रांची: झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। नियुक्तियां रद्द किए जाने के सरकार के फैसले के खिलाफ 191 चयनित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की पीठ में हुई।

191 चयनित अभ्यर्थियों ने दायर की याचिका

JSSC-CGL 2023 के माध्यम से विभिन्न सरकारी पदों पर चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत परीक्षा और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व महाधिवक्ता एवं वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन तथा वरीय अधिवक्ता दीपांकर राय ने पक्ष रखा।

अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, चयन प्रक्रिया पूरी की और नियुक्ति के बाद अपने-अपने पदों पर काम कर रहे हैं। ऐसे में पूरी परीक्षा को रद्द कर उनकी नियुक्तियां समाप्त करना उनके साथ अन्याय होगा।

नियुक्तियां रद्द करने पर फिलहाल रोक का असर

इससे पहले हाईकोर्ट ने JSSC-CGL परीक्षा और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाई थी। इस आदेश से JSSC-CGL के 1,932 चयनित अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली थी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

हालांकि, वर्तमान सुनवाई में 191 याचिकाकर्ताओं का मामला अलग से महत्वपूर्ण हो गया है। इन अभ्यर्थियों की ओर से नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है। फिलहाल अदालत का रुख इन चयनित अभ्यर्थियों के लिए राहत वाला माना जा रहा है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है।

1,932 नियुक्तियां बनी थीं विवाद का केंद्र

JSSC-CGL परीक्षा के जरिए कुल 1,932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई थी। इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (ASO), कनीय सचिवालय सहायक (JSA), प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO), प्रखंड कल्याण पदाधिकारी (BWO), श्रम प्रवर्तन अधिकारी (LEO) और अंचल निरीक्षक-कानूनगो सहित कई पद शामिल थे। चयनित अभ्यर्थियों को 30 दिसंबर 2025 को नियुक्ति पत्र दिए गए थे और इसके बाद वे विभिन्न विभागों में योगदान कर चुके थे।

सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद इन अभ्यर्थियों के सामने नौकरी जाने का संकट खड़ा हो गया था। हाईकोर्ट की रोक के बाद फिलहाल उनकी सेवाओं पर तत्काल खतरा टल गया है।

परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों की जांच जारी

JSSC-CGL विवाद की जड़ में परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां और पेपर लीक से जुड़े आरोप हैं। जांच एजेंसियां इस मामले में सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ कर रही हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक करीब 200 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की जा चुकी है।

राज्य सरकार ने JSSC और JPSC की कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने तथा कुछ पुरानी परीक्षाओं की जांच कराने का फैसला लिया था। इसी फैसले से प्रभावित चयनित अभ्यर्थियों ने अलग-अलग याचिकाओं के जरिए हाईकोर्ट का रुख किया है।

अब 15 सितंबर पर टिकी निगाहें

फिलहाल हाईकोर्ट की अंतरिम राहत से JSSC-CGL से चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, यह अंतिम निर्णय नहीं है। अदालत में आगे होने वाली सुनवाई में परीक्षा प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं, सरकार के रद्दीकरण आदेश और चयनित अभ्यर्थियों के अधिकारों पर विस्तार से सुनवाई होगी।

ऐसे में 15 सितंबर की अगली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। उस दिन अदालत का रुख यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि JSSC-CGL से चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर आगे क्या स्थिति बनती है।