हजारीबाग: शहर के हुरहुरू स्थित 50 डिसमिल खासमहल जमीन को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। जमीन पर प्रशासन की कार्रवाई और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के दावे के बीच अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर सामने आए बयान ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। इस बीच योगेंद्र साव की बेटी और कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने अपने पिता के मुख्यमंत्री पर किए गए कथित व्यक्तिगत टिप्पणी से खुद को अलग करते हुए असहमति जताई है।

जमीन विवाद के बीच प्रशासन की कार्रवाई

हुरहुरू स्थित विवादित जमीन को प्रशासन खासमहल भूमि बता रहा है। जमीन पर कथित अतिक्रमण और निर्माण को लेकर प्रशासन की ओर से पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। सितंबर में भी प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आई थी। वहीं, योगेंद्र साव की ओर से जमीन पर अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज और एग्रीमेंट का हवाला दिया जाता रहा है।

मामले में जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर प्रशासन तथा योगेंद्र साव के पक्ष के बीच मतभेद बना हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विवादित भूमि पर प्रशासन पहले भी कई बार कार्रवाई कर चुका है।

मुख्यमंत्री पर टिप्पणी को लेकर अंबा ने जताई असहमति

शुक्रवार को प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और अधिकारियों के बीच तीखी बहस की खबर सामने आई। इसी घटनाक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर योगेंद्र साव की कथित व्यक्तिगत टिप्पणी भी सामने आई।

इसके बाद अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जमीन और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखना अलग बात है, लेकिन मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी उनके पिता से अपेक्षित नहीं थी।

अंबा की इस प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि वह खुद कांग्रेस की विधायक हैं और योगेंद्र साव की बेटी हैं। ऐसे में पिता के बयान से सार्वजनिक रूप से अलग रुख सामने आने से इस विवाद का राजनीतिक और पारिवारिक पक्ष भी चर्चा में आ गया है।

खासमहल जमीन क्या है?

खासमहल भूमि सरकारी भूमि की एक श्रेणी है, जिसका प्रबंधन और लीज से जुड़े मामले राजस्व प्रशासन के अधीन आते हैं। हजारीबाग जिला प्रशासन की राजस्व संबंधी जानकारी में खासमहल सरकार की भूमि की बंदोबस्ती और पट्टे से संबंधित कार्यों को राजस्व प्रशासन के दायरे में बताया गया है।

झारखंड सरकार ने भी 2026 में खासमहल भूमि से जुड़े लीज नवीनीकरण, हस्तांतरण और भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में खासमहल लीजधारकों के सर्वेक्षण, मैपिंग और दस्तावेजों के पुनः सत्यापन की बात कही गई थी।

विवाद अभी जमीन के दावे और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच

हुरहुरू की 50 डिसमिल जमीन को लेकर मुख्य विवाद इस बात पर केंद्रित है कि जमीन की वास्तविक कानूनी स्थिति क्या है और उस पर किस पक्ष का वैध अधिकार है। प्रशासन इसे खासमहल भूमि बताते हुए कार्रवाई कर रहा है, जबकि योगेंद्र साव की ओर से जमीन पर अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई है।

ऐसे मामलों में जमीन के स्वामित्व, लीज की स्थिति, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की वैधता का अंतिम निर्धारण सक्षम प्रशासनिक अथवा न्यायिक प्रक्रिया से होता है। इसलिए विवाद से जुड़े दावों को संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही अंतिम रूप से देखा जाना चाहिए।

पिता-बेटी के अलग-अलग रुख से बढ़ी चर्चा

इस पूरे मामले में अब सबसे ज्यादा चर्चा योगेंद्र साव और अंबा प्रसाद के अलग-अलग रुख को लेकर हो रही है। एक तरफ जमीन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर योगेंद्र साव का विरोध जारी है, वहीं दूसरी तरफ अंबा प्रसाद ने मुख्यमंत्री को लेकर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी से असहमति जताई है।

अंबा के बयान से यह स्पष्ट होता है कि वह जमीन विवाद के मुद्दे और मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी—इन दोनों को अलग-अलग विषय के रूप में देख रही हैं। फिलहाल हुरहुरू की खासमहल जमीन का विवाद प्रशासनिक कार्रवाई, जमीन से जुड़े दावों और राजनीतिक बयानबाजी के कारण लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

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