जगत से जुड़े सभी भागीदारों को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों से लैस यह मिसाइल उभरते खतरों के खिलाफ भारतीय सेना की तकनीकी क्षमताओं और परिचालन तैयारियों को और मजबूत करेगी।

वहीं, रक्षा सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा DRDO अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने भी इस सफल परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों को बधाई दी।

भारतीय सेना और वायुसेना की ताकत बढ़ाएगी प्रलय

प्रलय मिसाइल को भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की सामरिक जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसके शामिल होने से भारत की पारंपरिक मिसाइल क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इसकी कम दूरी से मध्यम दूरी तक लक्ष्य भेदने की क्षमता और उड़ान के दौरान संभावित मैन्यूवर करने की विशेषता इसे आधुनिक युद्ध परिस्थितियों के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।

खास बात यह है कि अलग-अलग प्रकार के पारंपरिक वॉरहेड ले जाने की क्षमता के कारण इसे विभिन्न सामरिक परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या है इस सफल परीक्षण का महत्व?

भारत के लिए प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक युद्ध में मिसाइल तकनीक, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को चुनौती देने वाली तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

ऐसे में प्रलय जैसी स्वदेशी मिसाइल प्रणाली भारतीय सशस्त्र बलों की सामरिक क्षमता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस सफल परीक्षण के बाद प्रलय मिसाइल को सशस्त्र बलों में शामिल करने की प्रक्रिया अब बेहद करीब पहुंच गई है। आने वाले समय में इसके भारतीय रक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनने से देश की स्वदेशी सैन्य ताकत को एक नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, DRDO का यह सफल परीक्षण भारत की रक्षा तकनीक, स्वदेशी अनुसंधान और सैन्य आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।