नई दिल्ली: साइबर अपराधियों ने अब केवल कंप्यूटर, मोबाइल और बैंकिंग सिस्टम को ही निशाना बनाना शुरू नहीं किया है। यूरोप के कई देशों में हैकर्स ने सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन सिस्टम को निशाना बनाकर फ्रीजर और फ्रिज का तापमान अचानक बढ़ा दिया। जिन मशीनों का काम खाद्य पदार्थों को ठंडा रखना था, वे देखते ही देखते गर्म होने लगीं। कुछ जगहों पर तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री खराब हो गई। इस घटना ने दुनिया भर में साइबर सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब हैकर्स इंटरनेट से जुड़े सुपरमार्केट के फ्रीजर को अपने नियंत्रण में लेकर उनका तापमान बदल सकते हैं, तो क्या वे हमारे घरों में मौजूद स्मार्ट फ्रिज, एयर कंडीशनर, हीटर और दूसरे इंटरनेट से जुड़े उपकरणों को भी निशाना बना सकते हैं? साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी रूप से ऐसा संभव है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्मार्ट घरेलू उपकरण असुरक्षित है।

यूरोप के कई देशों में सुपरमार्केट के फ्रीजर हुए हैक

नवंबर 2026 की शुरुआत में यूरोप के कई देशों में सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन सिस्टम में संदिग्ध साइबर हमले की घटनाएं सामने आईं। स्वीडन, फिनलैंड, बेल्जियम, लक्जमबर्ग, आयरलैंड और एस्टोनिया सहित कई देशों के स्टोर प्रभावित हुए। कुछ दुकानों में फ्रिज और फ्रीजर का तापमान अचानक बढ़ गया, जिसके कारण दुकानदारों को बड़ी मात्रा में खराब हो चुके खाद्य पदार्थ हटाने पड़े।

यह अक्टूबर में फ्रांस में सामने आई ऐसी ही घटनाओं की दूसरी बड़ी लहर थी। फ्रांस में सैकड़ों सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन सिस्टम प्रभावित हुए थे। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, वहां प्रभावित स्टोरों की संख्या 350 से 700 के बीच थी। कई जगहों पर फ्रीजर का तापमान लगभग 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था और कुछ उपकरणों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं।

रिपोर्टों के अनुसार, नवंबर की घटनाओं में भी कुछ दुकानों के फ्रीजर को 50 डिग्री सेल्सियस तक गर्म कर दिया गया। इससे मांस, डेयरी उत्पाद और अन्य जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को नुकसान पहुंचा। यूरोपीय संघ के कृषि आयुक्त ने इन घटनाओं को खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने और उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर करने की कोशिश बताया।

आखिर हैकर्स ने फ्रीजर को कैसे बनाया ओवन?

सुपरमार्केट में लगे आधुनिक फ्रिज और फ्रीजर केवल सामान्य बिजली से चलने वाली मशीनें नहीं हैं। बड़े स्टोरों में इनके तापमान, कूलिंग साइकल और तकनीकी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विशेष डिजिटल कंट्रोलर लगाए जाते हैं।

इन कंट्रोलर की मदद से स्टोर का कर्मचारी या तकनीकी टीम एक कंप्यूटर अथवा वेब पेज के माध्यम से अलग-अलग फ्रिज का तापमान देख सकती है। जरूरत पड़ने पर दूर बैठे ही मशीन की सेटिंग बदली जा सकती है। इससे दुकानों को रखरखाव और ऊर्जा की बचत में मदद मिलती है।

लेकिन यही सुविधा साइबर अपराधियों के लिए संभावित रास्ता बन गई।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ रेफ्रिजरेशन कंट्रोलर मूल रूप से स्थानीय नेटवर्क पर इस्तेमाल करने के लिए बनाए गए थे। बाद में उन्हें इंटरनेट से जोड़ दिया गया, ताकि तकनीकी कर्मचारी दूर से उनकी निगरानी कर सकें। कई पुराने सिस्टम में कमजोर पासवर्ड, पुराना सॉफ्टवेयर और सुरक्षा संबंधी कमियां मौजूद थीं।

यदि ऐसे कंट्रोलर का प्रबंधन पेज सार्वजनिक इंटरनेट से उपलब्ध हो और उसकी सुरक्षा पर्याप्त न हो, तो हमलावर अनधिकृत तरीके से उसमें प्रवेश कर सकते हैं। इसके बाद वे तापमान की सेटिंग बदलकर कूलिंग सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं।

