झारखंड में डायबिटीज के मरीजों की संख्या में बड़ा उछाल, एक साल में दोगुने से ज्यादा बढ़े मामले; 1.45 लाख लोगों में बीमारी की पुष्टि
रांची। झारखंड में डायबिटीज यानी मधुमेह के मरीजों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में एक साल के दौरान डायबिटीज से पीड़ित पाए गए लोगों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है। करीब 1.45 लाख लोगों में डायबिटीज की पुष्टि होने की खबर ने लोगों के स्वास्थ्य, खानपान और जीवनशैली को लेकर चिंता बढ़ा दी है। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। समय रहते इसकी पहचान और इलाज नहीं होने पर यह आंखों, किडनी, हृदय, नसों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित जांच, संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से इस बीमारी के जोखिम तथा इससे होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। झारखंड में एक साल के भीतर डायबिटीज के मामलों में हुई वृद्धि स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। 1.45 लाख लोगों में बीमारी की पुष्टि होने का आंकड़ा इस बात पर जोर देता है कि मधुमेह की पहचान, नियमित स्क्रीनिंग और मरीजों को उपचार से जोड़ने की जरूरत लगातार बढ़ रही है। हालांकि, मरीजों की संख्या में वृद्धि का अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि इतने कम समय में बीमारी की वास्तविक दर भी उसी अनुपात में बढ़ गई है। जांच अभियान का विस्तार, अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और पहले से बीमारी से पीड़ित लोगों की पहचान भी दर्ज मामलों में वृद्धि का कारण हो सकती है। आंकड़ों की सही व्याख्या के लिए पिछले वर्ष और मौजूदा वर्ष की जांच का दायरा, अवधि तथा मरीजों की परिभाषा जानना जरूरी है। डायबिटीज तब होती है, जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इंसुलिन का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इंसुलिन एक हार्मोन है, जो रक्त में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है। जब यह प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो खून में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहने पर शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। डायबिटीज के बढ़ते जोखिम के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित खानपान, मोटापा, पारिवारिक इतिहास, बढ़ती उम्र और कुछ अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, सामान्य वजन वाले और सक्रिय लोगों को भी डायबिटीज हो सकती है। शहरी क्षेत्रों में लंबे समय तक बैठकर काम करना, नियमित व्यायाम नहीं करना, पर्याप्त नींद की कमी और अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बदलती जीवनशैली, खानपान और स्वास्थ्य जांच तक पहुंच से जुड़े कारक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अक्सर लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य थकान या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई मामलों में डायबिटीज लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी मौजूद रह सकती है। यही वजह है कि जोखिम वाले लोगों के लिए समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है। डायबिटीज के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं: बार-बार पेशाब आना। सामान्य से अधिक प्यास लगना। बार-बार भूख लगना। बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना। लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना। आंखों से धुंधला दिखाई देना। घाव भरने में अधिक समय लगना। बार-बार संक्रमण होना। इनमें से कोई लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। हालांकि, लक्षण नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को डायबिटीज नहीं हो सकती। डायबिटीज की पहचान के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज, HbA1c या अन्य रक्त जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। HbA1c जांच से पिछले लगभग दो से तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर स्तर का आकलन किया जाता है। विशेष रूप से अधिक वजन वाले लोगों, परिवार में डायबिटीज का इतिहास रखने वालों, पहले से उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों और अन्य जोखिम वाले व्यक्तियों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच करानी चाहिए। जांच रिपोर्ट में शुगर का स्तर बढ़ा हुआ आने पर खुद से दवा शुरू करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। डायबिटीज के जोखिम को कम करने और बीमारी को नियंत्रित रखने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव मददगार हो सकते हैं। 1. संतुलित भोजन करें: भोजन में हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। मीठे पेय, अधिक चीनी और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें। 2. नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाएं: अपनी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार नियमित पैदल चलना, साइकिल चलाना या अन्य व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें। 3. वजन नियंत्रित रखें: यदि वजन अधिक है, तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार धीरे-धीरे वजन कम करने का प्रयास करें। 4. पर्याप्त नींद लें: नियमित और पर्याप्त नींद बेहतर स्वास्थ्य तथा ब्लड शुगर नियंत्रण में सहायक हो सकती है। 5. समय पर जांच कराएं: जोखिम होने पर जांच को टालें नहीं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित फॉलो-अप करें। जिन लोगों में डायबिटीज की पुष्टि हो चुकी है, उन्हें डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए। केवल खानपान में बदलाव के भएक साल में दोगुने से ज्यादा मरीज मिलने की खबर
क्या है डायबिटीज और क्यों बढ़ती है यह बीमारी?
बदलती जीवनशैली भी चिंता का विषय
डायबिटीज के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
समय पर जांच से मिल सकता है बड़ा लाभ
खानपान और व्यायाम से कैसे करें बचाव?
मरीजों के लिए नियमित इलाज जरूरी














