नई दिल्ली: आमतौर पर जब भी एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) की बात होती है, तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले सीने में जलन, खट्टी डकार और पेट में एसिड बनने जैसी समस्याएं आती हैं। लेकिन जरूरी नहीं कि एसिड रिफ्लक्स होने पर हर व्यक्ति को सीने में जलन ही महसूस हो। कई बार इसका असर गले और आवाज पर भी दिखाई देता है। लगातार गला खराब रहना, बार-बार खांसी आना, आवाज बैठना या गले में कुछ फंसे होने जैसा महसूस होना भी एसिड रिफ्लक्स के संभावित संकेत हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मामलों में पेट का एसिड भोजन नली से ऊपर गले तक पहुंच सकता है। इस स्थिति को लैरिंगोफैरिंजियल रिफ्लक्स (Laryngopharyngeal Reflux या LPR) कहा जाता है। इसे आमतौर पर साइलेंट रिफ्लक्स भी कहते हैं, क्योंकि इसमें कई लोगों को सीने में जलन जैसी सामान्य शिकायत नहीं होती।

                                                 

क्या है एसिड रिफ्लक्स और क्यों होती है परेशानी?

हमारे पेट में भोजन को पचाने के लिए एसिड बनता है। सामान्य स्थिति में भोजन नली के निचले हिस्से में मौजूद एक मांसपेशी वाल्व की तरह काम करती है और पेट के एसिड को वापस ऊपर आने से रोकती है।

लेकिन जब यह मांसपेशी ठीक से काम नहीं करती या गलत समय पर खुल जाती है, तो पेट का एसिड भोजन नली में वापस आने लगता है। इसी समस्या को एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है।

अगर यह समस्या बार-बार होती है, तो इसे गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) कहा जा सकता है। कुछ मामलों में एसिड या पेट की अन्य सामग्री गले तक भी पहुंच सकती है, जिससे वहां जलन और परेशानी महसूस होती है।

गले में दिखने वाले एसिड रिफ्लक्स के 7 प्रमुख संकेत

एसिड रिफ्लक्स का असर केवल पेट और सीने तक सीमित नहीं रहता। जब पेट का एसिड गले तक पहुंचता है, तो कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।

1. बार-बार गला साफ करने की जरूरत महसूस होना

अगर आपको बार-बार गला साफ करना पड़ता है या ऐसा लगता है कि गले में कुछ जमा हुआ है, तो यह साइलेंट रिफ्लक्स का संभावित संकेत हो सकता है।

2. आवाज का बैठना या भारी होना

सुबह उठने के बाद आवाज में भारीपन, गले में खराश या बोलते समय परेशानी होना भी रिफ्लक्स से जुड़ा हो सकता है। एसिड के संपर्क में आने से वोकल कॉर्ड में जलन हो सकती है।

3. लगातार सूखी खांसी

अगर आपको बिना सर्दी-जुकाम के लंबे समय तक सूखी खांसी रहती है, खासकर रात में या खाना खाने के बाद, तो इसके पीछे एसिड रिफ्लक्स एक संभावित कारण हो सकता है।

4. गले में कुछ फंसे होने जैसा महसूस होना

कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि उनके गले में कोई गांठ या बाहरी वस्तु फंसी हुई है। इस स्थिति को ग्लोबस सेंसेशन (Globus Sensation) कहा जाता है।

5. निगलने में परेशानी

भोजन या पानी निगलते समय असहजता महसूस होना एसिड रिफ्लक्स से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। लगातार निगलने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

6. मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद आना

कभी-कभी पेट की सामग्री वापस मुंह तक पहुंच सकती है। इससे मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद महसूस होता है और सांसों में दुर्गंध की समस्या भी हो सकती है।

7. गले में जलन और खराश

बिना किसी स्पष्ट संक्रमण के गले में बार-बार जलन, खराश या असहजता महसूस होना भी रिफ्लक्स से संबंधित हो सकता है।

ध्यान रहे कि ये लक्षण एलर्जी, संक्रमण, अस्थमा और अन्य बीमारियों के कारण भी हो सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर एसिड रिफ्लक्स की पुष्टि नहीं की जा सकती।

साइलेंट रिफ्लक्स क्या है? क्यों नहीं मिलता सीने में जलन का संकेत?

