रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने लंबे समय से संविदा या अस्थायी आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर किसी नियुक्ति को अवैध नहीं माना जा सकता कि नियुक्ति से पहले सार्वजनिक विज्ञापन जारी नहीं किया गया था। अदालत ने लंबे समय से लगातार सेवा दे रहे कर्मियों के मामले में नियमितीकरण के दावे पर विचार करने का रास्ता स्पष्ट किया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि संबंधित कर्मचारी लंबे समय से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनके काम की आवश्यकता लगातार बनी हुई है। करीब 10 वर्षों या उससे अधिक समय से कार्यरत कर्मियों के नियमितीकरण के दावे को केवल नियुक्ति प्रक्रिया में विज्ञापन नहीं होने के आधार पर खारिज करना उचित नहीं माना गया।

विज्ञापन नहीं निकलना अकेला आधार नहीं

अदालत के आदेश का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि नियुक्ति प्रक्रिया में सार्वजनिक विज्ञापन नहीं होने को अपने आप में नियुक्ति को अवैध ठहराने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। हालांकि नियमितीकरण का दावा नियुक्ति की प्रकृति, पद की स्वीकृति, कर्मचारी की योग्यता और उस समय लागू नियमों समेत अन्य तथ्यों पर निर्भर करेगा।

हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि लंबे समय से लगातार सेवा दे रहे कर्मचारियों के मामलों को कानून और संबंधित नियमों के अनुरूप अलग-अलग परिस्थितियों में देखा जाना चाहिए।

10 साल से अधिक सेवा करने वालों के लिए अहम

फैसले का सीधा असर उन कर्मचारियों के मामलों पर पड़ सकता है, जो लंबे समय से विभागों में संविदा या अस्थायी व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं। यदि कर्मचारी ने करीब 10 वर्ष या उससे अधिक समय तक लगातार सेवा दी है और अन्य आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं, तो उसके नियमितीकरण के दावे पर विचार किया जा सकता है।

अदालत ने लंबे समय तक सेवा लेने के बाद कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावों पर विचार करते समय नियुक्ति की परिस्थितियों और विभाग की वास्तविक जरूरत को भी ध्यान में रखने की बात कही है।

नियमितीकरण के लिए जरूरी होंगी अन्य शर्तें

हालांकि इस आदेश का यह अर्थ नहीं है कि 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाला हर कर्मचारी स्वतः नियमित हो जाएगा। नियमितीकरण के लिए पद की स्थिति, नियुक्ति की वैधता, आवश्यक योग्यता, संबंधित विभाग के नियम और सरकार की नियमितीकरण नीति जैसी शर्तें महत्वपूर्ण रहेंगी।

इस फैसले से लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मियों को अपने नियमितीकरण के दावे को संबंधित विभाग के समक्ष रखने के लिए महत्वपूर्ण कानूनी आधार मिल सकता है। मामले में हाईकोर्ट की विस्तृत टिप्पणी और आदेश में निर्धारित शर्तें संबंधित कर्मचारियों के लिए आगे की प्रक्रिया तय करने में महत्वपूर्ण होंगी।