धनबाद रंजय सिंह हत्याकांड: 9 साल और 337 तारीखों के बाद आज आएगा फैसला, हर्ष सिंह की सशरीर पेशी का आदेश
धनबाद: बहुचर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में करीब नौ साल से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब फैसले के मुकाम तक पहुंच गई है। मामले में अदालत ने आज फैसला सुनाए जाने की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपी हर्ष सिंह को सशरीर अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। लंबे समय से चले इस मामले में अब सभी की निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। रंजय सिंह हत्याकांड का मामला वर्ष 2017 से न्यायिक प्रक्रिया में है। लगभग नौ वर्षों के दौरान मामले में 337 तारीखें पड़ चुकी हैं। लंबी सुनवाई के बाद अब अदालत ने मामले में निर्णय सुनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की ओर से अपने-अपने तर्क रखे गए। गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य बिंदुओं पर अदालत में सुनवाई हुई। रंजय सिंह की हत्या धनबाद में 29 जनवरी 2017 को गोली मारकर की गई थी। घटना के बाद धनबाद में यह मामला काफी चर्चित रहा था। पुलिस जांच के बाद मामले में कई लोगों के नाम सामने आए और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। जांच के दौरान पुलिस ने हत्या के पीछे कथित आपराधिक साजिश और आपसी विवाद समेत विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की थी। मामले की सुनवाई आगे बढ़ने के साथ आरोपी पक्ष की ओर से भी अपने बचाव में दलीलें पेश की गईं। अदालत ने फैसला सुनाए जाने के मद्देनजर आरोपी हर्ष सिंह को सशरीर पेश करने का आदेश दिया है। इसका मतलब है कि उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बजाय अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित कराया जाना है। फैसले के दिन आरोपी की मौजूदगी को लेकर जेल प्रशासन और पुलिस प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। करीब नौ साल तक चले इस मामले में कई चरणों में सुनवाई हुई। तारीख पर तारीख के कारण मामले का फैसला लंबे समय तक लंबित रहा। अब अदालत द्वारा निर्णय की तारीख तय किए जाने के बाद मृतक के परिजनों, आरोपी पक्ष और धनबाद के लोगों की निगाहें कोर्ट के आदेश पर टिकी हैं। बहुचर्चित हत्याकांड में फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी। आरोपी की सशरीर पेशी को देखते हुए पुलिस और जेल प्रशासन को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर मामले में क्या निर्णय सुनाती है। फैसला आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि अदालत ने अभियोजन के आरोपों को किस हद तक स्वीकार किया है।9 साल में 337 बार हुई तारीख
क्या है पूरा मामला?
हर्ष सिंह की सशरीर पेशी का आदेश
लंबे समय से फैसले का इंतजार
फैसले से पहले सुरक्षा पर भी नजर