पुराने सॉफ्टवेयर और कमजोर पासवर्ड बने बड़ी कमजोरी

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई औद्योगिक उपकरण वर्षों तक पुराने सॉफ्टवेयर पर चलते रहते हैं। कंप्यूटर और मोबाइल की तरह इन उपकरणों में नियमित अपडेट या सुरक्षा पैच लगाना हमेशा आसान नहीं होता।

कई बार दुकानों को डर रहता है कि अपडेट के दौरान मशीन बंद हुई तो खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, उपकरणों का रखरखाव बाहरी कंपनियों के कर्मचारी करते हैं। ऐसे में पासवर्ड बदलने, सॉफ्टवेयर अपडेट करने और इंटरनेट से सुरक्षित कनेक्शन बनाए रखने की जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थाओं के बीच बंट जाती है।

यही स्थिति हैकर्स के लिए अवसर पैदा करती है। कुछ साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने इंटरनेट पर ऐसे हजारों रेफ्रिजरेशन कंट्रोलर खोजे, जिनके प्रबंधन इंटरफेस सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे। हालांकि, इंटरनेट पर दिखाई देने वाले सभी सिस्टम वास्तविक या सक्रिय रूप से असुरक्षित नहीं होते।

क्या घर का स्मार्ट फ्रिज भी हो सकता है हैक?

सुपरमार्केट में हुई घटनाओं के बाद आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उनके घरों में लगे स्मार्ट फ्रिज और दूसरे उपकरण भी हैक किए जा सकते हैं?

इसका जवाब है—तकनीकी रूप से हां। यदि कोई घरेलू उपकरण इंटरनेट, मोबाइल ऐप, क्लाउड सर्विस या होम नेटवर्क से जुड़ा है, तो उसमें सुरक्षा की कमी होने पर साइबर अपराधी उसे निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

आज कई घरों में स्मार्ट फ्रिज, स्मार्ट टीवी, वाई-फाई कैमरे, स्मार्ट डोर लॉक, डिजिटल थर्मोस्टेट और इंटरनेट से नियंत्रित एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन उपकरणों को मोबाइल फोन से कहीं से भी नियंत्रित किया जा सकता है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। यूरोप के सुपरमार्केट में हुए हमलों में व्यावसायिक रेफ्रिजरेशन कंट्रोलर निशाने पर थे। इसका अर्थ यह नहीं है कि सामान्य घरेलू फ्रिज भी उसी तरह हैक किए जा चुके हैं। घरेलू उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी संरचना अलग हो सकती है। फिर भी, इंटरनेट से जुड़े हर उपकरण के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा जरूरी है।

घरों में हैकर्स किन उपकरणों को बना सकते हैं निशाना?

1. स्मार्ट फ्रिज: यदि फ्रिज इंटरनेट से जुड़ा है और उसमें रिमोट कंट्रोल की सुविधा है, तो कमजोर सुरक्षा की स्थिति में हमलावर उसकी डिजिटल सेवाओं या उससे जुड़े नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, सामान्य घरेलू फ्रिज का तापमान बदल देना हर मॉडल में संभव नहीं होता।

2. स्मार्ट AC और हीटिंग सिस्टम: इंटरनेट से नियंत्रित एयर कंडीशनर और हीटिंग सिस्टम में सुरक्षा की कमी होने पर कोई अनधिकृत व्यक्ति उनकी सेटिंग बदल सकता है। इससे असुविधा, ऊर्जा की बर्बादी और कुछ परिस्थितियों में सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

3. वाई-फाई कैमरे: कमजोर पासवर्ड या पुराने सॉफ्टवेयर वाले कैमरे साइबर अपराधियों के लिए घर की गतिविधियों पर नजर रखने का माध्यम बन सकते हैं।

4. स्मार्ट डोर लॉक और अलार्म: इंटरनेट से जुड़े सुरक्षा उपकरणों में सेंध लगने पर घर की डिजिटल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। हालांकि, हर डिवाइस में ऐसा हमला सफल हो जाए, यह जरूरी नहीं है।

5. होम राउटर: घर का वाई-फाई राउटर पूरे नेटवर्क का प्रवेश द्वार होता है। यदि हैकर राउटर पर नियंत्रण हासिल कर लेता है, तो वह नेटवर्क से जुड़े दूसरे उपकरणों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है।

क्या भारत में भी हो सकता है ऐसा साइबर हमला?

