भारतीय वित्तीय कंपनियों पर AI से साइबर हमला, CERT-In ने ‘Crafty Falcon’ को बताया बड़ा खतरा; चीन से जुड़े टूल्स का इस्तेमाल
नई दिल्ली: भारत की वित्तीय कंपनियों, फिनटेक संस्थानों और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से साइबर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) ने ऐसे ही एक सक्रिय साइबर हमले के अभियान का खुलासा किया है। एजेंसी ने इसके पीछे काम कर रहे हैकर समूह को ‘Crafty Falcon’ नाम दिया है। इस अभियान में हैकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI आधारित साइबर सुरक्षा टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें से कम-से-कम दो टूल्स को साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने चीन से जुड़ा बताया है। हालांकि, CERT-In ने अभी तक इस अभियान के पीछे किसी देश, सरकार या सरकारी एजेंसी की भूमिका की पुष्टि नहीं की है। CERT-In ने 4 नवंबर 2026 को वित्तीय क्षेत्र के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की। इसमें बताया गया कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC), डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म, फिनटेक कंपनियों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों को निशाना बनाकर साइबर हमले किए जा रहे हैं। एजेंसी के वित्तीय क्षेत्र से जुड़े साइबर सुरक्षा दल CSIRT-Fin ने इस अभियान को सक्रिय और जारी खतरा बताया है। जांच में सामने आया कि हमलावर AI की मदद से कंपनियों के सिस्टम का विश्लेषण करते हैं और उनकी कमजोरियों का फायदा उठाकर भुगतान तथा रकम वितरण से जुड़े सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पहले सुरक्षा उपाय लागू कर चुकी कुछ कंपनियों को भी दोबारा निशाना बनाया गया। CERT-In के मुताबिक, अधूरे सुरक्षा सुधारों के कारण हमलावरों को फिर से हमला करने का मौका मिला। CERT-In ने अपनी एडवाइजरी में चार AI आधारित साइबर हमले से जुड़े टूल्स की पहचान की है। 1. ARTEX: यह AI और मल्टी-एजेंट तकनीक पर आधारित टूल है, जिसका इस्तेमाल नेटवर्क की कमजोरियों की पहचान और साइबर हमले की प्रक्रिया को स्वचालित करने में किया जा सकता है। सुरक्षा शोधकर्ताओं ने इसे चीन से जुड़ा बताया है। 2. PentAGI: यह एक स्वायत्त मल्टी-एजेंट AI पेनिट्रेशन टेस्टिंग सिस्टम है, जो अलग-अलग AI एजेंट की मदद से सुरक्षा कमजोरियों की जांच और हमले की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है। 3. Cairn: यह एक अटैक सर्च इंजन है, जिसका उपयोग हमले के लिए संभावित रास्तों और कमजोरियों की पहचान में किया जा सकता है। 4. CyberStrikeAI: यह AI आधारित साइबर हमले और सुरक्षा परीक्षण से जुड़ा फ्रेमवर्क है। CERT-In के अनुसार, इन टूल्स की मदद से हमलावर तेजी से बड़ी संख्या में कस्टम स्क्रिप्ट तैयार कर सकते हैं। ये स्क्रिप्ट लक्ष्य के सिस्टम से मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर खुद को बदल भी सकती हैं। इससे साइबर हमलों की गति और उनका दायरा बढ़ जाता है। इस मामले में चीन से जुड़ाव सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने कम-से-कम दो टूल्स को चीन से संबंधित बताया है। इनमें ARTEX विशेष रूप से चर्चा में है। साइबर सुरक्षा कंपनी CrowdStrike के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि ARTEX का इस्तेमाल दक्षिण कोरिया के बैंकों पर हमलों में भी हुआ था। इसके अलावा चीन से जुड़े एक साइबर जासूसी अभियान में इस टूल के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई थी, जिसमें 14 से अधिक देशों के 200 से ज्यादा संगठनों को निशाना बनाया गया था। हालांकि, किसी टूल का चीन में विकसित होना या उसका चीन से जुड़ा होना यह साबित नहीं करता कि भारतीय कंपनियों पर हुए हमलों के पीछे चीनी सरकार है। CERT-In ने हमलावरों की वास्तविक पहचान और उनके भौगोलिक ठिकाने का खुलासा नहीं किया है। CERT-In की एडवाइजरी के मुताबिक, इस अभियान में हैकर कंपनियों के भुगतान और रकम वितरण से जुड़े API का दुरुपयोग कर रहे हैं। API यानी Application Programming Interface एक ऐसा तकनीकी माध्यम है, जिसके जरिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर और वित्तीय सिस्टम आपस में जानकारी साझा करते हैं। बैंक, NBFC और फिनटेक कंपनियां इनका इस्तेमाल भुगतान, लोन वितरण और अन्य वित्तीय लेनदेन के लिए करती हैं। जांच में सामने आए हमले के कुछ प्रमुख तरीके इस प्रकार हैं: कंपनियों के इंटरनेट से जुड़े कमजोर सर्वर और टेस्टिंग सिस्टम को निशाना बनाना। UAT और स्टेजिंग जैसे गैर-प्रोडक्शन सिस्टम में प्रवेश कर वहां से मुख्य सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश करना। चोरी किए गए पासवर्ड, टोकन और API