साइलेंट रिफ्लक्स को मेडिकल भाषा में लैरिंगोफैरिंजियल रिफ्लक्स (LPR) कहा जाता है। इसमें पेट की सामग्री भोजन नली से ऊपर गले और वॉयस बॉक्स तक पहुंच सकती है।

सामान्य एसिड रिफ्लक्स में सीने में जलन और खट्टी डकार प्रमुख लक्षण होते हैं। लेकिन LPR में गले की खराश, आवाज बैठना और लगातार खांसी जैसी समस्याएं अधिक दिखाई दे सकती हैं।

इसी वजह से कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य गले का संक्रमण या मौसम में बदलाव का असर समझ लेते हैं।

किन कारणों से बढ़ सकती है एसिड रिफ्लक्स की समस्या?

कुछ खानपान और जीवनशैली से जुड़ी आदतें एसिड रिफ्लक्स को बढ़ा सकती हैं।

  • अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन करना।

  • एक बार में बहुत ज्यादा खाना खाना।

  • खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाना।

  • रात में देर से भोजन करना।

  • अधिक चाय, कॉफी या कैफीन का सेवन।

  • धूम्रपान और शराब का सेवन।

  • अधिक वजन होना।

  • कुछ दवाओं का सेवन।

हर व्यक्ति में रिफ्लक्स बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।

एसिड रिफ्लक्स से बचने के लिए अपनाएं ये 6 आदतें

1. थोड़ा-थोड़ा करके भोजन करें: एक बार में अधिक खाना खाने के बजाय छोटे हिस्सों में भोजन करें।

2. खाने के बाद तुरंत न लेटें: भोजन करने के बाद कम से कम 2-3 घंटे तक लेटने से बचें।

3. रात का खाना जल्दी खाएं: सोने से कुछ घंटे पहले भोजन कर लें, ताकि पाचन के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

4. सोते समय सिर की तरफ ऊंचाई रखें: रात में रिफ्लक्स की परेशानी होने पर बेड के सिरहाने को लगभग 15-20 सेंटीमीटर ऊंचा करने से मदद मिल सकती है। केवल अतिरिक्त तकियों का ढेर लगाना उतना प्रभावी नहीं होता।

5. वजन नियंत्रित रखें: अधिक वजन होने पर पेट पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है।

6. अपने ट्रिगर फूड की पहचान करें: जिन खाद्य पदार्थों से परेशानी बढ़ती है, उनका सेवन कम करें।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

अगर गले में लगातार खराश, आवाज बैठने, सूखी खांसी या खट्टे स्वाद की समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

विशेष रूप से इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • भोजन निगलने में लगातार परेशानी।

  • निगलते समय दर्द होना।

  • बिना कारण वजन कम होना।

  • बार-बार उल्टी होना।

  • उल्टी में खून आना या काला मल होना।

  • लगातार गले में दर्द या आवाज में बदलाव।

अगर सीने में दर्द के साथ सांस फूलना, पसीना आना या दर्द हाथ और जबड़े तक फैलना जैसी समस्या हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। इसे केवल एसिडिटी समझना खतरनाक हो सकता है।

एसिड रिफ्लक्स का इलाज कैसे होता है?

एसिड रिफ्लक्स का उपचार उसकी गंभीरता और वास्तविक कारण पर निर्भर करता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार एंटासिड, एल्जिनेट या एसिड कम करने वाली दवाएं जैसे प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (PPI) दे सकते हैं।

हालांकि, हर गले की परेशानी का इलाज एसिड कम करने वाली दवाओं से नहीं होता। डॉक्टर आवश्यकता पड़ने पर एंडोस्कोपी या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।

खुद से लंबे समय तक एसिडिटी की दवाएं लेना उचित नहीं है।

                                         

निष्कर्ष: गले के संकेतों को न करें नजरअंदाज

एसिड रिफ्लक्स को केवल सीने में जलन या खट्टी डकार तक सीमित समझना सही नहीं है। कई बार शरीर गले में खराश, लगातार खांसी, आवाज बैठने और कुछ फंसे होने जैसी अनुभूति के जरिए भी संकेत देता है।

अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। सही खानपान, नियमित दिनचर्या और उचित उपचार से एसिड रिफ्लक्स को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

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