यूरोप की घटनाओं ने भारत के सुपरमार्केट, कोल्ड स्टोरेज, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और डिजिटल रिटेल सेक्टर के सामने भी सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है।

भारत में बड़े सुपरमार्केट, वेयरहाउस और कोल्ड चेन नेटवर्क में तापमान की निगरानी के लिए डिजिटल सेंसर और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल होता है। इससे खाद्य पदार्थों को निर्धारित तापमान पर रखने, मशीनों की खराबी का पता लगाने और परिचालन लागत कम करने में मदद मिलती है।

लेकिन यदि इन सिस्टम को बिना पर्याप्त सुरक्षा के इंटरनेट से जोड़ा जाता है, तो वे भी साइबर हमले के संभावित निशाने बन सकते हैं।

Moneycontrol की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के डिजिटल कोल्ड चेन सिस्टम में भी इसी तरह की तकनीकी कमजोरियों का जोखिम हो सकता है। हालांकि, फिलहाल भारत में यूरोप जैसी घटनाओं के बड़े पैमाने पर होने की पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि भारतीय सुपरमार्केट में कितने रेफ्रिजरेशन कंट्रोलर सार्वजनिक इंटरनेट पर असुरक्षित स्थिति में उपलब्ध हैं।

AI की मदद से बढ़ सकता है साइबर हमलों का खतरा?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की एक चिंता यह भी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण साइबर हमलों की तैयारी और विस्तार करना आसान हो सकता है। AI की मदद से हमलावर इंटरनेट पर उपलब्ध उपकरणों की पहचान, संभावित कमजोरियों की खोज और हमले की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश कर सकते हैं।

हालांकि, यूरोप के सुपरमार्केट फ्रीजर पर हुए हमलों में AI का इस्तेमाल हुआ था या नहीं, इसकी जांच एजेंसियों ने पुष्टि नहीं की है। इसलिए इन घटनाओं को AI आधारित हमला कहना अभी सही नहीं होगा।

घर को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर इंटरनेट से जुड़े घरेलू उपकरणों का जोखिम कम किया जा सकता है।

  • डिफॉल्ट पासवर्ड बदलें: स्मार्ट फ्रिज, कैमरे, राउटर और दूसरे उपकरणों में कंपनी की ओर से दिए गए शुरुआती पासवर्ड का इस्तेमाल न करें।

  • मजबूत पासवर्ड रखें: हर डिवाइस और ऑनलाइन अकाउंट के लिए अलग और अनुमान लगाना मुश्किल पासवर्ड बनाएं।

  • टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें: जहां यह सुविधा उपलब्ध हो, वहां दो-स्तरीय सुरक्षा का इस्तेमाल करें।

  • सॉफ्टवेयर अपडेट करें: उपकरणों के फर्मवेयर और मोबाइल ऐप को समय-समय पर अपडेट करते रहें।

  • अनावश्यक इंटरनेट कनेक्शन बंद रखें: जिन उपकरणों को रिमोट एक्सेस की जरूरत नहीं है, उन्हें इंटरनेट से जोड़ने से बचें।

  • राउटर को सुरक्षित रखें: वाई-फाई का पासवर्ड मजबूत रखें और राउटर के सुरक्षा अपडेट नियमित रूप से इंस्टॉल करें।

  • पुराने उपकरणों पर ध्यान दें: जिन डिवाइस को निर्माता सुरक्षा अपडेट देना बंद कर चुका है, उन्हें बदलने पर विचार करें।

साइबर सुरक्षा की नई चुनौती: अब खतरा सिर्फ डेटा चोरी तक सीमित नहीं

अब तक साइबर हमलों की चर्चा मुख्य रूप से बैंक खातों से पैसे चोरी होने, निजी डेटा लीक होने या कंप्यूटर लॉक करके फिरौती मांगने तक सीमित रहती थी। लेकिन सुपरमार्केट के फ्रीजर पर हुए हमलों ने दिखाया है कि डिजिटल सिस्टम में सेंध का असर सीधे वास्तविक दुनिया पर पड़ सकता है।

खाद्य पदार्थों की बर्बादी, सप्लाई चेन में रुकावट, कारोबार को आर्थिक नुकसान और आम लोगों में असुरक्षा की भावना—ये सभी ऐसे हमलों के संभावित परिणाम हैं। यही कारण है कि साइबर सुरक्षा को अब केवल आईटी विभाग की जिम्मेदारी नहीं माना जा सकता।

बड़ी खबर