आसनसोल में 13 साल बाद फिर शुरू हुई बस्तिन बाजार दुर्गा मंदिर में नित्य पूजा
कोलकाता, आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के नव निर्वाचित भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने रविवार को भाजपा जिलाध्यक्ष और पार्टी नेताओं के साथ आसनसोल के बस्तिन बाजार दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना की। करीब 13 वर्षों बाद मंदिर में दोबारा नित्य पूजा शुरू होने से इलाके में खुशी और उत्साह का माहौल देखा गया।
मिली जानकारी के अनुसार, लंबे समय से बस्तिन बाजार दुर्गा मंदिर में नियमित पूजा बंद थी। भाजपा की जीत के बाद मंदिर में फिर से नित्य पूजा शुरू करने का निर्णय लिया गया था। उसी के तहत रविवार को विधिवत पूजा के साथ मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
मंदिर में पूजा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि वर्षों से सनातनियों की आस्था और भावनाओं को आहत कर इस मंदिर को बंद रखा गया था। उन्होंने कहा कि अगर मंदिर बंद रहेगा तो न पूजा होगी, न संध्या आरती होगी और न ही धार्मिक वातावरण बना रहेगा। उन्होंने कहा कि आसनसोल की जनता से वादा किया गया था कि मंदिर को फिर से खोला जाएगा और नित्य पूजा शुरू होगी, जिसे अब पूरा कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के अगले ही दिन मंदिर में पूजा शुरू होना एक शुभ संकेत है। कृष्णेंदु मुखर्जी ने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति और कुछ लोगों को खुश करने की कोशिश में मंदिर को इतने वर्षों तक बंद रखा गया था। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर खोलने का उद्देश्य किसी प्रकार का सांप्रदायिक तनाव पैदा करना नहीं है।
विधायक ने कहा कि मंदिर के आसपास अन्य धर्मों के लोग भी रहते हैं और सभी के सम्मान और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सनातनी अपने धर्म का पालन करेंगे और साथ ही दूसरे धर्मों का सम्मान भी करेंगे। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से शांति और भाईचारे के साथ पूजा में शामिल होने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। मंदिर में फिर से नित्य पूजा शुरू होने को लेकर स्थानीय निवासियों में खासा उत्साह देखा गया।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ नेता शिवदासन दासू ने तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मंदिर का मुद्दा ममता बनर्जी से छुपाकर रखा, वे अब पार्टी में ज्यादा दिनों तक नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि अहंकार किसी का स्थायी नहीं होता, “रावण का अहंकार भी नहीं बचा था।” उनके अनुसार तृणमूल नेताओं और जनप्रतिनिधियों के भीतर बढ़ते अहंकार की वजह से ही जनता ने पार्टी से दूरी बना ली।
शिवदासन दासू ने आरोप लगाया कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण वर्षों तक मंदिर को बंद रखा गया। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि मंदिर खोलने का उद्देश्य किसी प्रकार का सांप्रदायिक तनाव पैदा करना नहीं है। उन्होंने कहा कि बस्तिन बाजार में सभी धर्म और जाति के लोग वर्षों से मिलजुल कर रहते आए हैं और आगे भी शांति और सौहार्द बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी में सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता है और उनसे उम्मीद है कि वे हर वर्ग के लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने जनता से भी शांति बनाए रखने और भाईचारे के साथ रहने की अपील की।
शिवदासन दासू ने कहा कि यह मंदिर उनके कार्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर है और उन्होंने कभी यहां किसी प्रकार का तनाव नहीं देखा। उनके अनुसार कुछ शरारती और आपराधिक मानसिकता वाले लोगों ने नेताओं को गलत जानकारी देकर इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से बड़ा बना दिया। उन्होंने दावा किया कि 13 वर्ष पहले भी मंदिर खोला जा सकता था, लेकिन कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इसे मुद्दा बना दिया।
उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की वर्तमान स्थिति के लिए सिर्फ मंत्री नहीं, बल्कि पार्टी के कई बड़े नेता जिम्मेदार हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण पार्टी के नेताओं की कुछ आदतें खराब हो गईं और जनता उनसे दूर होती चली गई। उन्होंने कहा कि तृणमूल का जन्म संघर्ष की राजनीति से हुआ था, वोट बैंक की राजनीति से नहीं।
शिवदासन दासू ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी को बस्तिन बाजार मंदिर के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई थी। उनके अनुसार कुछ नेताओं ने ममता बनर्जी के नाम पर पार्टी को बदनाम किया। उन्होंने दावा किया कि ऐसे कई लोग अब धीरे-धीरे पार्टी छोड़ रहे हैं।















