एसआरएन में आयुष्मान योजना से सफल स्पाइन सर्जरी, दूसरे दिन सीधे होकर चलने लगा मरीज
पांच महीने से दर्द और चलने में परेशानी से जूझ रहे चित्रकूट के 52 वर्षीय मरीज को मिली राहत
प्रयागराज, स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में आयुष्मान भारत योजना के तहत 52 वर्षीय मरीज की रीढ़ की हड्डी की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ और वह दूसरे दिन ही सीधे होकर चलने लगा। करीब पांच महीने से दर्द और चलने में कठिनाई से परेशान मरीज को राहत मिलने से चिकित्सकों की टीम ने संतोष जताया।
चित्रकूट निवासी मन्नू लाल पिछले पांच महीने से दर्द और चलने में परेशानी का सामना कर रहे थे। चलते समय उनका ऊपरी धड़ दाईं ओर झुक जाता था, जिससे रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो गया था। चिकित्सकीय जांच और आवश्यक मूल्यांकन के बाद एसआरएन के अस्थिरोग विभाग की टीम ने उनकी ट्रांसफोरामिनल लम्बर इंटरबॉडी फ्यूजन (टीएलआईएफ) सर्जरी करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के बाद मरीज की चलने की मुद्रा में सुधार देखा गया।
नसों पर दबाव कम कर रीढ़ को स्थिर करती है सर्जरी
टीएलआईएफ कमर की रीढ़ की एक शल्य चिकित्सा तकनीक है। इसमें प्रभावित डिस्क के हिस्से को हटाकर नसों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जाता है। इसके बाद दो कशेरुकाओं के बीच विशेष केज और बोन ग्राफ्ट लगाया जाता है। स्क्रू और रॉड की सहायता से रीढ़ के प्रभावित हिस्से को स्थिर किया जाता है। समय के साथ बोन ग्राफ्ट दोनों कशेरुकाओं को आपस में जुड़ने में मदद करता है।
यह सर्जरी उन चुनिंदा मरीजों के लिए उपयोगी होती है, जिनकी रीढ़ की हड्डी में अस्थिरता, कशेरुकाओं के खिसकने, डिस्क के अधिक घिसने या नसों के रास्ते के संकरा होने जैसी समस्याएं होती हैं और रीढ़ को स्थिर करना आवश्यक होता है।
अस्थिरोग विभाग के सहायक आचार्य डॉ. आनंद कुमार ने बताया कि मरीज लंबे समय से दर्द और चलने में कठिनाई से परेशान थे। जांच के आधार पर टीएलआईएफ सर्जरी की गई। इसका उद्देश्य नसों पर दबाव कम करने के साथ रीढ़ के प्रभावित हिस्से को स्थिरता देना है। ऑपरेशन के दूसरे दिन मरीज का सीधे होकर चलना उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि आगे नियमित चिकित्सकीय जांच और डॉक्टरों के निर्देशों के अनुसार पुनर्वास जरूरी रहेगा।
चिकित्सकों और ओटी कर्मचारियों की टीम ने किया सहयोग
सर्जरी करने वाली अस्थिरोग विभाग की टीम में डॉ. आनंद कुमार, सीनियर रेजिडेंट डॉ. आशुतोष और जूनियर रेजिडेंट डॉ. मेहुल शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में सहायक आचार्य डॉ. अनिल सिंह, जूनियर रेजिडेंट डॉ. विपिन और डॉ. स्वाति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन थिएटर की प्रभारी श्रीमती अनुपम सिंह और विनोद ने भी सहयोग किया।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. ए.के. वर्मा ने सर्जरी में शामिल पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अस्थिरोग विभाग, एनेस्थीसिया विभाग और ऑपरेशन थिएटर के कर्मचारियों के समन्वित प्रयास से यह सर्जरी सफल हुई। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को जटिल उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना संस्थान की प्राथमिकता है। मरीज को राहत मिलना पूरी टीम के लिए संतोष का विषय है।















