तमिलनाडु सरकार ने भंग की कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली केंद्र-राज्य संबंध समिति
चेन्नई, तमिलनाडु की तमिलगा वेत्रि कझगम (टीवीके) सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए केंद्र और राज्य के संबंधों की समीक्षा के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति को भंग करने का आदेश जारी किया है। इस समिति की अध्यक्षता में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसेफ कर रहे थे। पिछली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार ने राज्यों के अधिकारों की रक्षा और देश के संघीय ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से इस समिति का गठन किया था।
सरकार की ओर से जारी सरकारी आदेश में समिति को भंग करने के पीछे दो प्रमुख कारण बताए गए हैं। पहला, समिति का कानूनी रूप से औपचारिक गठन नहीं किया गया था। दूसरा, 7 अगस्त को पुनर्गठित तमिलनाडु राज्य विधि आयोग और इस समिति के कार्यों में समानता है। ऐसे में सरकार ने समिति के कामकाज को राज्य विधि आयोग को सौंपने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि, पिछली डीएमके सरकार ने वर्ष 2025 में केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों की समीक्षा के लिए इस उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इसका उद्देश्य राज्यों के अधिकारों की रक्षा करना, केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार लाना और भारतीय संघीय व्यवस्था को मजबूत करना था।
उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कुरियन जोसेफ को समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। वहीं, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के. अशोक वर्धन शेट्टी और राज्य योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन को सदस्य नियुक्त किया गया था। समिति ने अपने गठन के बाद काम शुरू किया और फरवरी 2026 में अपनी पहली रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों तथा संबंधों से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की गई थी।
टीवीके सरकार के नए आदेश के मुताबिक, राज्यों के आपसी संबंध, केंद्र-राज्य संबंध, मौजूदा कानूनों की समीक्षा और राज्य की कानूनी एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार से जुड़े काम अब तमिलनाडु राज्य विधि आयोग को सौंप दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि एक ही तरह के कार्यों के लिए अलग-अलग समितियां रखने की आवश्यकता नहीं है। इस फैसले के बाद तमिलनाडु में केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा और कानूनी सुधार से जुड़े कार्य राज्य विधि आयोग के माध्यम से आगे बढ़ाए जाएंगे।














