सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना केंद्र बनेगा श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक केंद्र: मुख्यमंत्री हेमंत
रांची (RANCHI): कुछ संस्थाएं केवल भवन नहीं होतीं, वे स्वयं के साथ-साथ मानव जीवन को भी तराशती हैं. श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण की नींव रखी जा रही है, जो आने वाले समय में सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक जागरण का प्रमुख केंद्र बनेगा. यह बातें मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कदमा स्थित मरीन ड्राइव परिसर में आयोजित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के भूमि पूजन समारोह को संबोधित करते हुए कही. मुख्यमंत्री ने इस पहल को सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समन्वय का जीवंत केंद्र बताते हुए इसे राज्य के लिए गौरवपूर्ण और सराहनीय कदम बताया. कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिलापट्ट का अनावरण कर केंद्र की आधारशिला रखी.
श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट की सोच और उद्देश्य की सराहना
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में स्थापित होने वाली संस्थाएं केवल संरचनाएं नहीं होतीं, बल्कि वे विचार, संस्कार और संस्कृति को आगे बढ़ाने का माध्यम बनती हैं. मुख्यमंत्री ने श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट की सोच और उद्देश्य की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि यह केंद्र एक अभूतपूर्व और भव्य स्वरूप में विकसित होगा. उन्होंने सभी संबंधित लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त करेगी.
ओडिशा और झारखंड के सांस्कृतिक संबंधों में आएगी मजबूती
वहीं राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि ऐसे केंद्र हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे ओडिशा और झारखंड के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने वाला कदम बताया.
कार्यक्रम में उनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जमशेदपुर के सांसद बिद्युत बरन महतो, विधायक सरयू राय और विधायक पूर्णिमा साहू, टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी नरेंद्रन, श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी एसके बेहरा, ट्रस्टी मनोरंजन दास एवं श्रीधर प्रधान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे. ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि पारंपरिक स्थापत्य शैली और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय से यह केंद्र आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और संस्कृति का प्रेरणास्रोत बनेगा.














