शिमला : पंचायत प्रधान प्रत्याशी पर नहीं हुआ था हमला, पुलिस जांच में नहीं मिले मारपीट के सबूत
शिमला, । शिमला जिला के सुन्नी क्षेत्र में पंचायत चुनाव के दौरान प्रधान पद की प्रत्याशी पर कथित हमले के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जिला पुलिस शिमला का कहना है कि शुरुआती शिकायत में जिन दो नकाबपोश लोगों द्वारा हमला करने और धक्का देकर झाड़ियों में फेंकने का आरोप लगाया गया था, जांच में उसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। पुलिस के मुताबिक अब शिकायतकर्ता ने खुद भी अपने बयान बदलते हुए कहा है कि उसे शायद भ्रम हुआ था।
पुलिस के अनुसार 15 मई को भीमलता सुमना देवी, पत्नी प्रेम कुमार, निवासी गांव लिक्कर, डाकघर दुर्गापुर, तहसील और थाना सुन्नी ने शिकायत दर्ज करवाई थी। उन्होंने बताया था कि उन्होंने ग्राम पंचायत नालदेहरा में प्रधान पद के लिए नामांकन भरा था और अन्य तीन उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में थे। शिकायत में कहा गया था कि 15 मई को दोपहर करीब 2 बजकर 45 मिनट पर जब वह अपना नामांकन वापस लेने के लिए पंचायत की ओर जा रही थीं, तब घर से करीब 100 मीटर दूर दो मुंह ढके लोगों ने पीछे से उनकी गर्दन और कंधे पकड़कर धक्का दे दिया, जिससे वह बेहोश होकर गिर गईं।
इस शिकायत के आधार पर थाना सुन्नी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2) और 115(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच शुरू की और पीड़िता का मेडिकल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशोबरा में करवाया गया। पुलिस के मुताबिक मेडिकल रिपोर्ट में किसी प्रकार की चोट सामने नहीं आई।
जांच के दौरान शिकायतकर्ता ने पुलिस को यह भी बताया था कि आरोपियों ने उनके साथ मारपीट कर उन्हें झाड़ियों में फेंक दिया था। लेकिन जब पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो वहां मौजूद घास, झाड़ियां और छोटे पौधे पूरी तरह सामान्य हालत में पाए गए। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर किसी तरह के संघर्ष या गिरने के निशान नहीं मिले।
पुलिस के अनुसार बाद में शिकायतकर्ता से दोबारा गहन पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने अपने पहले बयान से अलग बात कही। पुलिस का दावा है कि शिकायतकर्ता ने बताया कि घटना के समय उन्हें ऐसा केवल भ्रम हुआ था कि दो लोगों ने पीछे से पकड़ लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पहले भी “खेल” आने की समस्या रही है और संभव है कि उस दिन भी वैसी ही स्थिति हुई हो, जिसके कारण उन्हें हमले का एहसास हुआ।
इन तथ्यों के आधार पर शिमला पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में मामला तथ्यहीन और कल्पना पर आधारित प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने मीडिया से अपील की है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में किसी भी घटना की रिपोर्टिंग से पहले पुलिस का आधिकारिक पक्ष जरूर लिया जाए।