क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करना। भुगतान और मर्चेंट सेटलमेंट API के जरिए अनधिकृत लेनदेन करना। पहले छोटे मूल्य के ट्रांजैक्शन के जरिए भुगतान प्रक्रिया की जांच करना और उसके बाद बड़ी रकम के लेनदेन का प्रयास करना। क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के डिजिटल वॉलेट और उनकी सुरक्षा से जुड़े सिस्टम को निशाना बनाना। इस तरह के हमलों में हैकर हमेशा बैंक के मुख्य सर्वर को सीधे हैक करने की कोशिश नहीं करते, बल्कि वित्तीय संस्थानों के बीच मौजूद तकनीकी कनेक्शन और भुगतान प्रक्रियाओं की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। CERT-In ने एक और गंभीर पहलू की ओर ध्यान दिलाया है। हमलावर कई बार छुट्टियों, शनिवार-रविवार और ऐसे समय को चुनते हैं, जब कंपनियों की साइबर सुरक्षा टीमों की निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है। इससे संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने और समय पर कार्रवाई करने में देरी हो सकती है। एजेंसी के अनुसार, कुछ कंपनियों ने पहले मिली चेतावनियों के बाद सुरक्षा सुधार किए थे, लेकिन अधूरे सुधारों के कारण उन्हें दोबारा निशाना बनाया गया। इसलिए केवल एक बार सिस्टम की सुरक्षा जांच करना पर्याप्त नहीं है। कंपनियों को लगातार निगरानी और सुरक्षा परीक्षण जारी रखने की जरूरत है। भारत में हाल के दिनों में वित्तीय संस्थानों से जुड़ी कई साइबर सुरक्षा घटनाएं सामने आई हैं। अक्टूबर में मुंबई की दो NBFC कंपनियों से जुड़े मामले में ICICI Bank के खातों से 700 से अधिक अनधिकृत तत्काल ट्रांसफर के जरिए लगभग 20 लाख डॉलर की रकम निकाले जाने की खबर सामने आई थी। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने डार्क वेब पर 3,897 ग्राहकों के रिकॉर्ड लीक होने की जानकारी दी थी। Spandana Sphoorty Financial ने 1 नवंबर को अपने बैंक खाते से अनधिकृत डेबिट की सूचना दी थी। AU Small Finance Bank ने संभावित ग्राहक डेटा लीक की जांच शुरू की थी। हालांकि, CERT-In ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन सभी घटनाओं का संबंध ‘Crafty Falcon’ अभियान से है। इसलिए इन्हें एक ही साइबर हमले का हिस्सा मानना सही नहीं होगा। CERT-In ने बैंकों, NBFC और फिनटेक कंपनियों को अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। प्रमुख सुरक्षा उपाय: सभी भुगतान और रकम वितरण से जुड़े लेनदेन पर सर्वर-साइड वैलिडेशन लागू किया जाए। महत्वपूर्ण वित्तीय लेनदेन के लिए मेकर-चेकर अप्रूवल व्यवस्था अपनाई जाए। क्लाउड सर्वर और API गतिविधियों की लगातार निगरानी की जाए। टेस्टिंग और प्रोडक्शन सिस्टम को अलग रखा जाए तथा उनके क्रेडेंशियल साझा न किए जाएं। संदिग्ध छोटे ट्रांजैक्शन के बाद अचानक होने वाले बड़े ट्रांसफर पर अलर्ट जारी किया जाए। कर्मचारियों और सर्वर पर अनधिकृत AI साइबर अटैक टूल्स के इस्तेमाल को रोका जाए। क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट की निजी कुंजियों को सुरक्षित हार्डवेयर सिस्टम या कोल्ड स्टोरेज में रखा जाए। छुट्टियों और सप्ताहांत में भी साइबर सुरक्षा निगरानी जारी रखी जाए। एजेंसी ने संदिग्ध गतिविधि मिलने पर प्रभावित सिस्टम को अलग करने, डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने, पासवर्ड और एक्सेस क्रेडेंशियल बदलने तथा CERT-In/CSIRT-Fin को तुरंत सूचना देने की सलाह दी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने जहां बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं को आसान बनाया है, वहीं इसका दुरुपयोग साइबर अपराधियों के लिए भी नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। पहले साइबर हमले के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और काफी समय की जरूरत होती थी। लेकिन AI आधारित टूल्स की मदद से कमजोरियों की पहचान, स्क्रिप्ट तैयार करने और हमले के अलग-अलग चरणों को स्वचालित करना आसान हो सकता है। भारत में डिजिटल भुगतान और फिनटेक सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में वित्तीय संस्थानों के लिए केवल पारंपरिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। उन्हें AI आधारित साइबर हमलों से निपटने के लिए भी अपनी तैयारी मजबूत करनी होगी।CERT-In ने जारी की गंभीर साइबर सुरक्षा चेतावनी
किन AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं हैकर?
चीन से कनेक्शन, लेकिन सरकारी भूमिका की पुष्टि नहीं
कंपनियों के अपने पेमेंट सिस्टम को बनाया जा रहा निशाना
छुट्टियों और वीकेंड में हमले करने की रणनीति
हाल के वित्तीय साइबर हमलों ने बढ़ाई चिंता
CERT-In ने वित्तीय कंपनियों को क्या निर्देश दिए?
AI के बढ़ते इस्तेमाल से साइबर सुरक्षा की चुनौती















