आदिवासी संगठनों ने फूंका निशा उरांव का पुतला
खूंटी, निशा उरांव के नेतृत्व में पारंपरिक उल्गुलान और
सामाजिक डीलिस्टिंग आंदोलन के तहत बुधवार को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपे जाने
के विरोध में आदिवासी संगठनों ने गुरुवार काे नेताजी चौक के पास निशा
उरांव का पुतला दहन किया।
इसके पूर्व गुरुवार की सुबह जीउरी गांव
में विशेष ग्राम सभा बुलाई गई और निशा उरांव द्वारा दिए बयान की निंदा की
गई। ग्रामसभा में ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने निशा उरांव के बयान का कड़ा
विरोध करते हुए इसे भ्रामक, अपमानजनक और गांव की ऐतिहासिक गरिमा के खिलाफ
बताया।
विशेष ग्रामसभा की अध्यक्षता करते हुए ग्राम प्रधान बिनसाय
मुंडू ने कहा कि जीउरी गांव एक बकाश्त मुंडारी खूंटकट्टी गांव है, जिसकी
ऐतिहासिक पहचान को तोड़-मरोड़ कर पेश करना निंदनीय है।
बिनसाय मुंडू
ने कहा कि यदि किसी को जीउरी गांव के इतिहास की जानकारी नहीं है तो पहले
डोम्बारी बुरु जाकर ऐतिहासिक तथ्यों को समझना चाहिए, उसके बाद ही कोई बयान
देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान समाज में भ्रम और
विभाजन पैदा करते हैं।
ग्रामसभा में निशा उरांव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए और पूछा गया कि वे किस हैसियत से इस तरह के बयान दे रही हैं।
मौके पर चंद्रप्रभात मुंडा, जॉनसन होरो, दामु मुंडा, सुरजू हस्सा, नरेश तिर्की, डेविड हमसोय मौजूद थे।














