बीजिंग, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा पर बीजिंग पहुंच चुके हैं। आज ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल के बाहर ट्रंप का स्वागत होगा। इसके बाद उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात होगी। नवंबर 2017 के बाद ट्रंप दूसरी बार चीन पहुंचे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि चीन परमाणु हथियारों के समझौते में शामिल हो मगर बीजिंग इसके लिए विशेष उत्सुक नहीं है।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ और अमेरिका के न्यूज चैनल सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग गुरुवार सुबह बीजिंग में दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत करेंगे। बातचीत से पहले शी ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल के बाहर ट्रंप के लिए एक स्वागत समारोह आयोजित करेंगे।

ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की राजकीय यात्रा पर हैं। पिछले नौ वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा है। इससे पहले ट्रंप नवंबर 2017 में चीन की यात्रा की थी। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों तथा विश्व शांति और विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विचारों का गहन आदान-प्रदान करेंगे।

ट्रंप के घोषित मुख्य लक्ष्यों में से एक है चीन की बढ़ती परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाना। ट्रंप को यह यात्रा हथियारों में कमी पर बातचीत करने का एक अवसर प्रदान कर सकती है। हाल के वर्षों में चीन ने अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इनमें परमाणु हथियार उत्पादन सुविधाओं का समर्थन करने वाली इमारतें बनाने के लिए गांवों को समतल करना भी शामिल है।

फरवरी में, अमेरिका ने चीन पर 2020 में एक गुप्त परमाणु परीक्षण करने का आरोप लगाया था। हालांकि बीजिंग इस आरोप को नकार चुका है। चीन के इन कदमों ने अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के बीच एक नई हथियारों की होड़ का डर पैदा कर दिया है। दशकों में पहली बार दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु महाशक्तियों के पास अपने हथियारों के जखीरे पर कोई सीमा नहीं है। अब ट्रंप एक नया और बेहतर समझौता करना चाहते हैं जिसमें चीन भी शामिल हो।

ट्रंप ने खुद रूस और चीन से होने वाले कथित खतरे का हवाला देते हुए परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने की धमकी दी है। अमेरिका और रूस के बीच बची हुई आखिरी परमाणु हथियार नियंत्रण संधि फरवरी में समाप्त हो चुकी है। अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो ने संधि समाप्त होने से एक दिन पहले कहा था, "राष्ट्रपति ने अतीत में यह स्पष्ट किया है कि 21वीं सदी में वास्तविक हथियार नियंत्रण के लिए ऐसा कुछ भी करना असंभव है जिसमें चीन शामिल न हो, क्योंकि उसके पास हथियारों का विशाल जखीरा है।"