रामगढ़/रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन की स्मृति में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित पैतृक आवास पर पारंपरिक रस्म निभाई। इस दौरान उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन करते हुए अपनी मां के निमित्त भोजन परोसने की पारिवारिक परंपरा पूरी की। 

मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री और उनके परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन है। ऐसे में पारिवारिक परंपराओं के अनुसार किए गए इन संस्कारों का विशेष महत्व है। नेमरा स्थित पैतृक आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में परिवार के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया और दिवंगत रूपी सोरेन की स्मृति से जुड़े रीति-रिवाजों का पालन किया।

नेमरा स्थित पैतृक आवास पर निभाई गई परंपरा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पैतृक गांव नेमरा में परिवार के साथ मिलकर पारंपरिक रस्म पूरी की। स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार दिवंगत माता के निमित्त भोजन परोसने की रस्म निभाई गई। यह आयोजन परिवार की परंपराओं और दिवंगत सदस्य की स्मृति से जुड़ा हुआ है।  

नेमरा गांव सोरेन परिवार के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी गांव में रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया था।

7 अक्टूबर को हुआ था रूपी सोरेन का निधन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का 7 अक्टूबर 2026 की रात रांची के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। वह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी थीं। उनके निधन की खबर से सोरेन परिवार, झामुमो कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई थी।  

रूपी सोरेन के निधन से पहले परिवार ने शिबू सोरेन को भी खो दिया था। उनके जाने से परिवार को एक और बड़ा व्यक्तिगत आघात लगा है।

नेमरा में हुआ था अंतिम संस्कार

रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार 8 अक्टूबर को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां को मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, स्थानीय लोगों और शुभचिंतकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही।  

अंतिम संस्कार के बाद मुख्यमंत्री ने पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अपनी दिवंगत मां की स्मृति से जुड़े संस्कारों को आगे बढ़ाया।

परिवार और परंपरा से जुड़ा भावुक अवसर

रूपी सोरेन का जीवन सोरेन परिवार और झारखंड के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास से जुड़ा रहा। उनके निधन के बाद परिवार द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करना दिवंगत सदस्य के प्रति सम्मान और पारिवारिक परंपरा को बनाए रखने का हिस्सा है।

नेमरा में आयोजित इस रस्म के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां की स्मृति से जुड़े पारिवारिक दायित्वों को निभाया। परिवार के लिए यह समय शोक और स्मृतियों से भरा हुआ है।

निष्कर्ष: मां रूपी सोरेन के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नेमरा स्थित पैतृक आवास पर परिजनों के साथ पारंपरिक रस्म निभाई। भोजन परोसने की यह रस्म स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई और परिवार ने अपनी दिवंगत मां की स्मृति को सम्मान दिया।

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