नई दिल्ली,  दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस की साइबर थाना पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह म्यूल बैंक खातों के जरिए लोगों से ठगी कर रहा था और गेमिंग ऐप के माध्यम से रकम को इधर-उधर कर उसका स्रोत छिपा रहा था। पुलिस ने आरोपितों के पास से 79 हजार रुपये नकद, 28 मोबाइल फोन, 17 पासबुक, तीन लैपटॉप और 23 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं।

दक्षिण-पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने शनिवार को बताया कि, दक्षिण-पश्चिम जिले में सक्रिय संदिग्ध बैंक खातों के विश्लेषण के दौरान इस संगठित गिरोह का खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि आरोपित फर्जी निवेश योजनाओं, पार्ट-टाइम जॉब ऑफर और अन्य ऑनलाइन स्कैम के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। ठगी की रकम को म्यूल खातों में ट्रांसफर कर उसे कई स्तरों पर घुमाया जाता था, जिससे उसकी ट्रैकिंग बेहद कठिन हो जाती थी।

उन्होंने बताया कि गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को झांसे में लेते थे और उन्हें कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते, सिम कार्ड और एटीएम कार्ड हासिल कर लेते थे। इसके बाद इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के पैसों को निकालने और ट्रांसफर करने में किया जाता था।

मामले की जांच के लिए इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी विश्लेषण, वित्तीय लेनदेन की जांच और फील्ड सर्विलांस के जरिए सबसे पहले मोहम्मद फैज को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने अपने चचेरे भाई मोहम्मद फहाद का नाम बताया, जिसे शाहीन बाग इलाके से पकड़ा गया।

आगे की जांच में सुवेब रब्बानी, सतेंद्र राठौर, शनी पाल और प्रीतम कुमार सहित कई अन्य आरोपितों की पहचान हुई। पुलिस ने नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद में छापेमारी कर इन सभी को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान अभिषेक मिश्रा और अभिषेक सिंह की भूमिका भी सामने आई, जो बड़े स्तर पर म्यूल खातों की सप्लाई कर रहे थे।

जांच के दौरान लक्ष्मी नगर स्थित एक कॉल सेंटर का भी भंडाफोड़ हुआ, जहां छह आरोपित ऑनलाइन बेटिंग ऐप के नाम पर ऑपरेशन चला रहे थे। यहां से पुलिस ने तीन लैपटॉप, 19 मोबाइल फोन, 17 पासबुक, 23 एटीएम कार्ड, नौ सिम कार्ड और 79 हजार रुपये नकद बरामद किए।

पुलिस उपायुक्त अमित गोयल के अनुसार, गिरोह का सरगना मुकुल मलिक है, जो पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था और ‘हैंक’ नाम के मास्टरमाइंड के संपर्क में था। उन्होंने बताया कि आरोपित ठगी की रकम को गेमिंग अकाउंट के जरिए ट्रांसफर कर उसकी असल पहचान छिपाते थे, जिससे जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके।

गिरफ्तार आरोपितों में छात्र, डिलीवरी बॉय और टेली-कॉलर भी शामिल हैं, जो लालच में आकर इस नेटवर्क का हिस्सा बन गए थे। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और अब तक 15 साइबर शिकायतों को इससे जोड़ा गया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी लालच में आकर अपने बैंक खाते या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके।