रांची / झारखंड : झारखंड की आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत की मौत से उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। बेटी को खोने के बाद माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। निशा की मौत के बाद परिवार ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनके पिता हन्दू भगत ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को शासन-प्रशासन और कथित भू-माफिया की ओर से प्रताड़ित किया जा रहा था।

निशा भगत की मौत के बाद रांची समेत झारखंड के आदिवासी सामाजिक संगठनों में भी शोक और आक्रोश का माहौल है। परिवार का कहना है कि निशा लगातार अपने अधिकारों और आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रही थीं। ऐसे में उनकी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

फेसबुक लाइव के बाद हुई मौत

मिली जानकारी के अनुसार, 6 नवंबर 2026 को निशा भगत ने फेसबुक पर लाइव आकर अपनी परेशानियों और शिकायतों को सार्वजनिक किया था। लाइव के दौरान उन्होंने कथित तौर पर जमीन विवाद, भू-माफिया और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी से भी फोन पर बात की थी।

इसके कुछ ही समय बाद उनके घर पर पुलिस पहुंची। पुलिस उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर गई, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घटना की खबर मिलते ही परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।

पिता ने जताई बड़ी साजिश की आशंका

निशा भगत के पिता हन्दू भगत ने बेटी की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जनहित और आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष करने के कारण उनकी बेटी को लगातार परेशान किया जा रहा था। उन्होंने शासन-प्रशासन और कथित भू-माफिया पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

पिता के मुताबिक, निशा ने पहले भी अपनी परेशानियों के बारे में परिवार को बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पिठोरिया थाना पुलिस से शिकायत करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित मदद नहीं मिली।

भाई ने भी उठाए मौत पर सवाल

निशा के भाई राजकुमार भगत ने भी बहन की मौत को लेकर संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि उनकी बहन किसी भी परिस्थिति में आत्महत्या नहीं कर सकती थीं। भाई ने राजनीतिक दबाव की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

परिवार ने यह भी बताया कि करीब चार महीने पहले पिठोरिया स्थित निशा के घर में डकैती हुई थी। इस घटना में अपराधी सीसीटीवी कैमरे और अन्य सामान भी ले गए थे। पिता का आरोप है कि इस मामले में भी पुलिस से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला था।

ग्रामीण एसपी ने क्या कहा?

मामले में रांची के ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि 6 नवंबर को दोपहर करीब 12:15 बजे पिठोरिया थाना क्षेत्र से निशा भगत द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने की सूचना मिली थी। फेसबुक लाइव की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम उनके घर पहुंची और उन्हें अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

एसपी के अनुसार, घटना के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए। मेडिकल बोर्ड की देखरेख में पोस्टमार्टम कराया गया है। पुलिस ने अप्राकृतिक मौत (UD) का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पिठोरिया थाना प्रभारी के खिलाफ निशा द्वारा लगाए गए आरोपों और पहले की गई शिकायतों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सभी तथ्यों का खुलासा किया जाएगा।

CBI जांच की मांग से गरमाया मामला

निशा भगत की मौत के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने फेसबुक लाइव में लगाए गए आरोपों और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा मामले में जिन लोगों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले ने आदिवासी समाज के अधिकारों, जमीन विवादों और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

कई सवालों के जवाब का इंतजार

निशा भगत की मौत के बाद अब परिवार और समाज की निगाहें जांच पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निशा ने पहले पुलिस प्रशासन से कोई शिकायत की थी और उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई? फेसबुक लाइव में लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या है? क्या इस मामले में किसी तरह का दबाव या प्रताड़ना थी?

इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों से सामने आना बाकी है। फिलहाल परिवार अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रहा है और पिता ने साफ कहा है कि पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।