CID की रेड के बाद एल. खियांग्ते ने मिटाए कई सबूत? डिजिटल उपकरण नष्ट करने का आरोप, 400 OMR शीट में छेड़छाड़ से मचा हड़कंप
रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे जांच एजेंसियों के सामने परीक्षा प्रक्रिया में कथित छेड़छाड़ की नई परतें सामने आने लगी हैं। पूर्व JPSC अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। CID ने उनसे कई दौर की पूछताछ के बाद कार्रवाई की और 10 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार किया था। JHARKHAND DARSHAN को मिली जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, CID की कार्रवाई के बाद इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड, डिवाइस या परीक्षा से संबंधित डेटा को जानबूझकर हटाने अथवा नष्ट करने की कोशिश की गई थी। हालांकि, इस दावे की अंतिम पुष्टि फॉरेंसिक जांच और केस रिकॉर्ड से होना बाकी है। इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू OMR शीट में कथित हेरफेर से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच में यह एंगल सामने आया है कि कुछ चयनित अभ्यर्थियों की OMR शीट में उत्तर वाले गोले खाली छोड़े गए और बाद में सही उत्तर दर्ज किए जाने की कथित व्यवस्था थी। मीडिया रिपोर्टों में CID जांच के हवाले से बताया गया है कि तकनीकी स्तर पर OMR स्कैनिंग और डेटा प्रोसेसिंग की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां मूल OMR, कार्बन कॉपी और उपलब्ध डिजिटल डेटा का मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वास्तविक परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी ने क्या उत्तर भरे थे और बाद में रिकॉर्ड में कोई बदलाव हुआ या नहीं। करीब 400 OMR शीट में कथित छेड़छाड़ का एंगल जांच के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अगर फॉरेंसिक जांच में इन शीटों में बदलाव की पुष्टि होती है, तो यह केवल व्यक्तिगत स्तर की गड़बड़ी नहीं बल्कि परीक्षा की पूरी मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। CID ने जांच के दौरान JPSC कार्यालय और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के परिसरों से दस्तावेज, OMR शीट और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। जांच एजेंसी कंप्यूटर, डेटा और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। अब जांच का एक अहम सवाल यह है कि किस-किस व्यक्ति को परीक्षा संबंधी डिजिटल डेटा तक पहुंच हासिल थी और उस डेटा में बाद में कोई बदलाव किया गया या नहीं। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि किसी कंप्यूटर, स्टोरेज डिवाइस या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से डेटा डिलीट किया गया था या नहीं। यदि डिलीट किए गए डेटा को फॉरेंसिक प्रक्रिया से रिकवर किया जाता है, तो वह जांच में महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बन सकता है। एल. खियांग्ते के कार्यकाल में हुई परीक्षाओं और लिए गए प्रशासनिक फैसले CID की जांच के दायरे में हैं। उनसे कई घंटे पूछताछ की जा चुकी है। 3 अगस्त को भी CID ने उनसे करीब सात घंटे पूछताछ की थी और उसी दौरान राज्य में 18 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। बाद में 10 अगस्त को CID ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच हुई। जांच एजेंसी के सामने अब सिर्फ OMR शीट नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की डिजिटल और मानवीय कड़ी को जोड़ने की चुनौती है। इसमें प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा केंद्र, OMR संग्रह, स्कैनिंग, डेटा प्रोसेसिंग और रिजल्ट तैयार होने तक की प्रक्रिया शामिल है। रिपोर्टों के मुताबिक CID ने परीक्षा से जुड़े दस्तावेज, OMR शीट और कंप्यूटर से संबंधित डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित गड़बड़ी किसी एक स्तर पर हुई या इसके पीछे कई लोगों की मिलीभगत थी। 1 सितंबर तक सामने आई रिपोर्ट के अनुसार JPSC और JSSC-CGL से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में CID 31 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी थी। इनमें आयोग के अधिकारी-कर्मचारी, परीक्षा संचालन एजेंसी से जुड़े लोग, बिचौलिए और सफल अभ्यर्थी शामिल बताए गए हैं। इससे साफ है कि जांच अब केवल परीक्षा संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित नेटवर्क में शामिल अलग-अलग कड़ियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर OMR में वास्तव में बदलाव हुआ, तो किसके निर्देश पर, किस तकनीकी माध्यम से और किन अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया? इसी सवाल का जवाब मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, स्कैन किए गए रिकॉर्ड और सर्वर/कंप्यूटर में उपलब्ध डिजिटल डेटा के फॉरेंसिक मिलान से निकल सकता है। फिलहाल 400 OMR शीट में कथित छेड़छाड़ और डिजिटल साक्ष्य मिटाने/नष्ट करने के आरोपों को जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता। इन आरोपों की पुष्टि अदालत में पेश होने वाले दस्तावेजी, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से ही होगी। JHARKHAND DARSHAN इस मामले की जांच से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज और CID की अगली कार्रवाई पर लगातार नजर बनाए हुए है।400 OMR शीट में छेड़छाड़ का एंगल
डिजिटल उपकरणों से जुड़े साक्ष्य भी जांच के दायरे में
खियांग्ते की भूमिका पर बढ़ा दबाव
OMR से लेकर डिजिटल डेटा तक—CID खंगाल रही पूरी चेन
31 गिरफ्तारियों तक पहुंची जांच
सबसे बड़ा सवाल: किसने बदला OMR और क्यों?














