दिल्ली-NCR में मौसम और प्रदूषण का डबल अटैक: बारिश, ठंडी हवाओं और जहरीली हवा से बढ़ीं मौसमी बीमारियां, अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी
नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में मौसम में अचानक बदलाव और लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता ने लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं। बारिश, ठंडी हवाओं और जहरीली हवा के मिले-जुले असर से खांसी, जुकाम, वायरल बुखार, गले में खराश और सांस से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। पूर्वी दिल्ली के कई अस्पतालों में मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम में अचानक उतार-चढ़ाव के साथ प्रदूषण का बढ़ता स्तर स्थिति को और गंभीर बना रहा है। एक तरफ तापमान में गिरावट और ठंडी हवाएं शरीर को प्रभावित कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कण फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर असर डाल रहे हैं। ऐसे में सामान्य सर्दी-जुकाम से लेकर अस्थमा और एलर्जी की शिकायतें बढ़ने की आशंका है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्वी दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल, स्वामी दयानंद अस्पताल, राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में खांसी, जुकाम, वायरल बुखार और सांस संबंधी शिकायतों वाले मरीज पहुंच रहे हैं। GTB अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार के मुताबिक, तापमान में अचानक गिरावट आने से शरीर को बदलते मौसम के अनुरूप ढलने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का स्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है। भारतीय मौसम और वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान संस्थानों के आंकड़ों के अनुसार, 3 नवंबर को शाम 4 बजे दिल्ली का AQI 350 दर्ज किया गया था, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। वहीं, 6 और 7 नवंबर के लिए वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंचने का पूर्वानुमान जारी किया गया था। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में भी लोगों को प्रदूषण से राहत मिलने की संभावना सीमित रह सकती है। नोएडा में भी प्रदूषण का असर साफ दिखाई दे रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ ही दिनों में AQI 58 से बढ़कर 320 से अधिक पहुंच गया। इसके साथ ही लगातार सिरदर्द, खांसी, गले में जलन, नाक बंद होना, एलर्जी, घरघराहट और सांस लेने में परेशानी की शिकायतें बढ़ी हैं। यहां तक कि पहले से किसी श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित नहीं रहने वाले लोग भी इन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने से निकलने वाला धुआं प्रमुख हैं। इसके अलावा मौसम में बदलाव भी प्रदूषण की समस्या को गंभीर बना रहा है। ठंड के मौसम में हवा की गति कम होने और वातावरण में नमी तथा अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कण जमीन के करीब जमा हो सकते हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के साथ आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाएं भी योगदान दे रही हैं। बारिश के बाद दिल्ली-NCR में डेंगू को लेकर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है। घरों और आसपास जमा होने वाला साफ पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। इसलिए कूलर, गमले, पानी की टंकियों, पुराने टायरों और खुले बर्तनों में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। डेंगू से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनना, मच्छरदानी का इस्तेमाल करना और आसपास साफ-सफाई रखना जरूरी है। बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द या प्लेटलेट्स में कमी जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक, वायु प्रदूषण और बदलते मौसम का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ सकता है। बच्चे: प्रदूषण के कारण सांस की नली में जलन और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों के विकास पर भी असर पड़ सकता है। बुजुर्ग: सांस लेने में परेशानी और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। अस्थमा के मरीज: प्रदूषण के कारण सांस फूलने, घरघराहट और खांसी की समस्या बढ़ सकती है। हृदय रोगी: खराब हवा में मौजूद सूक्ष्म कण हृदय और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों ने पहले से निर्धारित दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से लेने तथा परेशानी बढ़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। प्रदूषण और मौसमी बीमारियों से बचने के लिए डॉक्टरों ने कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। बाहर निकलने से बचें: AQI बहुत खराब या गंभीर होने पर अनावश्यक बाहरी गतिविधियां सीमित रखें। N95 मास्क पहनें: बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करें। खिड़की-दरवाजे बंद रखें: प्रदूषण अधिक होने के दौरान घर के अंदर बाहरी हवा का प्रवेश कम करें। एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें: उपलब्ध होने पर घर के अंदर हवा की गुणवत्ता बेहतर रखने के लिए इसका उपयोग करें। खुले में व्यायाम न करें: खराब AQI के दौरान पार्क या सड़क पर दौड़ने और व्यायाम करने से बचें। पानी और पौष्टिक भोजन लें: शरीर को हाइड्रेटेड रखें और संतुलित आहार का सेवन करें। बिना सलाह दवा न लें: लगातार खांसी, बुखार या सांस लेने में परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता बिगड़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण को लागू किया है। इसके तहत सड़कों की नियमित मैकेनिकल सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन और यातायात प्रबंधन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली मेट्रो ने कार्यदिवसों में 20 अतिरिक्त ट्रेन यात्राएं चलाने की घोषणा की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव और प्रदूषण का एक साथ असर लोगों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकता है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, तेज बुखार, सांस फूलने, सीने में जकड़न या अस्थमा के लक्षणों में बढ़ोतरी महसूस हो रही है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में सांस लेने में परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टरों ने बिना जांच के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेने से भी बचने की सलाह दी है। कुल मिलाकर, दिल्ली-NCR के लोगों के लिए इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ बदलते मौसम के कारण मौसमी संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ जहरीली हवा श्वसन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है। ऐसे में सावधानी, स्वच्छता और समय पर इलाज ही इन स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।कई अस्पतालों में बढ़े मौसमी बीमारियों के मरीज
प्रदूषण ने बढ़ाई सांस और एलर्जी की परेशानी
प्रदूषण बढ़ने के पीछे क्या हैं प्रमुख कारण?
डेंगू का खतरा भी बढ़ा, बारिश के बाद सावधानी जरूरी
बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरा
जहरीली हवा से बचने के लिए अपनाएं ये 7 उपाय
GRAP के तहत प्रदूषण नियंत्रण के कदम तेज
डॉक्टरों की सलाह: लक्षणों को नजरअंदाज न करें















