नवादा,  आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बिहार ग्रामीण बैंक की सिसवां शाखा ने महत्वपूर्ण पहल की है। शाखा की ओर से गुरुवार को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को करीब एक करोड़ रुपये की ऋण राशि उपलब्ध करायी गयी। ऋण मिलने के बाद महिलाओं में अपना रोजगार शुरू करने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने को लेकर उत्साह देखा गया।

कार्यक्रम में बैंक के शाखा प्रबंधक राजेश कुमार ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि बैंक की ओर से दी जा रही ऋण राशि किसी प्रकार की खैरात नहीं है। यह महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने और स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए दी जा रही है। उन्होंने महिलाओं से ऋण राशि का सदुपयोग करने और समय पर बैंक की राशि वापस करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि मेहनत और लगन से किया गया कोई भी व्यवसाय छोटा नहीं होता। महिलाएं अपनी रुचि और स्थानीय जरूरत के अनुसार छोटे व्यवसाय से शुरुआत कर सकती हैं। यदि व्यवसाय में ईमानदारी और मेहनत के साथ काम किया जाए तो धीरे-धीरे आमदनी बढ़ायी जा सकती है। इससे न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि महिलाओं को भी समाज में आत्मनिर्भर पहचान मिलेगी।

शाखा प्रबंधक ने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई महिलाओं ने समूह के माध्यम से बैंक से ऋण लेकर अपना कारोबार शुरू किया और आज वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि क्षेत्र की कई महिलाएं अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाकर वाहन तक खरीद चुकी हैं। यह उनके आर्थिक विकास और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह केवल ऋण लेने का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं को एक-दूसरे से जोड़कर सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं। नियमित बचत, बैंक से जुड़ाव और ऋण का सही उपयोग कर महिलाएं अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

बैंक की ओर से एक करोड़ रुपये की ऋण राशि उपलब्ध कराए जाने से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं में खासा उत्साह रहा। महिलाओं ने कहा कि बैंक से मिले ऋण से उन्हें रोजगार शुरू करने तथा पहले से चल रहे व्यवसाय को विस्तार देने की नसीहत दी।